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Volkswagen की धांधली का पूरी दुनिया के सामने किया था भंडाफोड़, बेंगलुरु के इंजीनियर को किया कंपनी से बाहर

वर्ष 2013 में हेमंत कप्पन्ना अमेरिका के वेस्ट वर्जीनिया में एक इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स के एक छोटी सी टीम का हिस्सा थें। इसी टीम के रिसर्च वर्क ने Volkswagen के डीजलगेट कांड का पर्दाफाश किया था।

Author Updated: May 8, 2019 1:27 PM
हेमंत कप्पन्ना, जिन्होनें Volkswagen की धांधली का पर्दाफाश किया। (Nick Hagen/The New York Times)

जर्मनी की प्रमुख वाहन निर्माता कंपनी फॉक्सवैगन के डीजलगेट कांड का पर्दाफाश करने वाला भारतीय इंजीनियर आज बेरोजगार है। 41 साल के हेमंत कप्पन्ना, जिन्होनें 17 साल से ज्यादा समय अमेरिका में बिताया उन्हे जनरल मोटर्स ने अपनी कंपनी से निकाल दिया। आज हेमंत वापस अपने घर बेंगलुरु लौट चुके हैं और नई नौकरी की तलाश में है।

न्यूयॉर्क टाइम्स में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2013 में हेमंत कप्पन्ना अमेरिका के वेस्ट वर्जीनिया में एक इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स के एक छोटी सी टीम का हिस्सा थें। इसी टीम के रिसर्च वर्क ने Volkswagen के डीजलगेट कांड का पर्दाफाश किया था। जिसके लिए फॉक्सेवेगन ने अकेले अमेरिका में 23 बिलियन डॉलर का फाइन भरा था।

हेमंत कप्पन्ना वेस्ट वर्जीनिया विश्वविद्यालय में मॉर्गेंटाउन में अध्ययन कर रहे थे, जो ऑटो उत्सर्जन पर अपने शोध के लिए जाना जाता है। यहां पर उनके प्रोग्राम डायरेक्टर ने उन्हें अंतर्राष्ट्रीय परिवहन परिषद से ग्रांट एप्लीकेशन पूरा करने के लिए कहा। ये काउंसिल एक नॉन प्रॉफिट ग्रूप था जो कि अमेरिका में बेची जाने वाली जर्मन डीजल कारों के उत्सर्जन का परीक्षण करना चाहता था।

कैसे किया भंडाफोड: यूनिवर्सिटी एक रियल टाइम टेस्ट करना चाहती थी इसके लिए एक गैराज में इन डीजल कारों के उत्सर्जन की जांच करने की योजना बनाई गई। क्योंकि सड़क पर चलती कारों के बजाए यहां पर उनकी जांच करना ज्यादा आसान था। हेमंत कप्पन्ना के साथ दोन अन्य छात्रों स्विट्जरलैंड से मार्क बेस्च और भारत से अरविंद थिरुवेंगडम को फील्डवर्क करने के लिए चुना गया था। उन्होंने एक छोटे उत्सर्जन-परीक्षण उपकरण को प्लाईवुड की एक शीट पर फौक्सवेगन डीजन गाड़ी के पीछे लगाया।

इस परीक्षण के दौरान उत्सर्जन के डाटा को एकट्ठा किया जा रहा था और अंत में जो परिणाम आया वो चौकाने वाला था। इस दौरान फौक्सवेगन की कार इतना ज्यादा प्रदूषित उत्सर्जन कर रही थी, जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। कप्पन्ना और उनके साथी छात्रों को इसका पता नहीं था, कि वो एक अपराध के सबूत जुटा रहे थे। फौक्सवैगन के इंजीनियरों ने कार में एक सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया था जो कि प्रदूषण को कंट्रोल कर के दर्शाता था।

कप्पन्ना, बेस्च और थिरुवेनगदम ने अपने इस रिसर्च का पूरा दस्तावेज तैयार किया और इसे मार्च 2014 में सैन डिएगो में होने वाले एक कॉन्फ्रेंस में प्रस्तुत किया। उनके दस्तावेजों ने सीधे तौर पर फॉक्सवै्गन पर गलत काम करने का आरोप नहीं लगाया। लेकिन इसमें शामिल डेटा ने कैलिफोर्निया एयर रिसोर्स बोर्ड और ईपीए के अधिकारियों के कान जरूर खड़े कर दिए थें।

इसके बाद रेग्यूलेटर्स ने इस मामले में जांच शुरू की और 18 महीने बाद, फॉक्सवैगन को यह स्वीकार करने के लिए मजबूर किया कि उसने दुनिया भर में 11 मिलियन डीजल कारों में ची​ट सॉफ्टवेयर का प्रयोग किया है। जिसमें अकेले संयुक्त राज्य अमेरिका में लगभग 600,000 कारें शामिल हैं। जांच में पाया गया इन डीजल कारों के उत्सर्जन से स्वास्थ्य को भी भारी नुकसान हो रहा है।

आज इस मामले में फॉक्सवैगन के दो अधिकारी अमेरिका में जेल की सजा काट रहे हैं। वहीं कंपनी ने अब तक 33 बिलियन डॉलर का भुगतान किया है। वहीं इस मामले को दुनिया के सामने लाने वाले भारतीय इंजीनियर हेमंत कप्पन्ना को जनरल मोटर्स ने ये कह कर कंपनी से बाहर कर दिया कि ये “स्ट्रैटेजिक ट्रांस्फॉर्मेशन” है। कप्पन्ना अब नई नौकरी के तलाश में हैं लेकिन ऑटोमोबाइल सेक्टर में आई मंदी के चलते फिलहाल उन्हें कहीं जॉब नहीं मिली है।

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