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हर साल वाहन कारखानों में हजारों कारीगर हो रहे हैं दुर्घटना के शिकार, किसी का कट रहा है हाथ तो किसी की जा रही हैं उंगलियां: रिपोर्ट

Safe In India Foundation की इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि हर साल गुरुग्राम के वाहन कारखानों में हजारों श्रमिक दुर्धटना में अपने हाथ और उंगलियां खो देते हैं।

द सेफ इन इंडिया फाउंडेशन (SII) द्वारा जारी रिपोर्ट में दी गई तस्वीर।

गुरुग्राम के वाहन कारखानों में काम करने वाले कारीगरों के संबंध में एक बेहद ही चौकाने वाला मामला सामने आया है। एक रिपोर्ट के अनुसार इन कारखानों में काम करने वाले हजारों कारीगर हर साल विभिन्न तरह की दुर्घटना का शिकार होते हैं। यह दावा एक कर्मचारी कल्याण समूह ने किया है। इस संबंध में उसने एक रपट जारी की है।

द सेफ इन इंडिया फाउंडेशन (SII) ने रविवार को ‘क्रश्ड’ रपट जारी की। इस रपट को 1,300 दुर्घटना में घायल कर्मचारियों के वास्तविक अनुभव पर तैयार किया गया है। इस मौके पर श्रम एवं रोजगार राज्यमंत्री संतोष कुमार गंगवार ने वीडियो कांफ्रेंस के जरिये अपने संबोधन में कहा कि कारखानों में परिचालन संस्कृति को और अधिक पेशेवर एवं आधुनिक बनाया जा रहा है।

एसआईआई के अनुसार हालांकि, बड़ी वाहन कंपनियों ने अपने कर्मचारियों के लिए स्वास्थ्य और सुरक्षा नीतियां बनायी हुई हैं। लेकिन इन कंपनियों को कलपुर्जों की आपूर्ति करने वाले कारखानों को अपनी सुरक्षा नीतियां सुदृढ़ करने की जरूरत है।

Safe In India Foundation की इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि हर साल गुरुग्राम के वाहन कारखानों में हजारों श्रमिक दुर्धटना में अपने हाथ और उंगलियां खो देते हैं। देशभर के कारखानों में यह संख्या कहीं अधिक हो सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इनमें अधिकतर श्रमिक युवा, दूसरे राज्यों से आए हुए और अनुबंध पर काम करने वाले होते हैं। इसमें अधिकतर संख्या दोपहिया और कार कंपनियों को कलपुर्जों की आपूर्ति करने वाले कारखानों में काम करने वाले कामगारों की होती है।

इसमें कहा गया है कि इन कारखानों में कम लागत पर उत्पादन करने का दबाव होने और सुरक्षा संस्कृति की कमी को देखते हुये बड़ी संख्या में र्किमयों के साथ दुर्घटना होती है। रिपोर्ट को गुरुग्राम के मंडलीय आयुक्त अशोक सांगवान ने जारी किया। इसमें समस्या के समाधान भी दिये गये हैं और विनिर्माताओं तथा सरकार से कार्रवाई करने को कहा गया है।

कारखानों में दुर्घटना का शिकार हुये इन 1,300 कर्मचारियों की सहायता एसआईआई ने की। आईआईएम अहमदाबाद के छात्र रहे तीन लोगों ने 2015 में इसकी शुरुआत की और ईएसआईसी से इन कर्मचारियों की स्वास्थ्य देखभाल करने के साथ ही मुआवजा भी दिलाया।

इनपुट: भाषा

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