know what is more profitable having your own car or taking it on lease from employer-जानिए कंपनी से मिली हुई कार पर टैक्स छूट कैसे पा सकते हैं? - Jansatta
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जानिए टैक्स छूट के लिहाज से अपनी कार रखना फायदेमंद है या कंपनी से लेना?

सिर्फ और सिर्फ दफ्तर के कामकाज के लिए इस्तेमाल किए जाने वाली कार का मूल्य पर टैक्स नहीं लगता चाहे वो कार कर्मचारी की अपनी हो या कंपनी की।

प्रतीकात्मक तस्वीर

अर्चित गुप्ता

बहुराष्ट्रीय कंपनियों और निजी कंपनियों में दफ्तर के कामकाज के लिए कर्मचारियों को कार देना आम बात है। कंपनियां वेतनमान या वेतन ग्रेड के अलावा भी कार की सुविधा दे सकती हैं। ये कारें कंपनियों से लीज पर ली जाती हैं और कर्मचारी इनका इस्तेमाल दफ्तर के अलावा निजी कामकाज के लिए भी करते हैं। आम तौर पर लोगों को अपनी कार और कंपनी से लीज पर ली गयी कार के बीच टैक्स भुगतान के अंतर को लेकर परेशान रहते हैं। अगर कर्मचारी खुद की कार रखने के बजाय कंपनी से लीज पर कार लेते हैं तो उनका टैक्स योग्य वेतन कम हो जाता है।

(क) कंपनी की कार- सिर्फ और सिर्फ दफ्तर के कामकाज के लिए इस्तेमाल किए जाने वाली कार का मूल्य पर टैक्स नहीं लगता चाहे वो कार कर्मचारी की अपनी हो या कंपनी की। इस छूट को पाने के लिए नियोक्ता कंपनी को इसके इस्तेमाल का पूरा ब्योरा रखना होता है। नियोक्ता कंपनी को दफ्तर के कामकाज के लिए की गयी यात्रा की तारीख, मंजिल, माइलेज, रसीद और यात्रा में हुए खर्च का विवरण दर्ज करके रखना होता है। नियोक्ता कंपनी को इस बात का भी प्रमाणपत्र देना होता है कि कार का इस्तेमाल केवल और केवल दफ्तर के कामकाज के लिए हुआ है।

 

इनकम टैक्स के नियम 3(2)(A) और टेबल II के अनुसार कार का मूल्य-

car tax

अगर कार का इस्तेमाल केवल निजी कामकाज के लिए किया गया है तो कार के रखरखाव और प्रयोग पर किए गए कुल खर्च या नियोक्ता द्वारा इस मद में दी गयी राशि (रीइंबर्समेंट) पर टैक्स देना पड़ेगा और कर्मचारी को इस पर छूट नहीं मिल सकती। इस मद में मिली हुई राशि को वेतन में जोड़ा जाएगा और उसका संयुक्त वेतन जिस टैक्स स्लैब (आयकर सीमा) में आएगा उसके अनुसार टैक्स देना होगा।

(ख) निजी कार- अगर कार का मालिक कर्मचारी खुद है और वो उसका इस्तेमाल निजी और दफ्तर दोनों कामकाज के लिए करता है तो उस कार का मूल्य ऊपर दिए गए चार्ट के बिंदु 1(i) के अनुसार होगा। अगर नियोक्ता कंपनी ऐसी कार का खर्च सीधे वहन करती है तो कर्मचारी को ऊपर दिए गए चार्ट के बिंदु 1(ii) के अनुसार अतिरिक्त छूट मिल सकती है।

कर्मचारियों के लिए कौन सा विकल्प बेहतर है?

