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बीमा के चक्कर में नहीं फंसेगा आपकी गाड़ी का वीआइपी नंबर

चोरी हुई गाड़ी के नंबर के लिए वाहन मालिक को अब परिवहन विभाग के चक्कर नहीं लगाने होंगे। इस नंबर के आबंटन की प्रक्रिया को दिल्ली सरकार ने आसान कर दिया है। नई प्रक्रिया से बीमा की वजह से गाड़ी के नंबर आबंटन प्रक्रिया नहीं रुकेगी। इसके लिए दिल्ली सरकार ने नए दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं।

Author नई दिल्ली | November 12, 2018 4:29 AM
प्रतीकात्मक फोटो

जनसत्ता संवाददाता
चोरी हुई गाड़ी के नंबर के लिए वाहन मालिक को अब परिवहन विभाग के चक्कर नहीं लगाने होंगे। इस नंबर के आबंटन की प्रक्रिया को दिल्ली सरकार ने आसान कर दिया है। नई प्रक्रिया से बीमा की वजह से गाड़ी के नंबर आबंटन प्रक्रिया नहीं रुकेगी। इसके लिए दिल्ली सरकार ने नए दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं। इन्हें तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है। नई व्यवस्था का लाभ होगा कि वाहन चालक चोरी हो चुकी गाड़ी का नंबर अब अपने पास रख सकेंगे। परिवहन विभाग के सूत्रों ने बताया कि अभी तक चोरी की गाड़ियों के मामले में सबसे अधिक परेशानी गाड़ी का नंबर आबंटन को लेकर आती थी। परिवहन विभाग के मुताबिक पुरानी प्रक्रिया में जब तक किसी भी गाड़ी का इंशोरेंस संबंधित विवाद नहीं सुलझता था। उस गाड़ी के मालिक को उसकी गाड़ी का नंबर आबंटित नहीं किया जा सकता था। अधिकारियों ने बताया कि अब तक तकनीकी प्रावधान समाप्त हो गया है।

इसके तहत इंशोरेंस प्रक्रिया से अलग हटकर गाड़ी के मालिक को यह नंबर जारी किया जा सकेगा। चोरी संबंधित मामले की जांच प्रक्रिया अपने स्तर पर चलेगी। आवेदन प्रक्रिया के बाद 180 दिन के अंदर यह नंबर आबंटित किया जा सकेगा। इस प्रक्रिया का लाभ सबसे अधिक उन गाड़ियों के मालिक को होगा जिनकी गाड़ियों पर वीआइपी जैसे दिखने वाले नंबर हैं। जैसे 0001, 0002, 0099, 0007 आदि। इन नंबरों का आबंटन नीलामी प्रक्रिया से होता है। इन नंबरों की बोली लाखों रुपए में लगती है। परिवहन संबंधित मामलों के विशेषज्ञ अनिल चिकारा बताते हैं कि मालिक इन नंबर की चाह में अपनी नई गाड़ी लाने की प्रक्रिया शुरू नहीं कर पाते थे। अब इस प्रक्रिया के लागू होने के बाद वाहन मालिक पुराना नंबर मिल सकेगा। अब वाहन मालिक अब प्राथमिकी दर्ज कराने के बाद चोरी हुए अपने वाहन की पंजीकरण संख्या अपने पास रखने के लिए वाहन का पता नहीं लगने की पुलिस की रिपोर्ट के साथ आवेदन किया जा सकेगा। नई नीति के तहत चोरी हुआ वाहन प्राथमिकी दर्ज होने के दिन बीमा के आधीन होना चाहिए।

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