SC New mandate on car and bike insurance: know here How will it benefit customers in terms of price - Jansatta
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कार-टू वीलर के इंश्योरेंस के नियमों में हुआ यह बड़ा बदलाव, आपके लिए यूं है बेहद फायदेमंद

अभी लॉन्ग टर्म पॉलिसी केवल टू व्हीलर्स के लिए ही उपलब्ध हैं। यह भी मैक्सिमम 3 साल के लिए ही उपलब्ध हैं। 4 व्हीलर्स के लिए 1 साल से ज्यादा की कोई पॉलिसी नहीं है।

यह अध्यादेश, जो 1 सितंबर से लागू होगा, क्लेम के मामले में भी लॉन्ग टर्म पॉलिसी में रिन्यू कराने पर नो क्लेम बॉनस (एनसीबी) मिल सकता है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक, हर नई कार का तीन साल का थर्ड पार्टी बीमा कवर होना चाहिए और हर नए दोपहिया वाहन का पांच साल की थर्ड पार्टी लायबिलिटी बीमा होना चाहिए। अभी तक नई कार और दोपहिया वाहनों का थर्ड पार्टी इंश्योंस नहीं कराया जाता था। जिसके कारण बिना थर्ड पार्टी इंशयोरेंश वाले वाहनों से दुर्घटना होने पर कई बार आम आदमी को उचित मुआवजा नहीं मिल पाता। पॉलिसी बाजार डॉट कॉम के जनरल इंश्योरेंस के चीफ बिजनेस ऑफिसर तरुण माथुर ने बताया कि बीमा के बिना चलने वाले वाहनों की संख्या को कम करने के लिए कदम उठाया गया है और यह सुनिश्चित करने के लिए कि दुर्घटना पीड़ितों को वह मुआवजा मिलता है जो वे लायक हैं।

अभी लॉन्ग टर्म पॉलिसी केवल टू व्हीलर्स के लिए ही उपलब्ध हैं। यह भी मैक्सिमम 3 साल के लिए ही उपलब्ध हैं। इसलिए, प्रत्येक बीमा कंपनी को भारत के बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण से अनुमोदन प्राप्त करने के बाद अभी की जरूरतों के मुताबिक पॉलिसी निकालनी होंगी। अब ग्राहकों को हर साल थर्ड पार्टी इंश्योरेंश की पॉलिसी रिन्यू कराने की टेंशन नहीं लेनी है। ग्राहकों को थर्ड पार्टी इंश्योरेंश का प्रीमियम चालू वर्ष के आधार पर ही देना होगा।

यह अध्यादेश, जो 1 सितंबर से लागू होगा, क्लेम के मामले में भी लॉन्ग टर्म पॉलिसी में रिन्यू कराने पर नो क्लेम बॉनस (एनसीबी) मिल सकता है। कुल मिलाकर, रिन्यू पर व्यक्तिगत सालाना मूल्य की तुलना में लंबी अवधि की पॉलिसी की कीमत का कम होगी। इसके अलावा, अभी चार-पहिया के लिए एकमात्र विकल्प एक साल की पॉलिसी का है। नियामक द्वारा कार के कई साल के थर्ड पार्टी इंश्योरेंश में प्रशासनिक खर्चों में बचत की जानी चाहिए और इसका लाभ ग्राहक को कम कीमत के रूप में दिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट का निर्णय ग्राहकों को लाभान्वित करना है, लेकिन यह त्वरित परिवर्तन उद्योग से पहले नियामक से मूल्य निर्धारण और अनुमोदन के मामले में कठिनाई लाता है।

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