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सीसीआई ने 600 प्रतिस्पर्धा-रोधी मामले निपटाए: सीकरी

सीकरी ने उद्योग के एक समारोह में कहा कि आयोग के पास दर्ज सूचनाओं में से ज्यादातर (80 प्रतिशत) जांच के मामले नहीं है। सिर्फ 20 प्रतिशत मामलों की जांच हो सकती है।

Author नई दिल्ली | September 9, 2016 7:11 PM

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने शुक्रवार (9 सितंबर) को कहा कि उसने 600 प्रतिस्पर्धा-रोधी मामले निपटाए जो अब तक दर्ज कुल मामलों का 80 प्रतिशत है। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) के अध्यक्ष देवेंद्र कुमार सीकरी ने उद्योग के एक समारोह में कहा कि आयोग के पास दर्ज सूचनाओं में से ज्यादातर (80 प्रतिशत) जांच के मामले नहीं है। सिर्फ 20 प्रतिशत मामलों की जांच हो सकती है। उन्होंने कहा, ‘हमने 750 मामलों पर सुनवाई की और उनमें से 600 निपटा चुके हैं जो कुल मामलों के 80 प्रतिशत के बराबर बैठता है।’ उन्होंने कहा कि सीसीआई अपने-आपको विश्वसनीय संगठन के तौर मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

सीकरी ने कहा, ‘हम कई तरीकों से इसकी कोशिश कर रहे हैं मसलन, आंतरिक क्षमता का निर्माण, ज्यादा से ज्यादा प्रभाव और प्रमाण आधारित रवैया।’ सीकरी ने कहा कि प्रतिस्पर्धा से आर्थिक क्षमता प्रोत्साहित होती है और उपभोक्ताओं को भी फायदा होता है लेकिन बेलगाम प्रतिस्पर्धा से कारोबार प्रभावित होते हैं। सीकरी ने कहा, ‘प्रतिस्पर्धा रोधी व्यवहार से बाजार में प्रतिस्पर्धा का ताना-बाना प्रभावित होता है।’

इस बीच प्रतिस्पर्धा अपीलीय ट्रिब्यूनल के सदस्य राजीव खेर ने कहा कि प्रौद्योगिकी के विकास के साथ सरकार के लिए प्रभाव स्थापित करना चुनौती बना हुआ है। उन्होंने कहा, ‘प्रौद्योगिकी का विकास बाजार को बिगाड़ रहा है और इंटरनेट सेवा प्रदान करने का महत्वपूर्ण मंच बनता जा रहा है और प्रभुत्व की स्थिति तय करना और चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।’ उन्होंने कहा कि भारतीय बौद्धिक संपदा अधिकार और प्रतिस्पर्धा कानूनों के बीच इतना तालमेल बिठाने की जरूरत है कि आईपीआर धारक अपने अनुसंधान का फायदा उठा सकें, उपभोक्ता का भी शोषण न हो। इससे प्रतिस्पर्धा कानून का दायित्व काफी बढ़ जाता है।

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