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तीन साल में देश में 68% बढ़े करोड़पति, CBDT ने जारी किया आंकड़ा

सीबीडीटी के चेयरमैन सुशील चंद्रा ने कहा कि यह आंकड़ा पिछले कुछ साल के दौरान कर विभाग द्वारा किए गए विधायी, सूचनाओं के प्रसार और प्रवर्तन/ अनुपालन के प्रयासों की वजह से हासिल हो पाया है।

Author October 22, 2018 9:12 PM
प्रतीकात्मक तस्वीर (फाइल फोटोः ड्रीम्सटाइम)

देश में एक करोड़ रुपये से अधिक की घोषित आय वाले व्यक्तिगत करदाताओं की संख्या 81,000 से भी अधिक हो गई है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार पिछले तीन साल में ‘करोड़पति क्लब’ वाले ऐसे करदाताओं की संख्या में 68 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। आयकर विभाग के नीति बनाने वाले निकाय सीबीडीटी ने आयकर और प्रत्यक्ष कर के महत्वपूर्ण सांख्यिकी आंकड़े जारी करते हुए कहा कि आकलन वर्ष 2014-15 में एक करोड़ रुपये से अधिक की आय दिखाने वाले व्यक्तिगत आयकरदाताओं की संख्या 48,416 थी। यह 2017-18 तक 68 प्रतिशत बढ़कर 81,344 पर पहुंच गई।

इसी तरह सीबीडीटी की इस रपट के अनुसार ,‘एक करोड़ रुपये से अधिक की सालाना आय वाले कुल करोड़पति करदाताओं (कंपनियों, फर्में, हिंदू अविभाजित परिवार और व्यक्तिगत करदाता) की संख्या में भी तेजी से वृद्धि हुई है।’’ इस दौरान उनकी संख्या में 60 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। कुल करदाताओं की संख्या (कॉरपोरेट, फर्में, हिंदू अविभाजित परिवार और अन्य) की संख्या में तीन साल में उल्लेखनीय इजाफा हुआ है।

सीबीडीटी ने कहा कि आकलन वर्ष 2014-15 में एक करोड़ रुपये से अधिक की आय का खुलासा करने वाले करदाताओं की संख्या 88,649 थी। वहीं 2017-18 में यह बढ़कर 1,40,139 हो गई। यह 60 प्रतिशत की वृद्धि है।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया कि ताजा आंकड़ों में तीन साल की अवधि को शामिल किया गया है। आकलन वर्ष 2014-15 को आधार वर्ष माना गया है। सीबीडीटी के चेयरमैन सुशील चंद्रा ने कहा कि यह आंकड़ा पिछले कुछ साल के दौरान कर विभाग द्वारा किए गए विधायी, सूचनाओं के प्रसार और प्रवर्तन/ अनुपालन के प्रयासों की वजह से हासिल हो पाया है।

उन्होंने कहा कि इस दौरान विभाग ने प्रौद्योगिकी आधारित कर चोरी रोकने के कई कदम उठाए हैं। चंद्रा ने कहा कि हम देश में कर आधार और बढ़ाने को प्रतिबद्ध हैं। आंकड़ों के अनुसार पिछले चार वित्त वर्षों में आयकर रिटर्न दाखिल करने वालों का आंकड़ा भी 80 प्रतिशत बढ़ा है। 2013-14 में यह 3.79 करोड़ था, जो 2017-18 में 6.85 करोड़ हो गया।

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