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अब तोड़ा ट्रैफिक नियम तो हो जाएंगे कंगाल! कहीं सरकार के नए रूल्स भ्रष्ट्राचार और रिश्वतखोरी न बढ़ा दे?

इस विधेयक को पहली बार अप्रैल 2017 में लोकसभा में पेश किया गया था, लेकिन राज्यसभा द्वारा बहस के बाद भी इसे पारित नहीं किया गया था। लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में मोटर वाहन (संशोधन) विधेयक के मसौदे को मंजूरी दे दी गई है।

Author Updated: June 26, 2019 12:35 PM
प्रतिकात्मक तस्वीर: वाहन चालक की चेकिंग करना ट्रैफिक पुलिसकर्मी।

New Traffic Rules: भारत सरकार के मंत्रियों के मंत्रिमंडल ने मोटर वाहन संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी है। ये नया विधेयक यातायात व्यवस्था को बेहतर और व्यवस्थित बनाने के साथ साथ ट्रैफिक नियमों के लिए लगाए जाने वाले शुल्क में भी भारी बढ़ोत्तरी करता है। ये विधेयक अब उच्च सदन (राज्य सभा) में जाएगा। एक बार ऊपरी सदन ने इसे मंजूरी दे दी गई तो यह विधेयक कानून बन जाएगा और प्रभावी हो जाएगा। इसके प्रभावी होते ही ट्रैफिक नियमों का उलंघन करने वालों की जेब पर बोझ भी बढ़ जाएगा।

इस विधेयक को पहली बार अप्रैल 2017 में लोकसभा में पेश किया गया था, लेकिन राज्यसभा द्वारा बहस के बाद भी इसे पारित नहीं किया गया था। बताया जा रहा है कि, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में मोटर वाहन (संशोधन) विधेयक के मसौदे को मंजूरी दे दी गई है। इसमें विभिन्न ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन करने पर तगड़े जुर्माने का प्रावधान किया गया है। अब ट्रैफिक नियमों को तोड़ने का फाइन 10 गुना तक बढ़ गया है। तो आइये जानते हैं कि किन नियमों के उलंघन पर कितना देना होगा फाइन —

1. बिना लाइसेंस के वाहन चलाते हुए पकड़े जाने पा 5,000 रुपये का फाइन, जो कि पहले 500 रुपये था।
2. वाहन चलाते हुए मोबाइल फोन पर बात करते हुए पकड़े जाने पर 5,000 रुपये का फाइन, जो कि पहले 1,000 रुपये था।
3. शराब पीकर वाहन चलाने पर 10,000 रुपये का जुर्माना, जो कि पहले 2,000 रुपये था।
4. खराब या खतरनाक तरीके से वाहन चलाने पर 5,000 रुपये का फाइन, जो कि पहले 1,000 रुपये था।
5. नाबालिक द्वारा वाहन चलाने पर वाहन मालिक को हो सकती है जेल।
6. ओवर स्‍पीडिंग या तेज रफ्तार में वाहन चलाने पर 1,000 से 2,000 रुपये तक फाइन, जो कि पहले 400 रुपये था।
7. वाहन चलाते समय सीट बेल्ट का प्रयोग न करने पर 1,000 रुपये का फाइन, जो कि पहले 100 रुपये था।
8. हिट एंड रन केस में सरकार द्वारा पीड़ित पक्ष को 2 लाख रुपये की सहायता, जो कि अब तक महज 25,000 रुपये थी।
9. ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन पंजीकरण के लिए आधार को अनिवार्य किया जाए।
10. दुर्घटना ग्रस्त व्यक्ति या पीड़ित को बचाने वाले को संरक्षण दिया जाएगा, जांच के बाद ही पुलिस उस पर कार्यवाही कर सकेगी।

बहरहाल, ये सभी नए नियम सड़क पर न केवल यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए किए गए हैं बल्कि हादसों के आंकड़ों को भी कम करने के लिए ये नियम काफी कारगर साबित होंगे। सरकार ने नए विधेयक में जुर्माने की राशि को इस कदर 10 गुना कर दिया है कि कोई ट्रैफिक नियम तोड़ने की शायद ही कोशिश करे।

कहीं बढ़ न जाए भ्रष्ट्राचार और रिश्वतखोरी: जहां एक तरह ये नए ट्रैफिक नियम और उनके उलंघन पर ​सरकार द्वारा लगाया जाने वाला जुर्माना लोगों को सचेत करेगा वहीं इससे भ्रष्ट्राचार के बढ़ने की संभावना भी बढ़ सकती है। जानकारों का मानना है कि जुर्माने की राशि 10 गुना से ज्यादा है। सामान्य तौर पर लोग आए दिन ऐसी गलतियां कर देते हैं कि वो ड्राइविंग लाइसेंस घर भूल जाते हैं या फिर जल्दबाजी में मोबाइल फोन का प्रयोग वाहन चलाते वक्त करते हैं। ऐसी स्थिति में उन्हें 5,000 रुपये तक की राशि जुर्माने के तौर पर देना होगा।

अब इतनी बड़ी रकम के लिए या तो उक्त व्यक्ति चालान कटवाए या फिर वो बीच का रास्ता ढूढ़ेगा जो कि सीधे तौर पर भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी करे जन्म देगा। सामन्य तौर पर एक मध्यम वर्गीय परिवार के लिए 5,000 रुपये की रकम महीने भर के राशन से कम नहीं है। तो कहीं न कहीं इतने बड़े जुर्माने की राशि को सही ढंग से वसूलने के लिए ट्रैफिक पुलिस पर भी नैतिक जिम्मेदारी का बोझ जैसा ही होगा। इसके लिए प्रशासन को अपने पुलिसिंग को भी दुरहुस्त करना होगा। देश की पुलिसिंग में भ्रष्ट्राचार और रिश्वतखोरी किस कदर पैबस्त है ये किसी से छिपा नहीं है।

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