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बिजली वितरण कंपनियों पर 73 हजार करोड़ रुपये का कर्ज! स्पेशल लोन देने की तैयारी में मोदी सरकार

अधिकारी ने बताया कि तमिलनाडु में वित्तीय संस्थान की तरफ से स्पेशल लोन जारी करने पर विचार किया जा रहा है। स्पेशल लोन उन शर्तों पर दिया जाएगा जिसमें इस राशि का प्रयोग ऊर्जा उत्पादन करने में लगाया जाएगा।

Author नई दिल्ली | Updated: October 10, 2019 3:38 PM
ऊर्जा मंत्रालय ने बिजली वितरण कंपनियों के संबंध में कोयला मंत्रालय से राय मांगी है। (फाइल फोटो)

देश में आर्थिक सुस्ती के बीच मोदी सरकार बिजली वितरण कंपनियों के कर्ज को देखते हुए उन्हें राहत दे सकती है। इकोनॉमिक टाइम्स की खबर के अनुसार मोदी सरकार बिजली वितरण कंपनियों को स्पेशल लोन देने पर विचार कर रही है। मालूम हो कि बिजली वितरण कंपनियों पर  72,862 करोड़ रुपये का बकाया है।

खबर में ऊर्जा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार रिन्यूएबल पावर कंपनियों पर भी 9735 करोड़ रुपये के बकाया की बात कही गई है। खबर में सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि सरकार बिना बैंक गारंटी जब्त किए पावर कंपनियों द्वारा कोयला आपूर्ति सरेंडर करने की अनुमति देने पर विचार कर रही है। इन कोयले के सप्लाई उन संयंत्रों को की जा सकती है जो फ्यूल की कमी से जूझ रहे हैं।

अधिकारी ने बताया कि तमिलनाडु में वित्तीय संस्थान की तरफ से स्पेशल लोन जारी करने पर विचार किया जा रहा है। स्पेशल लोन उन शर्तों पर दिया जाएगा जिसमें इस राशि का प्रयोग ऊर्जा उत्पादन करने में लगाया जाएगा। हाल ही में हुई एक बैठक में पावर कंपनियों की तरफ से इस तरह की सुविधा उत्तर प्रदेश, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में अन्य बड़े डिफॉल्टर्स के लिए देने की बात कही गई।

उर्जा उत्पादक एसोसिएशन के डायरेक्टर जनरल अशोक खुराना ने कहा कि इन कंपनियों की देनदारी 750000 करोड़ को छू रही है। ऐसे में यह सुनिश्चित करना होगा कि यह राशि एनपीए में न तब्दील हो। ऊर्जा मंत्रालय ने कोयला मंत्रालय से छह निर्माणाधीन पावर प्लांट के कोयला आपूर्ति के संबंध में राय मांगी है। इसमें बैंक गारंटी जब्त नहीं किए जाने की बात भी कही गई है। इनमें से कई कंपनियां कोयला आपूर्ति छोड़ने को तैयार हैं लेकिन वे चाहती हैं कि उनकी बैंक गारंटी जब्त ना की जाए।

अधिकारी ने कहा कि हम इस बात पर विचार कर रहे हैं कि क्या बिना बैंक गारंटी जब्त किए कोयले की सप्लाई सरेंडर करने की अनुमति दी जा सकती है या नहीं। हालांकि, इसके कुछ हद तक कोयले की कमी को दूर करने में मदद मिल सकती है। मालूम हो कि ऊर्जा मंत्री आरके सिंह ने हाल ही में तमिलनाडु, झारखंड और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर राज्य की बिजली वितरण कंपनियों के वित्तीय और परिचालन संबंधी नुकसान को दूर करने के संबंध में हस्तक्षेप करने को कहा था।

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