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Honda Activa नए BS-6 इंजन के साथ होगी पेश! जानिए क्या है भारत स्टैंडर्ड-6 और आम जीवन से लेकर आपकी जेब तक कैसा होगा इसका असर?

BS-6: इसे भारत स्टेज इमिशन स्टैंडर्ड भी कहा जाता है। ये भारत सरकार द्वारा स्थापित किया गया एक उत्सर्जन मानक हैं जो मोटर वाहनों सहित आंतरिक दहन इंजन और स्पार्क-इग्निशन इंजन से उत्पन्न होने वाले प्रदूषण को विनियमित करने के लिए बनाया गया है।

Author नई दिल्ली | June 5, 2019 11:00 AM
नई Honda Activa को हाल ही में टेस्टिंग के दौरान स्पॉट किया गया है।

जापानी दोपहिया वाहन निर्माता कंपनी होंडा भारतीय बाजार में अपनी पहले BS-6 इंजन वाले दोपहिया वाहन को लांच करने की तैयारी कर रही है। कंपनी द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार इसे आगामी 12 जून को पेश किया जाएगा। Honda ने मीडिया को आमंत्रित करते हुए कहा ​है कि ये उनकी पहली BS-6 दोपहिया वाहन होगी। ऐसे में ये कयास लगाए जा रहे हैं कि कंपनी अपनी लोक​प्रिय स्कूटर Activa को BS-6 इंजन के साथ पेश कर सकती है।

हालांकि इस बारे में अभी कोई आधिकारिक सूचना नहीं दी गई है, लेकिन कुछ दिनों पहले ही BS-6 इंजन से लैस नई Honda Activa को टेस्टिंग के दौरान स्पॉट किया गया था। एक्टिवा कंपनी की तरफ से सबसे ज्यादा बेची जाने वाली दोपहिया वाहन है। नई एक्टिवा में कंपनी इंजन के साथ साथ कुछ अन्य तकनीकी और फीचर्स में भी बदलाव कर सकती है। नए इंजन के चलते स्कूटर की कीमत में भी इजाफा हो सकता है।

होंडा के अलावा अन्य वाहन निर्माता कंपनियां भी नए BS-6 इंजन वाले वाहनों को पेश करने में लगे हुए हैं। हाल ही में महिंद्रा ने भी घोषणा की है कि वो भी बहुत जल्द ही अपने वाहनों में नए मानकों के अनुसार इंजन का प्रयोग करेगी। तो आइये जानते हैं कि आखिर ये बदलाव क्यों किया जा रहा है और BS-6 क्या होता है, इसका आम जीवन से लेकर आपकी जेब तक क्या असर होगा?

क्यों हो रहा है ये बदलाव: सबसे पहले तो ये जान लें कि वाहन निर्माता कंपनियां आखिर ये बदलाव क्यों कर रही हैं। भारत सरकार के निर्देशानुसार आगामी 1 अप्रैल 2020 के बाद से देश में केवल उन्हीं वाहनों की बिक्री हो सकेगी जिसमें BS-6 इंजन का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे पूर्व ही सभी वाहन निर्माता अपने वाहनों में इस नए मानक वाले इंजन का इस्तेमाल कर देंगे।

क्या होता है BS-6: भारत चरण उत्सर्जन मानक, इसे भारत स्टेज इमिशन स्टैंडर्ड भी कहा जाता है। ये भारत सरकार द्वारा स्थापित किया गया एक उत्सर्जन मानक हैं जो मोटर वाहनों सहित आंतरिक दहन इंजन और स्पार्क-इग्निशन इंजन से उत्पन्न होने वाले प्रदूषण को विनियमित करने के लिए बनाया गया है। इसका स्टैंडर्ड और समय सीमा वन मंत्रालय और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अन्तर्गत आने वाले केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा तय किया जाता है।

साफ शब्दों में कहें तो सरकार द्वारा प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए अलग अलग मानक तय किए जाते हैं। अब तक BS-4 इंजन का प्रयोग वाहनों में किया जाता रहा है। लेकिन प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है, कई महानगरों में ये स्तर इस कदर बढ़ गया है कि वहां सांस लेना तक मुश्किल है। ऐसे में सरकार इन मानकों में बदलाव कर नए स्टेज का निर्माण करती है। अब सरकार ने इस मानक के स्तर को बढ़ाकर BS-6 कर दिया है। ताकि वाहनों से होने वाले प्रदूषण के स्तर को कम किया जा सके।

