रविवार को संसद में केंद्रीय बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री ने बायोफार्मा क्षेत्र पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि “बायोफार्मा शक्ति” का उद्देश्य भारत को विश्व का प्रमुख बायोफार्मा विनिर्माण केंद्र बनाना है। इसके तहत अगले पांच वर्षों में 10,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
इस योजना का मुख्य लक्ष्य बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर्स के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना और इसके लिए एक मजबूत इकोसिस्टम तैयार करना है। बायोफार्मा शक्ति के अंतर्गत तीन नए राष्ट्रीय औषध शिक्षा और अनुसंधान संस्थान स्थापित किए जाएंगे, जबकि सात मौजूदा संस्थानों को उन्नत किया जाएगा। इसके साथ ही 1,000 से अधिक मान्यता प्राप्त इंडिया क्लीनिकल ट्रायल साइट्स का नेटवर्क भी बनाया जाएगा, जिससे स्वास्थ्य सेवा में नवाचार और तकनीक का उपयोग बढ़ सके।
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वित्त मंत्री ने कहा कि ज्ञान, तकनीक और नवाचार के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार करना इस योजना की मुख्य रणनीति है। इससे न केवल भारत के नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि देश की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता भी मजबूत होगी।
केंद्रीय बजट 2026 में तीन महत्वपूर्ण कर्तव्यों पर भी ध्यान दिया गया। पहला, अस्थिर वैश्विक परिदृश्य में आर्थिक विकास को बनाए रखना और उसे तेज करना। दूसरा, आम लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करना और उनकी क्षमताओं को विकसित करके उन्हें भारत की समृद्धि में सक्रिय भागीदार बनाना। तीसरा, प्रत्येक परिवार, समुदाय, धर्म और क्षेत्र को संसाधनों, सुविधाओं और अवसरों तक समान पहुंच सुनिश्चित करना।
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इस प्रकार, बायोफार्मा शक्ति और बजट की नीतियां एक साथ भारत की आर्थिक मजबूती, स्वास्थ्य सुधार और सामाजिक समावेशिता को बढ़ाने की दिशा में काम करेंगी। यह पहल न केवल देश के बायोफार्मा उद्योग को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी, बल्कि आम नागरिकों की जीवन गुणवत्ता में भी सुधार लाएगी।
वित्त मंत्री ने जोर देकर कहा कि यह योजना भारत को वैश्विक बायोफार्मा उत्पादन का केंद्र बनाने और नवाचार के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा में सुधार लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
