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पेट्रोल पर सरकार का नया प्लान, अब चावल-मक्का से तैयार एथनॉल का भी होगा इस्तेमाल

भारत ने 2025 तक पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथनॉल मिलाने का लक्ष्य रखा है। धर्मेंद्र प्रधान ने उच्च सदन में प्रश्नकाल के दौरान विभिन्न पूरक सवालों के जवाब में यह जानकारी दी।

Ethanol To Petrol, rice, maizeधर्मेन्द्र प्रधान ने दी जानकारी (Photo-indian express )

पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी के बीच अब सरकार एथनॉल के मिलावट पर जोर दे रही है। इसके लिए गन्ने के अलावा मक्का और चावल से निकले एथनॉल का भी इस्तेमाल किया जाएगा।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बुधवार को राज्यसभा में कहा कि भारत ने 2025 तक पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथनॉल मिलाने का लक्ष्य रखा है। धर्मेंद्र प्रधान ने उच्च सदन में प्रश्नकाल के दौरान विभिन्न पूरक सवालों के जवाब में यह जानकारी दी। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि पेट्रोल में एथनॉल मिलाने का कार्यक्रम अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में शुरू किया गया था। लेकिन उसके बाद संप्रग सरकार के कार्यकाल में इस नीति पर खास ध्यान नहीं दिया गया।

उन्होंने कहा कि 2014 में यह सरकार सत्ता में आयी तो उस समय पेट्रोल में एथनॉल मिलाने का प्रतिशत सिर्फ 0.67 प्रतिशत था जिसका मूल्य 500 करोड़ रुपये से भी कम था। प्रधान ने कहा कि 2020-21 में यह प्रतिशत बढ़कर 8.5 हो गया जिसका मूल्य 18,000 करोड़ रुपये है।

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि सरकार का लक्ष्य 2025 तक इसे बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने का है। उन्होंने कहा कि अब तक सिर्फ गन्ना से तैयार होने वाले एथनॉल पर ही जोर था लेकिन अब इसमें चावल और मक्का को भी शामिल किया जा रहा है क्योंकि ये दोनों अनाज उपभोग से अधिक मात्रा में उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि इस नीति से किसानों की आमदनी बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।

पिछले साल सरकार ने 2022 तक पेट्रोल में 10 प्रतिशत एथनॉल मिश्रण (90 प्रतिशत पेट्रोल के साथ 10 प्रतिशत एथनॉल का मिश्रण) और 2030 तक 20 प्रतिशत का लक्ष्य रखा था। लेकिन अब इस लक्ष्य में बदलाव हुआ है।

आपको बता दें कि भारत अपनी तेल जरूरतों को पूरा करने के लिये 83 प्रतिशत आयात पर निर्भर है। पेट्रोल में एथनॉल के मिश्रण से आयात में कमी की जा सकेगी। साथ ही एथनॉल कम प्रदूषण फैलाना वाला ईंधन है। अत: इससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी।

सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक 2025 तक 20 प्रतिशत एथनॉल मिलाने के लिये , 1,000 करोड़ लीटर की जरूरत होगी। मौजूदा भाव पर यह 60,000 से 65,000 करोड़ रुपये का है। पेट्रोल में एथनॉल का मिश्रण बढ़ाने से चीनी मिलों को आय का अतिरिक्त स्रोत प्राप्त होगा और उन्हें किसानों के बकाये के भुगतान में मदद मिलेगी।

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