ताज़ा खबर
 

Budget 2018: स्‍टैंडर्ड डिडक्‍शन से आठ हजार करोड़ गंवाया, सेस बढ़ा कर 11 हजार करोड़ वसूल लिया

Budget 2018, Union Budget 2018 Highlights (आम बजट 2018): वित्त मंत्री ने आयकर अधिनियम की धाराओं में बदलाव करने का प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत सिर्फ इलेक्ट्रॉनिक मोड में ही इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल किए जा सकेंगे।

वित्त मंत्री अरुण जेटली।(फाइल फोटो)

साल 2018-19 के बजट में नौकरीपेशा करदाताओं के लिए कुछ नहीं है। वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने 12 साल बाद स्‍टैंडर्ड डिडक्‍शन को फिर से शुरू करने का ऐलान किया। उन्‍होंने करदाताओं के लिए इसे राहत बता कर पेश किया और कहा कि 40 हजार रुपए का स्‍टैंडर्ड डिडक्‍शन मिलेगा। साथ ही, कहा कि इससे सरकारी खजाने पर आठ हजार करोड़ का बोझ पड़ेगा। लेकिन, अगले ही पल सेस को एक फीसदी बढ़ा कर 11 हजार करोड़ रुपए वसूल करने का ऐलान भी कर दिया। यानी आय करदाताओं से सीधे तौर पर तीन हजार करोड़ रुपए का बोझ डाल दिया। यही नहीं, स्‍टैंडर्ड डिडक्‍शन के फायदे का हिसाब लगाने पर पता चला कि पांच लाख तक की सालाना कमाई है तो 177 रुपए बचेंगे। ज्‍यादा आमदनी पर टैक्‍स की देनदारी पहले से थोड़ी ज्‍यादा ही हो जाएगी।

बता दें कि यह नरेंद्र मोदी सरकार का आखिरी पूर्ण बजट था, जिसे गुरुवार (1 फरवरी) को केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने लोकसभा में पेश किया। वेतनभोगी करदाता उम्मीद लगाए बैठे थे कि चुनावी साल होने की वजह से सरकार राहत देगी, लेकिन राहत गांववालों, किसानों और गरीबों को मिली। माना जा रहा है कि ग्रामीण मतदाताओं को लुभाने के लिए सरकार ने उनके ऊपर ज्यादा खर्च करने का मन बनाया है। लेकिन, इसका पैसा करदाताओं से वसूला है। नौकरीपेशा करदाताओं के लिए बात ज्‍यादा अखरने वाली इसलिए भी है, क्‍योंकि वे औसतन कारोबारी करदाताओं की तुलना में तीन गुना कर अदा करते हैं।

स्टैन्डर्ड डिडक्शन: लोकसभा में आम बजट 2018 पेश करते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने नौकरीशुदा लोगों को इनकम टैक्स में कोई राहत तो नहीं दी लेकिन उन्होंने 40,000 रुपये का स्टैन्डर्ड डिडक्शन देकर उन्हें राहत के नाम पर थोड़ी सी खुशी थमाने की कोशिश की है। अपने बजट भाषण में जेटली ने कहा कि समाज में यह आम धारणा है कि वेतनभोगियों से बेहतर व्यक्तिगत व्यवसायियों की है। उन्होंने इनकम टैक्स कलेक्शन के संदर्भ में कहा कि समाज की यह धारणा सही नहीं दिखाई देती है क्योंकि वित्त वर्ष 2016-17 में जहां 1.89 करोड़ वेतनभोगियों ने कुल 1.44 लाख करोड़ रुपये का आय कर भुगतान किया था वहीं, 1.88 करोड़ व्यवसायियों ने कुल 48,000 करोड़ रुपये का इनकम टैक्स भरा था। औसत रूप से देखें तो हरेक वेतनभोगी ने 76, 306 रुपये आयकर अदा किए जबकि व्यवसायियों ने औसतन मात्र 25,753 रुपये ही टैक्स जमा किए। मतलब साफ है कि इस देश में वेतनभोगियों पर आयकर की मार ज्यादा है। इसी बात का जिक्र वित्त मंत्री ने बजट भाषण में किया और वेतनभोगियों को राहत देने की बात कही मगर जब उन्होंने राहत के रूप में 40,000 रुपये का स्टैन्डर्ड डिडक्शन देने की बात कही तो यह वेतनभोगियों के लिए महज झुनझुना साबित हुआ। इससे पांच लाख तक की सालाना आयवालों को महज 177 रुपये का फायदा होगा जबकि इससे ज्यादा आयवालों को पहले से ज्यादा कर चुकाने होंगे।

