नोटबंदी के बाद बचतबंदी: सरकार का नया मंत्र- कमाया तो खर्च कीजिए, बचाया तो टैक्स भरिए

नरेंद्र मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में 8, नवंबर 2016 को पीएम ने खुद रात आठ बजे देशभर में नोटबंदी का ऐलान किया था। पीएम की इस घोषणा के बाद 500 और 1000 रुपये के करंसी नोट अवैध हो गए थे।

नौकरी पेशा लोगों को 80C के तहत 1.50 लाख रुपये के डिडक्शन का लाभ आयकर में मिलता था, जिसे सरकार ने खत्म कर दिया है। इसके तहत लोग लाइफ इंश्योरेंस, प्रोविडेंट फंड, एनपीएस में निवेश करते थे। अब इनमें निवेश पर लोगों को कोई छूट हासिल नहीं होगी।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के दूसरे बजट से भले ही सुस्त पड़ी अर्थव्यवस्था में थोड़ी रफ्तार आ जाए लेकिन मध्यम वर्ग की उम्मीदों पर न केवल पानी फिरा है बल्कि उन्हें बड़ा झटका लगा है। खासकर नौकरी पेशा लोगों की बचत आदतों पर बड़ा प्रहार हुआ है। वित्त मंत्री ने 100 में से 70 तरह के डिडक्शन को खत्म करने का ऐलान किया है। इनमें से कई मदों में मध्यम वर्ग अपनी कमाई का एक हिस्सा बचत के तौर पर सुरक्षित भविष्य के लिए निवेश करता था। लेकिन सरकार ने उन बचतों पर अब टैक्स राहत हटा दिया है।

नौकरी पेशा लोगों को 80C के तहत 1.50 लाख रुपये के डिडक्शन का लाभ आयकर में मिलता था, जिसे सरकार ने खत्म कर दिया है। इसके तहत लोग लाइफ इंश्योरेंस, प्रोविडेंट फंड, एनपीएस में निवेश करते थे। अब इनमें निवेश पर लोगों को कोई छूट हासिल नहीं होगी। हालांकि, एनपीएस में निवेश की सीमा 50,000 रुपये फिलहाल रखी गई है। इतनी राशि के निवेश तक कर छूट हासिल होगी लेकिन उससे ज्यादा पर कर देना होगा। इन बचतों पर अब नए टैक्स स्लैब से भी कोई कर फायदा नहीं होगा।

वित्त मंत्री ने शनिवार को बजट भाषण में कहा कि उच्च-आय वाले नौकरी-पेशा वाले लोगों को भविष्य निधि (PF), सुपरनेशन फंड और नेशनल पेंशन स्कीम (NPS) में 7.5 लाख रुपये से ज्यादा की कटौती भी अब कर दायरे में होगी। यानी मध्यम के साथ-साथ उच्च आय वर्ग वाले लोगों की बचत पर भी सरकार ने टैक्स मढ़ा है। माना जा रहा है कि बाजार में उपभोक्ता मांग बढ़ाने के लिए सरकार ने इन बचतों पर टैक्सेशन का प्रस्ताव रखा है।

बता दें कि पीएनबी बैंकिंग घोटाले और पीएमसी बैंक घोटाले के बाद बैंकिंग व्यवस्था में लोगों का भरोसा कम हुआ था और लोग बैंकों में कम जमा कर रहे थे। रिजर्व बैंक द्वारा लगातार बैंक ब्याज में कटौती किए जाने से भी छोटी बचत को झटका लगा था लेकिन बजट में नए प्रावधानों के ऐलान के बाद इसे बचतबंदी कहा जा रहा है। यानी सरकार का साफ संकेत है कि कमाई की है तो उसे खर्च कीजिए वरना बचत किया तो टैक्स भरना पड़ेगा। पहले से इन बचतों पर कर छूट मिलती आ रही थी और उसका दायरा बढ़ता जा रहा था लेकिन मोदी सरकार ने उसे खत्म करने की दिशा में बड़ा और कठोर कदम उठाया है।

बता दें कि नरेंद्र मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में 8, नवंबर 2016 को पीएम नरेंद्र मोदी ने खुद रात आठ बजे देशभर में नोटबंदी का ऐलान किया था। पीएम की इस घोषणा के बाद 500 और 1000 रुपये के करंसी नोट अवैध हो गए थे। इसके बाद बड़ी संख्या में लोग अपने-अपने पैसे जमा कराने बैंकों की कतार में खड़ा हो गए थे। देशभर में कई जगह भगदड़ की घटना भी हुई। कुछ लोगों की इसमें जान भी चली गई थी। अब सरकार ने कमाई पर बचतबंदी का ऐलान कर दिया है, इससे फिर से आम आदमी परेशान हो सकता है।

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