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21वीं सदी के नियामक प्रतिस्पर्धा आयोग को समय के साथ आगे बढ़ना चाहिए : चावला

प्रतिस्पर्धा आयोग को बजाय इसके कि 19वीं सदी के तौर-तरीकों और उपायों के साथ 21वीं सदी का कानून लागू करने वाले नियामक के तौर पर देखा जाए, उसे समय के साथ आगे बढ़ना चाहिए..

Author नई दिल्ली | Published on: December 27, 2015 12:14 AM

प्रतिस्पर्धा आयोग को बजाय इसके कि 19वीं सदी के तौर-तरीकों और उपायों के साथ 21वीं सदी का कानून लागू करने वाले नियामक के तौर पर देखा जाए, उसे समय के साथ आगे बढ़ना चाहिए। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआइ) के अध्यक्ष अशोक चावला ने यह बात कही। उद्योग व्यवसाय में उचित व्यापार व्यवहार का नियमन करने वाले इस नियामक के लिए वर्ष 2015 उल्लेखनीय वर्ष रहा। नियामक ने वर्ष 2015 के दौरान नियमों का उल्लंघन करने वालों पर 1,500 करोड़ रुपए से अधिक का जुर्माना लगाया। इस कड़ी में ताजा जुर्माना हाल में प्रमुख विमानन कंपनियों पर कारोबार में साठगांठ के आरोप में 258 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया गया है।

एप आधारित टैक्सी परिचालक और ई-वाणिज्य कंपनियां भी इस साल सीसीआइ जांच के दायरे में आ गईं। वर्ष के दौरान सीसीआइ ने ओला और स्नैपडील के खिलाफ प्रतिस्पर्धा-रोधी तौर-तरीके अपनाने के आरोप में जांच का आदेश दिया। चावला ने कहा कि सीसीआइ ने अपनी प्रणाली और प्रसंस्करण व्यवस्था को सुव्यस्थित करने के लिए कड़ी मेहनत की है। उन्होंने कहा कि कोशिश यह है कि खासतौर से नियामक के समक्ष आने वाले विलय व अधिग्रहण मामलों में बेहतर काम किया जाए। चावला, लगभग पांच साल तक इस नियामकीय संस्था का संचालन करने के बाद अगले महीने सेवानिवृत्त हो रहे हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आयोग इस बात को समझता है कि पुनर्गठन और एकीकरण से आर्थिक क्षेत्र को लाभ हो सकता है।

चावला ने साक्षात्कार में कहा, ‘हमें समय के साथ आगे बढ़ने वाले नियामक के तौर पर दिखना चाहिए न कि 19वीं अथवा 20वीं सदी के उपायों के साथ 21वीं सदी के कानून को लागू करने वाली संस्था के तौर पर। यह सतर्क कोशिश है।’ यह टिप्पणी इस पृष्ठभूमि में आई है कि कुछ हल्कों में सीसीआइ को कारोबार सुगमता में आड़े आ रही बाधा के तौर पर देखा जा रहा है।

देश के आर्थिक ढांचे में शामिल सबसे नया नियामक सीसीआइ सख्त-नरम तरीकों का इस्तेमाल कर रहा है। नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर सख्त कार्रवाई की जा रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ढांचा कारोबार के अनुकूल रहे। चावला ने कहा कि प्रतिस्पर्धा कानून 2009 के कार्यान्वयन करने वाले आयोग ने हाल में प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करना शुरू किया है और इसमें सबसे ताजा कड़ी इलेक्ट्रानिक फाइलिंग प्लेटफार्म की है। चावला ने कहा कि नियामक ने इन नियमों उपयोक्ताओं के अधिक अनुकूल बनाने के लिए इनकी समीक्षा की है। उन्होंने कहा, ‘हम इसमें हल्के फुल्के बदलाव चाहते हैं क्योंकि हम आर्थिक क्षेत्र में होने एकीकरण और विशाल कारोबार से होने वाले फायदे का महत्व समझते हैं।’

सीसीआइ प्रमुख ने कहा, ‘साथ ही हमें इसके बारे में चौकन्ना रहना है कि उपक्रमों को बेवजह विशाल नहीं होना चाहिए कि बाजार में अन्य कंपनियों पर दबाव बने। बेहतर संतुलन के साथ हम मामलों की जांच करते रहेंगे।’ चावला ने कहा कि अतिरिक्त बदलाव को जल्दी ही अधिसूचित किया जाएगा क्योंकि ऐसी चिंता है कि कुछ नियमों से उद्योगों को समस्या हो सकती है। ये नियम नोटिसों के अमान्यीकरण से जुड़े हैं। विशेष तौर पर यह कि विदेशी कपनियों के मामलों में प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कौन करेगा।

उन्होंने कहा, ‘हमने 360 से ज्यादा विलय व अधिग्रहण सौदों का निपटान किया है जिनमें से ज्यादातर को मंजूरी मिली। तीन मामलों में हमने विस्तृत जांच की और दो मामलों में ढांचागत सुधार के उपाय किए गए।’ वर्ष के दौरान कुछ मामलों में सीसीआइ को झटके भी लगे हैं। प्रतिस्पर्धा अपीलीय न्यायाधिकरण ने इस महीने सीसीआइ द्वारा 11 सीमेंट विनिर्माताओं पर लगाए गए 6,316.59 करोड़ रुपए के जुर्माने को खारिज कर दिया। यह जुर्माना गुटबंदी और साठगांठ के आरोप में लगाया गया था। न्यायाधिकरण ने मामले में नियामक को तीन माह में नया आर्डर देने को कहा है।

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