कब हुई शुरुआत: यूरोपीय नियमों के आधार पर मानकों को पहली बार 2000 में पेश किया गया था। इसके बाद BS II को वर्ष 2001 में दिल्ली एनसीआर, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में लागू किया गया। अप्रैल 2005 से ये स्टैंडर्ड पूरे देश में लागू कर दिया गया। इसके बाद अप्रैल 2010 से देश भर में BS III स्टैंडर्ड वाले वाहनों को चलाने की अनुमति मिली। अप्रैल 2017 से देश भर में भारत स्टेज 4, जिसे (BS IV) कहा जाता है ऐसे इंजन वाले वाहनों को चलाने की अनुमति दी गई, जो कि अब तक जारी है। लेकिन वर्ष 2016 में, भारत सरकार ने घोषणा की कि देश BS-V मानदंडों को छोड़कर BS-6 मानदंड वाले इंजनों का प्रयोग करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने अपने हालिया फैसले में, 1 अप्रैल, 2020 से पूरे देश में उत्सर्जन मानक भारत स्टेज -4 के अनुरूप मोटर वाहनों की बिक्री और पंजीकरण पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसलिए अब नए BS-6 मानदंड वाले इंजनों का प्रयोग किया जाएगा।

BS-6 का आम जीवन पर असर: इस समय देश में जो गाड़ियां प्रयोग में लाई जा रही हैं उनमें बीएस-4 इंजन का प्रयोग किया गया है। BS-4 इंजन वाली गाड़ियां BS-6 इंजन वाली गाड़ियों की तुलना में ज्यादा प्रदूषण फैलाती हैं। BS-4 इंजन वाली गाड़ियों से निकलने वाले धुएं का सीधा असर हमारे शरीर पर सीधे तौर पर पड़ता है। इससे आंख और नाक में जलन, सिरदर्द, फेंफड़ों में इन्फेक्शन जैसी समस्याएं होती है। वहीं BS-6 इंजन वाले वाहनों के साथ ये समस्या नहीं होगी। BS-6 ईंधन में सल्फर की मात्रा काफी कम होती है। इसके अलावा इसमें एडवांस एमीशन कंट्रोल सिस्टम भी लगाया जाता है। मानकों के अनुसार BS-6 इंजन से लैस डीजल वाहन तकरीबन 68 प्रतिशत तक कम नाइट्रोजन ऑक्साइड का उत्सर्जन करते हैं वहीं पेट्रोल इंजन 25 प्रतिशत तक नाइट्रोजन ऑक्साइड का उत्सर्जन करते हैं।

BS-6 का जेब पर असर: नए मानकों के अनुसार वाहनों के इंजन में सॉफ्टवेयर से लेकर हार्डवेयर तक बदलाव किया जाएगा। इससे इंजन की प्रोडक्शन कॉस्ट बढ़ेगी। यदि पैसेंजर वाहनों की बात करें तो ए​क रिपोर्ट के अनुसार नए BS-6 पेट्रोल इंजन वाली कारों की कीमत में 70 हजार से 1 लाख रुपये और BS-6 डीजल इंजन की कारों की कीमत में तकरीबन 1.5 लाख रुपये से लेकर 2 लाख रुपये तक का इजाफा हो जाएगा।

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डीजल इंजन चिंता का विषय: इस बदलाव के बाद सबसे बड़ी चिंता डीजल वाहनों को लेकर हो रही है। डीजल वाहनों की बिक्री का प्रतिशत लगातार घट रहा है, इसके अलावा डीजल और पेट्रोल की कीमत में भी कुछ खास अंतर नहीं रह गया है। ऐसे में यदि वाहन निर्माता कंपनियां डीजल वैरिएंट में नए BS-6 इंजन का प्रयोग करेंगी तो कीमत में 1.5 से 2 लाख रुपये की बढ़ोत्तरी होगी। ऐसे में पहले से ही मंदी की मार झेल रहा डीजल सेग्मेंट पूरी तरह से लड़खड़ा जाएगा। क्योंकि उंची कीमत के कारण इनकी बिक्री और भी कम हो जाएगी। हाल ही में मारुति सुजुकी और टाटा मोटर्स ने आगामी अप्रैल 2020 से देश में डीजल वाहनों का निर्माण न करने की घोषणा की है।

निष्कर्ष: बहरहाल, नए BS-6 मानक वाले इंजन को प्रयोग में लाए जाने के बाद देश भर में वाहनों से होने वाले प्रदूषण के स्तर में कमी जरूर आएगी। इसका असर जेब पर भले ही पड़े लेकिन स्वास्थ्य के​ लिहाज से ये एक बेहद जरूरी कदम है। यही कारण है कि सरकार ने BS-4 के बाद सीधे BS-6 मानक को लागू किया है, इस दौरान सरकार ने BS-5 स्टैंडर्ड को लागू करने में अपना समय बर्बाद नहीं किया है।

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