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Budget 2018: राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और राज्यपालों की 200 फीसदी बढ़ेगी सैलरी, जानें नई तनख्वाह

Budget 2018, Union Budget 2018 Highlights (आम बजट 2018): यह बजट देश के सबसे ऊंचे औहदे के पर काबिज राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के लिए भी खुश खबर लाया है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू की सैलरी में करीब 200 फीसदी का इजाफा होगा।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (फाइल फोटो- पीआईबी)

बजट 2018 देश के सबसे ऊंचे औहदे के पर काबिज राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के लिए भी खुश खबर लाया है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने गुरुवार (01 फरवरी) को संसद में बजट पेश करते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू की सैलरी में करीब 200 फीसदी का इजाफा करने की घोषणा की। अगर सरकार के प्रस्ताव पर इस बजट सत्र में मुहर लगती है को तो राष्ट्रपति की सैलरी 5 लाख रुपये प्रति महीना हो जाएगी और उप राष्ट्रपति को 4 लाख रुपये प्रति महीना सैलरी मिलेगी। इसी के साथ राज्यों के राज्यपालों की सैलरी भी बढ़कर 3.5 लाख रुपये हो जाएगी। सांसदों की सैलरी में भी इजाफा करने की बात कही गई है। लेकिन सांसदों की सैलरी मुद्रा स्फीति की घटती-बढ़ती दरों के हिसाब से हर पांच साल में अपने आप तय होगी। सांसद खुद अपनी सैलरी में इजाफा तय नहीं कर पाएंगे। अभी राष्ट्रपति को 1.5 लाख रुपये प्रति महीना और उपराष्ट्रपति को 1.25 लाख प्रति महीना और राज्यों के गर्वनर को 1.10 लाख रुपये प्रति महीना मिलती है। राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के सैलरी में इजाफे की घोषणा का सांसदों ने स्वागत किया है।

राष्ट्रपति देश की तीनों सेनाओं के सुप्रीम कमांडर होते हैं और देश के सबसे ऊंचे औहदे का ऑफिस संभालते हैं, लेकिन 7वें पे कमीशन के लागू होने के बाद उनकी सैलरी देश के शीर्ष नौकरशाहों और सेवा प्रमुखों से कम रह गई। राष्ट्रपति की सैलरी 5 लाख रुपये प्रति महीना करने का प्रस्ताव 2016 में आया था। अगर इसी बजट सत्र में राष्ट्रपति और उप राष्ट्रपति की सैलरी बढ़ाने पर मुहर लगती है तो फरवरी की सैलरी पर भी इजाफा लागू होगा।

बता दें कि राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति की सैलरी में भले ही इजाफा करने की बात हो रही हो, लेकिन वित्त मंत्री के इस बजट से नौकरीपेशा लोगों को खुशी हाथ नहीं लगी है। सरकार के इस आखिरी पूर्णकालिक बजट में नौकरीपेशा लोगों के लिए टैक्स स्लैब में छूट की उम्मीद जताई जा रही थी, लेकिन उसमें किसी तरह बदलाव नहीं किया गया। इसके बजाय सरकार स्टैंडर्ड डिक्शन स्कीम को दोबारा लाई है। इससे नौकरीपेशा लोगों को ट्रांसपोर्ट और मेडीकल खर्च के संबंध में 40 हजार रुपये घटाकर आय पर टैक्स देना होगा। सरकार ने आयकर पर सेस बढ़ाने का भी प्रावधान किया है। बुजुर्गों के लिए 80 डी के तहत मिलने वाली मेडीकल क्लेम की सीमा बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दी गई है। बैंक डिपॉजिट मामले में भी सीनिर सिटीजन की ब्याज छूट की सीमा बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दी गई है।

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