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चीन से मुकाबला करना है तो भारत को मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बढ़ावा देना होगा: पवन गोयनका

Mahindra and Mhindra के प्रबंध निदेशक पवन गोयनका ने कहा कि, भारत को अपने विनिर्माण क्षेत्र (मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर) को विकसित करने और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की जरूरत है।

Pawan Goenka, Indian Manufacturing Sector, India China Crisis, Pawan Goenkaफाइल फोटो: पवन गोयनका ने देश में मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट कम करने पर जोर दिया है।

भारत और चीन के बीच बढ़ते तनाव के कारण देश भर में चीनी उत्पादों के बहिस्कार का नारा जोर पकड़ रहा है। ऐसे में देश के कारोबारी क्षेत्र में इस बात की चर्चा भी तेजी से हो रही है कि चीन के मुकाबले भारत को औद्योगिक क्षेत्र में किस तरह के बदलाव करने की जरूरत है। इस बारे में कई उद्योगपतियों ने अपनी अपनी राय रखी है। अब महिंद्रा एंड महिंद्रा के प्रबंध निदेशक पवन गोयनका ने कहा है कि भारत को अपने विनिर्माण क्षेत्र (मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर) को विकसित करने और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की जरूरत है।

बीएनईएफ शिखर सम्मेलन में भाग लेते हुए, पवन गोयनका ने कहा कि सरकार इस दिशा में पहली बार गंभीर प्रयास कर रही है ताकि देश में विनिर्माण क्षेत्र बढ़ सके। उन्होंने कहा, “आप लोगों को निवेश के लिए मजबूर करके मैन्युफैक्चरिंग नहीं बढ़ा सकते क्योंकि निवेश तभी हो सकता है जब उससे कुछ लाभ मिले। भारत को विनिर्माण के क्षेत्र में मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट कम करने की जरूरत है।”

उन्होंने कहा कि, “दुर्भाग्य से भारत में मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट कम नहीं है और इसके कई अलग-अलग कारण हैं। प्लांट स्थापित करने के लिए समय और पैसे की लागत जैसे कारक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को प्रभावित करते हैं। इन सभी कारकों को एक साथ लाकर इन पर काम करने की जरूरत है।” गोयनका ने चीन का हवाला देते हुए कहा कि, “चीन एक दिन में ही नहीं बन गया था, इसमें दशकों लगे थें। चीन ने एक लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित कर के उस पर काम किया”

गोयनका ने कहा कि, “चीन ने एक मानक बनाया और उस पर काम किया, भारत तो मानक बनाने में भी सक्षम नहीं दिख रहा है। बिना मानकों (स्केल) के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर विकसित नहीं हो सकता है। इसके लिए इंडस्ट्री और सरकार दोनों को एक साथ मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि भारत को उत्पादों का निर्माता बनना चाहिए और फिर इन्हें अन्य बाजारों में निर्यात करना चाहिए।”

उन्होनें अवसर का लाभ उठाने की बात पर जोर देते हुए कहा कि, “अलग अलग क्षेत्रों में बहुत से मौके है। इसके लिए हमें तैयार रहना चाहिएं, हमें ज्यादा मेहनत और पंचवर्षीय योजनाओं की जरूरत है। बहुत सी कंपनियां चीन को छोड़ रही हैं, जिन्हें हम बहुत अच्छी तरह से जानते हैं, उनमें से कुछ भारत आ रही हैं। इसलिए हमें मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट को प्रतिस्पर्धा की दृष्टी से कम करने की जरूरत है।

बता दें कि, अकेले पवन गोयनका ही नहीं हैं जिन्होनें भारत में मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट ज्यादा होने की बात कही है। इससे पहले बजाज ऑटो के राजीव बजाज ने भी मीडिया को दिए अपने बयान में कहा था कि, “चीन के पास बिजनेस के लिए लैंड, लॉजिस्टिक, लेबर और मैन्यूफैक्चरिंग जैसे बेहतर रिसोर्स हैं, जिसके चलते वो कंपोनेट्स को कम से कम कीमत में तैयार कर पाते हैं।”

राजीव बजाज ने कहा था कि, “हम चीन से कंपोनेट्स इसलिए खरीदते हैं क्योंकि वो हमें सस्ते पड़ते हैं, और व्यापार एक सिद्धांत पर चलता है। जिसके अनुसार आपको जहां से भी सस्ते कंपोनेट्स मिलते हैं आपको खरीदने चाहिएं।” बजाज ऑटो हर साल तकरीबन 600 से 700 करोड़ रुपये के कंपोनेट्स चीन से आयात करता है।

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