Budget 2018 Income Tax Slab: सेस जोड़ दें तो स्‍टैंडर्ड डिडक्‍शन घटा कर भी आपको देना पड़ सकता है ज्‍यादा इनकम टैक्‍स

बजट भाषण 2018 के अंश।

वित्त मंत्री ने कहा कि वो मौजूदा कर ढांचे में कोई बदलाव नहीं करने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बजट में प्रावधान किया गया है कि दिव्यांग जनों को पहले से मिलती आ रही ट्रांसपोर्ट अलाउंसेस मिलती रहेंगी। इसके अलावा मेडिकल रिइम्बरशमेंट का लाभ भी उन्हें मिलता रहेगा। यानी उनकी कुल आय पर 40,000 का स्टैन्डर्ड डिडक्शन लागू होगा। वित्त मंत्री ने पेंशनभोगियों को भी स्टैन्डर्ड डिडक्शन का लाभ देने का ऐलान किया है। इन्हें भी दिव्यांगजनों की तरह ट्रांसपोर्ट अलाउंसेस और मेडिकल रिइम्बरशमेंट का लाभ देने का ऐलान किया है। सरकार की इस पहल से करीब 2.5 करोड़ वेतनभोगियों और पेंशनभोगियों को लाभ मिलेगा जबकि सरकारी खजाने पर 8000 करोड़ रुपये का बोझ बढ़ेगा।

ई-असेसमेंट: वित्त मंत्री ने बजट भाषण में साल 2018 से टैक्स रिटर्न दाखिले और असेसमेंट को भी इलेक्ट्रॉनिक करने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि साल 2016 में ई-असेसमेंट की शुरुआत पायलट बेसिस पर की गई थी जिसे 2017 में बढ़ा कर 102 शहरों में लागू किया गया था। इससे मिले उत्साहजनक परिणामों से गदगद सरकार ने अब देशभर में ई-असेसमेंट लागू करने का फैसला किया है। इस प्रक्रिया से ना तो कर दाताओं को विभागों के चक्कर लगाने पड़ेंगें और ना ही मामले लंबित रखे जा सकेंगे। वित्त मंत्री ने आयकर अधिनियम की धाराओं में बदलाव करने का प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत सिर्फ इलेक्ट्रॉनिक मोड में ही इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल किए जा सकेंगे। जेटली ने कहा कि इससे व्यवस्था में गतिशीलता और पारदर्शिता आएगी।

बजट 2018 से जुड़ी सभी खबरें यहां पढ़ें

स्वास्थ्य एवं शिक्षा उपकर: वित्त मंत्री ने बजट में इनकम टैक्स और निगम करों पर एक फीसदी उपकर का बोझ थोपा है। यानी अब बढ़ाकर कुल चार फीसदी स्वास्थ्य एवं शिक्षा उपकर लगाने का प्रस्ताव रखा है। बजट भाषण में जेटली ने कहा मौजूदा तीन फीसदी उपकर में से दो फीसदी प्राथमिक शिक्षा के लिए वसूला जाता है जबकि एक फीसदी उपकर माध्यमिक और उच्च शिक्षा के लिए लिया जाता है। उन्होंने कहा कि देश के तमाम बीपीएल और ग्रामीण परिवारों की शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए एक फीसदी अतिरिक्त उपकर लगाने का प्रस्ताव किया जाता है। उन्होंने कहा कि मौजूदा तीन फीसदी उपकर की जगह अब चार फीसदी उपकर लिया जाएगा। इससे सरकारी खजाने को 11,000 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होगा।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App