Budget 2026 : SBI Research Suggestions for Insurance Sector: सरकार और बीमा सेक्टर की रेगुलेटरी संस्था IRDAI देश में 2047 तक बीमा कवरेज का लाभ हर व्यक्ति तक पहुंचाने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। लेकिन ताजा आंकड़े बताते हैं कि यह रास्ता आसान नहीं है। ऐसा इसलिए क्योंकि पिछले कुछ वर्षों के दौरान देश में बीमा की पहुंच या पैठ लगातार कम हुई है।

SBI रिसर्च की बजट से पहले जारी रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-25 के दौरान देश में बीमा की पैठ (Insurance Penetration) घटकर 3.7% रह गई, जबकि वित्त वर्ष 2021-22 (FY22) में यह 4.2% और वित्त वर्ष 2022-23 (FY23) में 4% थी। चिंता की बात यह भी है कि बीमा की पहुंच में गिरावट की सबसे बड़ी वजह जीवन बीमा की हिस्सेदारी घटकर 2.7% रह जाना है। ऐसे में बजट 2026 से उम्मीद की जा रही है कि सरकार “इंश्योरेंस फॉर ऑल” के लक्ष्य को हासिल करने के लिए कुछ ठोस कदम उठा सकती है।

बीमा का दायरा घटना चिंता की बात

देश में बीमा की पैठ (Insurance Penetration) का मतलब है कि देश की अर्थव्यवस्था के मुकाबले बीमा कवरेज का साइज कितना है। जीवन बीमा की पैठ घटकर 2.7% पर आ जाना इस बात का संकेत है कि लोग भविष्य की सुरक्षा के लिए बीमा को प्राथमिकता नहीं दे पा रहे। वहीं गैर-जीवन बीमा करीब 1% पर स्थिर है, यानी हेल्थ इंश्योरेंस, वेहिकल इंश्योरेंस और संपत्ति बीमा जैसी जरूरतें भी सीमित दायरे में ही सिमटी हुई हैं। यह स्थिति IRDAI के 2047 तक “सभी के लिए बीमा” यानी इंश्योरेंस फॉर ऑल के मिशन के रास्ते में बड़ी चुनौती बन गई है।

टैक्स राहत से बढ़ सकती है लोगों की दिलचस्पी

SBI रिसर्च का मानना है कि अगर सरकार बजट में टर्म और हेल्थ इंश्योरेंस के लिए अलग से टैक्स छूट दे, तो बीमा लेने वालों की संख्या बढ़ सकती है। अभी नई टैक्स रिजीम में सेक्शन 80D जैसी छूट का लाभ नहीं मिलता। अगर नई और पुरानी दोनों टैक्स रिजीम में टर्म या हेल्थ इंश्योरेंस पर 25,000 या 50,000 रुपये तक की टैक्स छूट अलग से दे दी जाए, तो मिडिल क्लास के लिए बीमा लेना ज्यादा आकर्षक बन सकता है।

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क्लेम से जुड़ी शिकायतें बड़ी रुकावट

IRDAI के आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2025 में बीमा से जुड़ी शिकायतों में काफी बढ़ोतरी हुई और करीब 69% शिकायतें सिर्फ क्लेम को लेकर थीं। यानी पॉलिसी लेने वाले लोगों को भी जरूरत के वक्त क्लेम के पैसे मिलने में परेशानी हो रही है। इसी वजह से SBI रिसर्च ने हेल्थ इंश्योरेंस सेक्टर में सुधार पर जोर दिया है, ताकि क्लेम प्रॉसेस को आसान और भरोसेमंद बनाया जा सके।

डिजिटल और बैंक चैनलों पर जोर

रिपोर्ट के अनुसार आने वाले समय में इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन का सबसे असरदार तरीका डिजिटल प्लेटफॉर्म, ई-कॉमर्स और बैंकिंग चैनल बन सकते हैं। इससे दूर-दराज के इलाकों तक बीमा की पहुंच बनाई जा सकेगी और ग्राहकों के लिए भी यह प्रक्रिया आसान होगी। डिजिटल माध्यम न सिर्फ लागत घटाएंगे, बल्कि पारदर्शिता भी बढ़ाएंगे।

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आपदा बीमा के लिए नए उपायों की जरूरत

भारत में प्राकृतिक आपदाओं (natural calamities) की तेजी और फ्रीक्वेंसी बढ़ रही है। 1991 से 2025 तक के आंकड़ों को देखें तो लगभग 93% का बहुत बड़ा “प्रोटेक्शन गैप” है। यानी नुकसान का बड़ा हिस्सा बीमा से कवर ही नहीं हो पाता। इसे कम करने के लिए SBI रिसर्च ने सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public Private Partnership) मॉडल को फॉलो करते हुए डिजास्टर पूल (Disaster Pool) बनाने का सुझाव दिया है। साथ ही, बीमा कंपनियों के लिए रिस्क बेस्ड कैपिटल फ्रेमवर्क (RBC framework) की ओर बढ़ने की जरूरत बताई गई है, ताकि हर कंपनी के जोखिम के हिसाब से पूंजी का इंतजाम हो सके।

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कुल मिलाकर, बजट 2026 में सरकार से कुछ ऐसे उपायों की उम्मीद की जा रही है, जिनसे न सिर्फ बीमा सेक्टर को फायदा हो, बल्कि बीमा कवरेज का लाभ ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच पाए। इसके तहत अगर बजट में टैक्स राहत, क्लेम प्रक्रिया में सुधार, डिजिटल डिस्ट्रीब्यूशन और आपदा बीमा को बढ़ावा देने वाले कदम उठाए जाएंगे, तो “इंश्योरेंस फॉर ऑल” के सपने को हकीकत में बदलना संभव हो पाएगा।