74 पहियों वाला यह Volvo ट्रक एक साल में 1,700Km की यात्रा कर नासिक से पहुंचा तिरुवनंतपुरम! हर दिन चलता था महज 5 Km, जानिए क्या है वजह

इस ट्रक की साइज और मूवमेंट का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि रोड पर कई जगहों पर पेड़ो को भी काटा गया यहां तक इलेक्ट्रिक लाइंस को भी हटाकर रास्ता बनाया गया ताकि इस भारी भरकम ट्रक को आगे बढ़ाया जा सके।

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Volvo ट्रक पर लदी हुई भारी भरकम ऐरोस्पेस की मशीनरी। (Photo- ANI)

भारी माल वाहन ट्रक अपनी लंबी दूरी की यात्राओं के लिए जाने जाते हैं। सामान्य तौर पर लंबी दूरियां हफ्तों या महीनों तक में पूरी कर ली जाती हैं, लेकिन महाराष्ट्र के नासिक से चला Volvo का एक ट्रक पूरे 1 साल में महज 1,700 किलोमीटर तक की यात्रा कर केरल के विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (VSSC) पहुंचा है। बताया जा रहा है कि 74 पहियों वाले इस ट्रक पर ऐरोस्पेस से जुड़ी एक ऑटोक्लेव मशीनरी लदी थी।

जिस लिहाज से इस ट्रक ने अपनी यात्रा पूरी की है उस हिसाब से औसतन प्रतिदिन इस ट्रक ने 5 किलोमीटर तक की यात्रा की है। बता दें कि, इस ट्रक को रूबिकन प्रोजेक्ट द्वारा हैंडल किया गया है और सड़क पर उतरने के बाद यह ट्रक पूरे इतना भारी था कि पूरी सड़क को कवर कर लेता था। इसे आगे बढ़ाने के लिए 32 सदस्यों को मूवमेंट कंट्रोल करना पड़ता था।

इस ट्रक पर जो एरोस्पेस ऑटोक्लेव लदा हुआ था उसका वजन 70 टन बताया जा रहा है, जिसकी उंचाई 7.5 मीटर और चौड़ाई 6.65 मीटर थी। इस मशीन को नासिक में तैयार किया गया था जहां पर एरोस्पेस से जुड़ी अन्य मशीनरी का निर्माण किया जाता है। इस मशीनरी की सुरक्षा के लिए जगह जगह पर पुलिस की पायलट कार भी इस ट्रक को आगे बढ़ाने में मदद कर रही थी, ताकि इसे सुरक्षित ढंग से गंतव्य तक पहुंचाया जा सके।

काटे गए पेड़: इस ट्रक की साइज और मूवमेंट का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि रोड पर कई जगहों पर पेड़ो को भी काटा गया यहां तक इलेक्ट्रिक लाइंस को भी हटाकर रास्ता बनाया गया ताकि इस भारी भरकम ट्रक को आगे बढ़ाया जा सके। किसी भी दूसरे शहर में प्रवेश करने से पहले इस ट्रिप से जुड़े 32 सदस्यों का दल दूसरे शहरों के अथॉरिटी से संपर्क करता था और पूरी स्थिति की जानकारी देने के बाद ही ट्रक को आगे बढ़ाया जाता था।

मीडिया को दिए गए अपने एक बयान में इस ट्रिप से जुड़े एक सदस्य ने बताया कि, “हम लोगों ने 8 जुलाई 2019 को अपनी यात्रा महाराष्ट्रक के नासिक से शुरू की थी और तकरीबन 1 साल के बाद चार राज्यों को क्रॉस करने के बाद हम तिरुवनंतपुरम पहुंचे हैं।” इस मशीनरी को विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर के सुपूर्द किया गया है।

कैसा है ट्रक: यदि ट्रक की बात करें तो यह Volvo FM सीरीज की ट्रक है, जो कि भारी माल वाहक के तौर पर इस्तेमाल की जाती है। इसमें कंपनी ने 10,800cc की क्षमता का 6 सिलिंडर युक्त डीजल इंजन प्रयोग किया है। जो कि 330bhp की दमदार पावर और 1600Nm का टॉर्क जेनरेट करता है। इस ट्रक में 12 स्पीड ऑटोमेटिक ट्रांसमिशन गियरबॉक्स दिया गया है।

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