हवा में उड़ने वाली टैक्सी अब साकार

आप सड़क पर टैक्सी का इंतजार कर रहे हों, ट्रैफिक जाम की चिंता सता रही है और अचानक आपके सामने उड़न टैक्सी उतरे।

हवा में उड़ने वाली कार। फाइल फोटो।

आप सड़क पर टैक्सी का इंतजार कर रहे हों, ट्रैफिक जाम की चिंता सता रही है और अचानक आपके सामने उड़न टैक्सी उतरे। कई लोगों ने इस तरह का सोचा होगा और आपस में चर्चा की होगी। इस सोच को अपनी जामा पहनाए जाने का काम शुरू हो चुका है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजंसी नासा इलेक्ट्रिक एअर टैक्सी का परीक्षण कर रहा है। यह 90 डिग्री पर उतर सकती है और उड़ान भर सकती है। इसे अमेरिकी कंपनी जॉबी एविएशन ने तैयार किया है और नाम ईवीटोल रखा गया है। परीक्षण सफल रहा तो 2024 तक इसे सड़क पर उतारा जा सकेगा। यात्रियों और सामान को एक से दूसरे शहरों में ले जाने के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सकेगा। यह परीक्षण 10 दिनों तक चलेगा। इसकी शुरुआत एक सितंबर से हो चुकी है और 10 सितंबर को अंतिम चरण का परीक्षण होगा।

नासा ने ईवीटोल का परीक्षण कैलिफोर्निया में शुरू किया है। इसे आसपास के शहरों में उड़ान भरने के लिए तैयार किया गया है। परीक्षण के दौरान इसकी क्षमता जांची जाएगी। इससे बाद एअर टैक्सी के मॉडल और अन्य जरूरतों को अमली जामा पहनाया जा सकेगा। परीक्षण से यह भी समझने की कोशिश की जा रही है कि एअर टैक्सी सेवाओं को मान्यता देने के लिए कौन-कौन से नियमों को ध्यान में रखना जरूरी है।

नासा के ‘एडवांस्ड एयर मोबिलिटी कैंपेन’ के प्रमुख डेविड हैकेनबर्ग का कहना है, विमानन सेवाओं को भविष्य में और बेहतर कैसे किया जा सकता है, इसकी जांच कर रहे हैं। परीक्षण सफल होने पर अगले कुछ साल में ऐसी सेवाएं पूरे देश में उपलब्ध हो सकेंगीं। यह उड्डययन उद्योग में बड़ा बदलाव लाएगा। 2024 तक यह एअर टैक्सी आम लोगों के लिए उपलब्ध हो सकती है। इस परीक्षण में ध्वनि प्रदूषण की भी जांच की जा रही है।

ईवीटोल वायुयान उड़ान भरने के दौरान कितना शोर कर रहा है, इसे भी जांचने की कोशिश की जा रही है। इसके लिए वायुयान में 50 से ज्यादा माइक्रोफोन लगाए गए हैं। इससे पता चल सकेगा कि यह एअर टैक्सी कितना ध्वनि प्रदूषण करती है। इसकी परियोजना पर 10 साल से काम चल रहा है। जॉबी एविएशन के संस्थापक और कंपनी प्रमुख जोबेन बीवर्ट का कहना है कि हमने इस परियोजना पर 10 साल तक काम किया है। यह उड़ने वाली एक सफल कार है। इसे शहरों के बीच उड़ाया जा सकेगा। परीक्षण में सफल होते ही पूरे देश में हमारी सेवाएं तेजी से विस्तार करेंगी।

अपने आप चार्ज होंगे मोबाइल और लैपटॉप

जल्द ही आपको लैपटॉप और मोबाइल फोन को चार्ज करने के लिए चार्जर, प्लग, तार और पोर्ट की जरूरत नहीं होगी। कमरे में रखे हुए उपकरण अपने आप चार्ज हो जाएंगे। जापानी वैज्ञानिकों ने एक वायरलेस चार्जिंग रूम तैयार किया है। इस कमरे में हवा से उपकरण चार्ज हो जाएंगे। वैज्ञानिकों का कहना है, यह नई तरह की तकनीक है जिससे बिना इलेक्ट्रिक फील्ड (वैद्युतिक क्षेत्र) के मैग्नेटिक फील्ड (चुंबकीय क्षेत्र) तैयार किया जा सकता है। कमरे में मैग्नेटिक फील्ड के कारण रूम में मौजूद किसी इंसान या जानवर को नुकसान पहुंचने का खतरा नहीं होगा। जापान की तोक्यो यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने ऐसा एक कमरा तैयार किया है। इसका परीक्षण किया जा चुका है।

इंसान को किसी तरह का नुकसान पहुंचाए बिना मैग्नेटिक फील्ड को ध्यान में रखते हुए यह कमरा 50 वॉट तक की बिजली उपलब्ध करा सकता है। नए वायरलेस रूम के लिए एल्युमिनियम टेस्ट रूम को तैयार किया गया। इसमें लैंप, पंखे और मोबाइल फोन को अलग-अलग जगहों पर रखकर चार्ज किया गया। इस परियोजना से जुड़े शोधकर्ता एलेनसन सैंपल के मुताबिक, हमने जो वायरलेस कमरा तैयार किया है, उसमें चुंबक का इस्तेमाल स्थायी तौर पर नहीं किया जा रहा। इसलिए इंसानों की सेहत पर खतरा नहीं है।

नासा ने शुरू किया इलेक्ट्रिक एअर टैक्सी का परीक्षण, यह 90 डिग्री पर उतरती और उड़ान भरती है। इसको वर्ष 2024 तक आम लोगों के लिए शुरू करने की तैयारी है। इसका परीक्षण एक सितंबर से शुरू किया गया है। 10 सितंबर को आखिरी परीक्षण होगा और नासा के अधिकारी इसके नतीजों की घोषणा करेंगे।

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