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वाहन मालिक की हो जाए मौत तो कैसे ट्रांसफर होगा गाड़ी का रजिस्ट्रेशन (RC) पेपर! जानें ये जरूरी बातें

किसी की मृत्यु के बाद जोनल ऑफिसर या एसडीएम के कार्यालय में मृत्यु के 30 दिनों के भीतर ही घटना की सूचना दे देना अनिवार्य है। यदि ऐसा नहीं होता है तो आवेदक पर पेनाल्टी का प्रावधान है।

Author Published on: December 5, 2019 9:22 AM
प्रतिकात्मक तस्वीर: वाहन के रजिस्ट्रेशन पेपर के हस्तानांतरण के समय कई बातों पर ध्यान देना जरूरी है।

किसी अपने को खो देना किसी गहरे जख्म से कम नहीं होता है लेकिन बावजूद इसके दुनिया का दस्तूर है चलते जाना। ऐसा आम तौर पर ज्यादातर लोगों के साथ होता है कि उनके घर में किसी ऐसे की मृत्यु हो जाती है जिनके नाम पर वाहन के कागजात होते हैं। ऐसी स्थिति में आखिर किस तरह से आप गाड़ी के रजिस्ट्रेशन पेपर को ट्रांसफर करवा सकते हैं? आज हम आपको अपने इस लेख में इसी बारे में बताएंगे।

किसी की मृत्यु के बाद जोनल ऑफिसर या एसडीएम के कार्यालय में मृत्यु के 30 दिनों के भीतर ही घटना की सूचना दे देना अनिवार्य है। यदि ऐसा नहीं होता है तो 100 रुपये प्रतिमाह की दर से आवेदक को पेनाल्टी का भुगतान करना होगा। यदि मृतक के वाहन को आप बेचते हैं तो ऐसी​ स्थिति में आपके पास कुछ दस्तावेजों का होना जरूरी है, जो कि निम्नवत हैं।

उत्तराधिकार प्रमाण पत्र: सबसे पहले, वाहन पर मालिकाना हक का दावा करने वाले वारिस को यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि मृत व्यक्ति की इच्छा के अनुसार कार का सही मालिक वही है। वाहन बेचने के लिए, किसी को प्राधिकरण के पत्र की आवश्यकता होगी जो क्षेत्रीय अदालत या SDM द्वारा आवंटित किया जाता है।

लोन क्लीयरेंस सर्टिफिकेट: अधिकार पत्र मिलने के बाद आपको वाहन पर किसी भी तरह के कर्ज के बकाए को पूरा जमा करना होगा। बैंक से इस विषय में बात कर कर्ज का निपटारा करने के बाद आपको RTO फॉर्म 30 और फॉर्म 31 को क्षेत्रीय ट्रांसपोर्ट कार्यालय में जमा करना होगा। इसके अलावा आप बैंक से आप अनापत्ति प्रमाण पत्र, जिसे आम भाषा में NOC कहा जाता है इसे भी प्राप्त कर वाहन को कर्ज मुक्त साबित कर सकते हैं।

मृत्यु प्रमाण पत्र: ये एक बेहद ही जरूरी दस्तावेज है। वाहन पर उत्तराधिकारी को अपने हक का दावा करने के लिए वाहन के पूर्व मालिक के मृत्यु का प्रमाण पत्र दाखिल करना होता है। इसलिए वैध मृत्यु प्रमाण पत्र होना आवश्यक है। ये सिर्फ वाहन बेचने के लिए ही जरूरी नहीं है बल्कि इसका प्रयोग अन्य कई मामलों में भी प्रयोग किया जाता है।

वाहन रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट RC: वाहन का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट को RC ट्रांसफर के लिए जमा करना होता है। इसकी ओरिजनल कॉपी ही मान्य किया जाता है। इसके अलावा इसमें वाहन के पूर्व मालिक के नाम को लेकर कोई संदेह नहीं होना चाहिएं, जैसे स्पेलिंग मिस्टेक इत्यादि।

व्हीकल इंश्योरेंस की कॉपी: इसके अलावा रिसीवर के नाम पर वाहन स्वामित्व हस्तांतरण के लिए एक मान्य इंश्योरेंस सर्टिफिकेट की सत्यापित प्रति क्षेत्रीय RTO कार्यालय में प्रस्तुत करना अनिवार्य है।

प्रदूषण सर्टिफिकेट: मान्य PUC प्रमाणपत्र की सत्यापित प्रति भी वाहन के रजिस्ट्रेशन के हस्तांतरण के लिए अनिवार्य है। चूंकि पीयूसी प्रमाणपत्र एक महीने तक के लिए ही वैध होती है, इसलिए पीयूसी की तारीख आवेदन करते समय वैध होनी जरूरी है।

वाहन का वेरिफिकेशन: इसके लिए आपको RTO फॉर्म 20 भर कर क्षेत्रीय ट्रांसपोर्ट कार्यालय में जमा करना होगा। ये वाहन को वेरिफाई करने के लिए किया जाता है। यानी कि आवदेन सही वाहन के लिए किया जा रहा है।

एड्रेस प्रूफ और पैन कार्ड: आवेदक को अपना एक एड्रेस प्रूफ जिस पर उसका खुद का हस्ताक्षर हो, उसे क्षेत्रीय RTO कार्यालय में जमा करना हेाता है। इसके अलावा आवेदक और वाहन खरीदने वाले को अपने पैन कार्ड की कापी भी जमा करनी होती है। यदि पैन उपलब्ध नहीं है तो इस दशा में RTO फॉर्म 60 और फॉर्म 61 का प्रयोग किया जा सकता है।

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