पहली स्थिति: जब कार की मालिक नियोक्ता कंपनी हो-

किसी ए लिमिटेड से लीज पर लेकर कर्मचारी को दी गयी है। तेल और ड्राइवर का खर्च कंपनी कर्मचारी को बाद में लौटा (रीइंबर्स) देती है।

-कार ए लिमिटेड की है या उसने लीज पर ली है।

– ए लिमिटेड ने कार को मैनेजर ग्रेड या उससे ऊपर के कर्मचारियों को कार दी।

– कार का इस्तेमाल निजी और दफ्तर दोनों के कामकाज के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

– कार के तेल का भुगतान नियोक्ता कंपनी करती है। कार के लिए ड्राइवर भी ए लिमिटेड ने दिया है।

– ऊपर दिए गए चार्ट के अनुसार जब नियोक्ता कंपनी ड्राइवर नहीं देती है तो वाहन का मूल्य 1800 प्रति माह + 900 प्रति माह (जब सीसी इंजन 1.6 लीटर से अधिक न हो) या 2400 प्रति माह + 900 प्रति माह (जब सीजी इंजन 1.6 लीटर से अधिक हो।

– नियोक्ता कंपनी कर्मचारी को एक लाख रुपये प्रति वर्ष देती या लौटाती है। ऐसे में ऊपर की स्थिति में केवल 32400 रुपये या 39,600 रुपये पर वेतन की तरह टैक्स लगेगा। बाकी राशि पर कर्मचारी को टैक्स नहीं देना होगा।

दूसरी स्थिति: जब कर्मचारी कार का मालिक हो-

-ऐसी कर्मचारी जो कंपनी से कार लेने के हकदार हैं लेकिन उनकी पास अपनी कार है और वो निजी और दफ्तर दोनों कामकाज के लिए उसका इस्तेमाल करते हैं और कंपनी से कार के मद में नकद लेते हैं।

-कर्मचारी कंपनी की नीति के अनुसार तेल और ड्राइवर का खर्च पाने का हकदार है। कार के मद में पैसे लौटाने (रीइंबर्स) की सीमा निम्न प्रकार है-

car tax

-कर्मचारी निजी और दफ्तर दोनों के कामकाज के लिए इस्तेमाल करता है।

-कार नीति के अनुसार कार के मद में रीइंबर्स किए जानी वाली राशि कंपनी द्वारा निर्धारित सीमा के बजाय वास्तविक खर्च के अनुसार होगी। यानी यदि आपकी कार का तेल और ड्राइवर का खर्च कंपनी द्वारा तय की गयी सीमा से कम है तो आपकी नियोक्ता कंपनी केवल आपके द्वारा खर्च की गयी राशि ही रीइंबर्स करेगी। वास्तविक खर्च का आपको रसीद इत्यादि देना होगा। अगर आप द्वारा कार मद में खर्च की गयी राशि कंपनी की तय सीमा से अधिक है तो आपको केवल कंपनी द्वारा तय की गयी राशि रीइंबर्स होगी।

-टैक्स योग्य सैलरी में केवल वही राशि जुड़ेगी जो नियोक्ता कंपनी ऊपर दिए गए चार्ट के बिंदु 1(i) की राशि को निकालने के बाद वहन की गयी होगी। यानी जब वास्तविक खर्च कंपनी द्वारा तय की गयी सीमा के बराबर या अधिक हो तो कार नीति के तहत दी गयी राशि को नियोक्ता कंपनी को रीइंबर्स करना होगा। ऐसी स्थिति में अनुलाभ की गणना निम्न प्रकार की जाएगी-

car tax

-कर्मचारी को कार की जगह मिलने वाला नकद टैक्स योग्य वेतन में शामिल होगा जो कि इस प्रकार है- रुपये 42,700+Rs.19,300/ रुपये 42,700+Rs.18,700 जैसा कि ग्रेड मैनेजर के लिए दिए उदाहरण में दिखाया गया है।

अगर नियोक्ता कंपनी ने एक से ज्यादा कार दी है?- 

अगर नियोक्ता कंपनी ने आपको एक से ज्यादा कार दी है और एक या उससे ज्यादा कार आपके परिवार का कोई सदस्य इस्तेमाल करता है तो एक कार का मूल्य ऊपर दिए गए चार्ट के अनुसार लगाया जाएगा और बाकी कारों को निजी कार की तरह लिया जाएगा। ऐसी कारों पर कोई भी टैक्स छूट नहीं मिलेगी।

कुल लब्बोलबाब ये है कि जब नियोक्ता कंपनी कार देती है तो आपको एक सीमा तक ही टैक्स देना होता है। इसलिए हम आपको राय देंगे कि आप कार के मद में पैसे इंबर्स कराने की जगह कंपनी से लीज पर कार लें और टैक्स बचाएं।

(लेखक ClearTax.in के सीईओ और संस्थापक हैं।)

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