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Volvo की कारों में इस्तेमाल होगी LiDAR तकनीक! कार चलाने के लिए नहीं होगी ड्राइवर की जरूरत, जानें डिटेल

Volvo ने घोषणा की है कि तकनीकी फर्म लुमिनार के साथ साझेदारी कर रही है। इस साझेदारी के तहत कंपनी अपने नेक्स्ट जेनरेशन कारों में LiDAR (लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग) टेक्नोलॉजी का प्रयोग करेगी।

Volvo Driver less cars, Volvo Lidar technology, Volvo autonomous cars, Volvo upcoming driverless cars, what is lidar technology, how lidar technology worksVolvo अपनी इस LiDAR तकनीक का प्रयोग नेक्स्ट जेनरेशन वाली कारों में करेगी।

Volvo LiDAR Technology Driver Less Car: ऑटोमोबाइल की दुनिया में Volvo जाना माना नाम है। स्वीडन की यह प्रमुख वाहन निर्माता कंपनी अपने खास तकनीक और फीचर्स से लैस वाहनों को लांच करने के लिए दुनिया भर में मशहूर है। अब कंपनी अपनी आने वाली नेक्स्ट जेनरेशन कारों में खास लाइट डिटेक्शन एंड रैंगिंग (LiDAR) तकनीक का प्रयोग करेगी। इस तकनीक की मदद से वाहन को चलाने के लिए ड्राइवर की जरूरत नहीं होगी।

Volvo ने घोषणा की है कि तकनीकी फर्म लुमिनार के साथ साझेदारी कर रही है। इस साझेदारी के तहत कंपनी अपने नेक्स्ट जेनरेशन कारों में LiDAR (लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग) टेक्नोलॉजी का प्रयोग करेगी। प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि यह नई तकनीक कंपनी की पहली सेल्फ ड्राइविंग टेक्नोलॉजी से लैस कारों को बाजार में उतारने में काफी मददगार साबित होगी। इस तकनीक का प्रयोग हाईवे पर प्रयोग में आने वाले वाहनों में पहले किया जाएगा।

बता दें कि मौजूदा समय में कंपनी अपने सेल्फ ड्राइविंग कारों में RADAR (रेडियो डिटेक्शन और रेंजिंग) आधारित तकनीक का उपयोग कर रही है। रडार और लिडार के बीच मुख्य अंतर यह है कि आस पास की वस्तुओं या ऑब्जेक्ट का आंकलन करने के लिए रेडियो तरंगों के बजाय लेजर लाइट ( जो कि प्रति सेकंड लाखों पल्सेस में फैलती हैं) का उपयोग करता है। यह तकनीक कार के आस पास के माहौल को 3D के माध्यम से आंकलन करता है।

रेडियो डिटेक्शन टेक्नोलॉजी के मुकाबले LiDAR का आंकलन काफी सही पाया जाता है। इतना ही नहीं इसके लिए इंटरनेट कनेक्टिविटी की भी जरूरत नहीं होगी जो कि इस तकनीक को और भी उपयोगी बनाता है। यह टेक्नोलॉजी कार के आस पास के माहौल का तत्काल 3D मैप तैयार करता है जो कि कार के सिस्टम को जरूरी निर्देश प्रदान करता है।

Volvo का कहना है कि कंपनी की नेक्स्ट जेनरेशन SPA मॉडल में इस तकनीक का प्रयोग किया जाएगा, जो कि 2022 तक तैयार हो जाएगा। फिलहाल कंपनी इस तकनीक पर तेजी से काम कर रही है और बाजार में ड्राइवरलेस कारों को उतारने की योजना पर काम कर रही है। जहां तक भारतीय बाजार में ड्राइवरलेस कारों का भविष्य है तो यह न के बराबर है।

भारत में इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी है और यहां पर सड़क हादसों की संख्या भी काफी ज्यादा है। सामान्य तौर पर भारत में एक डाटा के अनुसार हर रोज तकरीबन 400 लोगों की मौत सड़क दुर्घटना के कारण होती है। आप भारत के ड्राइविंग स्कील का अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि बीते दिनों लॉकडाउन के दौरान (23 मार्च और 4 मई के बीच) देश में 600 से ज्यादा सड़क हादसे हुए हैं जिनमें 140 लोगों की मौत हुई है। इसके अलावा सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी पहले ही कह चुके हैं कि भारत में ड्राइवरलेस कारों का कोई भविष्य नहीं है।

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