Budget 2026 Impact on Stock Market: नए बजट के एलान के साथ ही रविवार को शेयर बाजार में अचानक तेज गिरावट देखने को मिली। निवेशकों को उम्मीद थी कि बजट से बाजार को सपोर्ट मिलेगा, लेकिन कुछ टैक्स से जुड़े फैसलों ने ट्रेडर्स और निवेशकों की धारणा बिगाड़ दी। खास तौर पर फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग पर टैक्स बढ़ाने और शेयर बायबैक पर नए टैक्स नियमों ने बाजार पर दबाव बनाया।

F&O ट्रेडिंग पर कितना बढ़ा टैक्स

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण में F&O ट्रेडिंग पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) बढ़ाने का एलान किया।

  • फ्यूचर्स ट्रेडिंग पर STT अब 0।02% से बढ़कर 0.05% हो गया है।
  • ऑप्शंस ट्रेडिंग पर STT बढ़ाकर 0.15% कर दिया गया है।

STT सरकार का लगाया वो टैक्स है, जो सिक्योरिटीज के हर ट्रांजैक्शन पर देना पड़ता है। जब यह टैक्स बढ़ता है, तो ट्रेडिंग की लागत भी सीधे बढ़ जाती है। इसका सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ता है जो रोजाना या बहुत ज्यादा मात्रा में ट्रेड करते हैं। ऐसे में मुनाफा कम हो जाता है और बाजार में खरीदारी की रफ्तार धीमी पड़ जाती है।

ऑप्शंस ट्रेडर्स पर सीधा असर

ऑप्शंस ट्रेडिंग पहले ही हाई रिस्क मानी जाती है। अब जब उस पर टैक्स ज्यादा देना होगा, तो हर सौदे पर मिलने वाला नेट प्रॉफिट घट जाएगा। इससे शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स के लिए ट्रेड करना महंगा हो गया है। साथ ही ज्यादा ट्रेडिंग करने वालों की कमाई पर सीधा असर पड़ेगा।

इसी वजह से बजट के बाद ऑप्शंस और फ्यूचर्स से जुड़े शेयरों में ज्यादा बिकवाली देखने को मिली।

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शेयर बायबैक पर टैक्स नियम बदले

बजट 2026 में एक और बड़ा बदलाव शेयर बायबैक से जुड़े टैक्स में किया गया। अब सभी तरह के शेयरधारकों के लिए बायबैक से मिलने वाली रकम को कैपिटल गेन (LTCG) मानकर उस पर टैक्स लगाया जाएगा। कॉरपोरेट प्रमोटर्स पर करीब 22% LTCG टैक्स लगेगा, जबकि नॉन-कॉरपोरेट प्रमोटर्स को करीब 30% टैक्स देना होगा।

पहले अलग-अलग कैटेगरी के निवेशकों के लिए नियम अलग थे, जिससे टैक्स प्लानिंग के रास्ते खुले रहते थे। अब यह रास्ता काफी हद तक बंद हो गया है। इसका असर उन कंपनियों पर भी पड़ेगा जो बायबैक के जरिए निवेशकों को रिटर्न देती थीं।

बाजार क्यों टूटा?

इन फैसलों से यह संकेत गया कि सरकार शॉर्ट टर्म ट्रेडिंग और टैक्स से बचने वाले रास्तों पर लगाम लगाना चाहती है। ट्रेडिंग महंगी होने से वॉल्यूम घटने की आशंका है। इससे फ्रीक्वेंट ट्रेडिंग करने वाले निवेशकों में अनिश्चितता बढ़ी और बिकवाली तेज हो गई।

हालांकि सरकार का कहना है कि ये कदम टैक्स सिस्टम को ज्यादा पारदर्शी बनाने और सट्टेबाजी कम करने के लिए हैं, लेकिन फिलहाल बाजार ने इसे नेगेटिव तरीके से लिया।

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वॉल्यूम के मामले में भारत का F&O मार्केट सबसे बड़ा

वॉल्यूम के मामले में भारत का फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) मार्केट दुनिया का सबसे बड़ा बाजार है, जिसमें नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने मार्च 2024 में 8,740 लाख करोड़ रुपये का मंथली टर्नओवर दर्ज किया, जो लगभग 1.1 ट्रिलियन डॉलर के बराबर है। जुलाई 2025 तक कुल डेली टर्नओवर 381 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जिसमें रिटेल इन्वेस्टर्स का बड़ा योगदान था, जो इंडेक्स ऑप्शंस का लगभग 41% हिस्सा हैं।

FY25 में भारत के 91% रिटेल इन्वेस्टर्स F&O सेगमेंट में पैसा गंवा रहे थे, जिसमें औसत नुकसान 1 लाख रुपये से ज़्यादा था। यही वजह है कि सरकार इस सेगमेंट को बढ़ावा देने के पक्ष में नहीं रही है।