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खरीदारों को कानून की जानकारी न होने से रियल एस्टेट कारोबारियों की हुई चांदी

हिमाचल प्रदेश में स्थानीय कानूनों से खरीदारों की अनभिज्ञता का भारी लाभ रियल एस्टेट का कारोबार करने वालों को मिल रहा है।

Author शिमला | Updated: May 2, 2017 3:18 PM
हिमाचल प्रदेश में स्थानीय कानूनों से खरीदारों की अनभिज्ञता का भारी लाभ रियल एस्टेट का कारोबार करने वालों को मिल रहा है।

हिमाचल प्रदेश में स्थानीय कानूनों से खरीदारों की अनभिज्ञता का भारी लाभ रियल एस्टेट का कारोबार करने वालों को मिल रहा है। स्थानीय कानून अन्य राज्यों के खरीदारों को हिमाचल की पहाड़ियों में सपनों का घर या कॉटेज खरीदने से नहीं रोकते। लेकिन, इस तथ्य से अनजान दूसरे प्रदेशों के खरीदार उन तमाम बातों पर भरोसा करते हैं जो बिल्डर उन्हें बताते हैं और जिसकी बदौलत जमकर कमाई करते हैं। रियल एस्टेट के जानकारों का कहना है कि बिल्डर खुद को संपत्ति का विशिष्ट अधिकार रखने वाला बताकर यह कमाई कर रहे हैं। राज्य में 60 से अधिक बिल्डर मुख्य रूप से शिमला और सोलन में फ्लैट और कॉटेज बेचने के काम में लगे हुए हैं।

रियल एस्टेट के एक जानकार ने कहा कि बहुत से धनी लोग हिमाचल की खूबसूरत वादियों और पहाड़ों में घर खरीदने का सपना देखते हैं। इसे हकीकत में बदलने में स्थानीय मालिकाना हक नियमों को बड़ी बाधा के रूप में पेश किया जाता है। उन्होंने कहा कि इसकी आड़ में बिल्डर फर्जी दावे करते हैं कि वे अमुक संपत्ति को फ्रीहोल्ड लग्जरी आवास के विशेषाधिकार के साथ बेच रहे हैं। इस बात को किसी प्रोजेक्ट की बिक्री का मुख्य आधार बनाया जाता है। इस माहौल में गैर हिमाचली खरीदार को यह विश्वास हो जाता है कि बिल्डर या प्रोजेक्ट को कुछ विशेषाधिकार हासिल है। और, इसी जाल में फंसकर वह पैसा निवेश कर देता है।

शिमला स्थित एक रियल एस्टेट एजेंट ने आईएएनएस से कहा, “लेकिन, ऐसा कुछ भी नहीं होता और खरीदारों को इस जाल में नहीं फंसना चाहिए। उन्हें देखना चाहिए कि प्रोजेक्ट कैसा है, इसकी आर्थिक संभावनाएं कितनी हैं, सरकार से इजाजत ली गई है या नहीं और यह कि बिल्डर का पुराना रिकार्ड कैसा है। इन जानकारियों को हासिल करने के बाद उन्हें पैसा लगाना चाहिए।”

हिमाचल के कानून के अनुसार, म्युनिसिपल दायरे में आने वाले किसी बिल्डर के प्रोजेक्ट में फ्लैट या कॉटेज खरीदने के लिए किसी निजी अनुमति की जरूरत नहीं होती। यह बिल्डर की जिम्मेदारी होती है कि वह सभी जरूरी अनुमतियां हासिल करे।

लेकिन, एक राजस्व अधिकारी ने कहा कि अगर कोई आवासीय परियोजना म्युनिसिपल दायरे से बाहर है तो किसी भी फ्लैट, कॉटेज या घर को खरीदने के इच्छुक व्यक्ति को संबंधित उपायुक्त से अनुमति लेनी पड़ती है। अधिकारी ने कहा कि अगर कोई एकमुश्त जमीन का बड़ा टुकड़ा लेना चाहता है तो फिर कानून के तहत राज्य कैबिनेट से इसके लिए अनुमति लेनी पड़ती है। आमतौर से इसकी इजाजत केवल कोलोनाइजर को दी जाती है।

अधिकारी ने कहा कि गैर हिमाचली सामान्य प्रक्रियाओं का पालन करते हुए रिहाइशी उद्देश्यों से 450 मीटर और व्यावसायिक उद्देश्यों से 275 मीटर का रकबा खरीद सकता है। हिमाचल प्रदेश शहरी एवं ग्रामीण नियोजन (संशोधन) अधिनियम 2013 के तहत बिल्डर विभिन्न श्रेणियों में मकान बनाकर उन्हें बेच सकता है।

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