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सरकारी नौकरियों में बड़ी गिरावट, केंद्र ने बीते साल के मुकाबले कीं सिर्फ 50 पर्सेंट भर्तियां, राज्यों में भी बुरा हाल

मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था में 24 फ़ीसदी की गिरावट देखने को मिली थी। इस गिरावट को देखते हुए केंद्र सरकार ने केंद्रीय डिपार्टमेंट और मंत्रालयों को आने वाले कुछ समय में कोई नई नौकरी न निकालने का इंस्ट्रक्शन भी दिया है।

Author Edited By यतेंद्र पूनिया नई दिल्ली | Updated: September 30, 2020 10:21 AM
government jobsसरकारी नौकरियों में भर्ती में आई बड़ी गिरावट

केंद्र और राज्य सरकारों की सरकारी नौकरियों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। मौजूदा वित्त वर्ष में हायरिंग तीन साल के निचले स्तर पर है। इस वित्त वर्ष के शुरुआती 4 महीनों की बात करें तो बीते साल के मुकाबले केंद्रीय नौकरियों का औसत 50 फीसदी ही है, जबकि राज्य सरकारों की नौकरियों में भी पिछले साल के मुकाबले 60 पर्सेंट ही भर्तियां हुई हैं। नेशनल पेंशन सर्विस (एनपीएस) के अनुसार वित्त वर्ष 2020-21 में सरकारी नौकरियों में सबसे बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है। कोरोनावायरस के भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव के कारण न केवल प्राइवेट सेक्टर में नौकरियां जा रही हैं बल्कि केंद्र और राज्य सरकारें भी नौकरियों में कटौती कर रही हैं।

मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था में 24 फ़ीसदी की गिरावट देखने को मिली थी। इस गिरावट को देखते हुए केंद्र सरकार ने केंद्रीय डिपार्टमेंट और मंत्रालयों को आने वाले कुछ समय में कोई नई नौकरी न निकालने का इंस्ट्रक्शन भी दिया है। केंद्र सरकार के कर्मचारियों की नेशनल पेंशन स्कीम में मौजूदा वित्त वर्ष में हर महीने सिर्फ 5,250 नए कर्मचारी जुड़ रहे हैं। जबकि 2019-20 में हर महीने सिर्फ 9,900 नए कर्मचारियों जुड़ रहे थे। 2018-19 में यह आंकड़ा 9,200 था और 2017-18 में यह आंकड़ा ‌11,000 था। इससे साफ है वित्त वर्ष 2020-21 में नेशनल पेंशन स्कीम में न्यू सब्सक्राइबर्स एडिशन में भारी गिरावट देखने को मिली है।

मई से जुलाई तक का औसतन मासिक एडिशन सिर्फ 3500 था। 2020-21 में राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों ने हर महीने 26,144 नई नौकरियां दी। जबकि 2019-20 में राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों ने हर महीने औसतन 41,333 नई नौकरियां दी थी। 2018-19 में यह आंकड़ा 45,208 था। अगर इन 4 महीनों में व्हाइट कॉलर नौकरियों के जाने के आंकड़े को भी जोड़ लें तो स्थिति और गंभीर हो जाती है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनामी (CMIE) के मुताबिक मौजूदा वित्त वर्ष के मई से अगस्त तक लगभग 60 लाख इंजीनियर, फिजिशियन, टीचर, अकाउंटेंट और एनालिस्ट जैसे प्रोफेशनल्स अपनी नौकरी गंवा चुके हैं।

जितने हो रहे रिटायर, उससे भी कम नई भर्तियां: इंडियन पब्लिक सर्विस एम्पलाइज फेडरेशन के जनरल सेक्रेटरी प्रेमचंद ने कहा है अभी सरकारी भर्तियों में और गिरावट देखने को मिलेगी। सरकारी कर्मचारियों के रिटायर होने के अनुपात में नई नौकरियां नहीं मिल रही है। यह सीधे तौर पर सरकार का कॉस्ट कटिंग का प्रयास है। केंद्र और राज्य सरकार दोनों नौकरियां घटा रहे हैं या फिर कॉन्ट्रैक्ट नौकरियां निकाल रहे हैं। प्रेमचंद ने आगे कहा केंद्रीय सचिवालय स्तर पर इस समय कम वेतन पर कॉन्ट्रैक्ट नौकरियां दी जा रही हैं। इसके अलावा ज्वाइंट सेक्रेट्री और एडिशनल सेक्रेट्री के स्टाफ में भी प्राइवेट हायरिंग हो रही है।

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