Gold, Silver Prices । Budget 2026 Impact : सोने और चांदी की कीमतों में तेजी का दौर लगातार जारी है। शुक्रवार को भले ही इनकी कीमतों में कुछ करेक्शन नजर आया हो, लेकिन पिछले कुछ महीनों के दौरान इनके दाम लगातार नई ऊंचाइयां छूते रहे हैं। ऐसे में निवेशकों के मन में यह भी सवाल उठ रहे हैं कि आने वाले बजट का सोने और चांदी की कीमतों पर क्या असर पड़ सकता है? क्या सरकार इन पर लागू कस्टम ड्यूटी में कटौती करेगी? और अगर ऐसा हुआ तो क्या घरेलू बाजार में कीमतें सचमुच नीचे आएंगी? पिछले कुछ सालों के बजट फैसलों को देखें तो साफ होता है कि कस्टम ड्यूटी में बदलाव का असर सीधे तौर पर सोने-चांदी के दाम पर पड़ता है, लेकिन यह असर हमेशा लंबे समय तक टिके, ऐसा जरूरी नहीं होता।

कस्टम ड्यूटी क्यों अहम है

कस्टम ड्यूटी वह टैक्स है जो किसी देश में बाहर से आने वाले सामान पर लगाया जाता है। भारत में सोने और चांदी का घरेलू प्रोडक्शन काफी कम है, इसलिए ज्यादातर जरूरत इंपोर्ट यानी आयात से पूरी होती है। जब सरकार सोने या चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाती है तो उनकी लागत बढ़ जाती है और इसका सीधा असर गहनों और सिक्कों की कीमत पर पड़ता है। भारत में सोना सिर्फ निवेश का जरिया नहीं, बल्कि शादी-ब्याह और धार्मिक आयोजनों से भी जुड़ा हुआ है। इसलिए कीमतें बढ़ने का असर मांग पर भी पड़ता है।

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इंपोर्ट पर टिका है भारतीय बाजार

भारत की सोने की मांग काफी ज्यादा है। अक्टूबर 2025 में, दिवाली से पहले देश का गोल्ड इंपोर्ट 14.72 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। यह दिखाता है कि घरेलू मांग को पूरा करने के लिए इंपोर्ट कितना जरूरी है। ऐसे में अगर कस्टम ड्यूटी ज्यादा होगी तो सोना और चांदी दोनों महंगे होंगे और अगर ड्यूटी घटेगी तो कीमतों में कुछ राहत मिल सकती है। आसान शब्दों में कहा जाए तो ज्यादा टैक्स मतलब महंगा सोना और कम टैक्स मतलब कुछ सस्ता सोना।

पिछले पांच बजट में क्या बदला

2021 के बजट (Union Budget 2021) में सरकार ने सोने और चांदी पर बेसिक कस्टम ड्यूटी (BCD) 12.5 प्रतिशत से घटाकर 7.5 प्रतिशत कर दी थी। इसके साथ 2.5 प्रतिशत का एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस यानी AIDC लगाया गया। लेकिन कुल मिलाकर टैक्स का बोझ कम हुआ। इसका मकसद स्मगलिंग रोकना और आयात की लागत को कम करना था।

इसके बाद 2022 के बजट में सरकार ने सोने और चांदी की कस्टम ड्यूटी में कोई बदलाव नहीं किया। लेकिन अगले साल यानी 2023 के बजट में चांदी पर कस्टम ड्यूटी बढ़ा दी गई। सिल्वर बार पर बेसिक कस्टम ड्यूटी 7.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत की गई और सिल्वर पर AIDC को 5 प्रतिशत कर दिया गया। उस समय वित्त मंत्री ने कहा था कि चांदी पर लागू ड्यूटी को सोने और प्लैटिनम के बराबर लाने के लिए यह कदम उठाया गया है।

इसके बाद 2024 के बजट में सरकार ने स्मगलिंग रोकने के मकसद से सोने और चांदी पर कस्टम ड्यूटी घटाकर कुल 6 प्रतिशत कर दी, जिसमें 5 प्रतिशत BCD और 1 प्रतिशत AIDC शामिल था। पिछले साल यानी Budget 2025 में इस मोर्चे पर कोई बदलाव नहीं हुआ। हालांकि बाद में स्मगलिंग बढ़ने की खबरें सामने आईं।

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बजट 2026 से क्या है उम्मीद

अगर सरकार इस बजट में कस्टम ड्यूटी में कमी करती है तो घरेलू बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट आ सकती है। लेकिन यह गिरावट ज्यादा समय तक टिकेगी, इसकी गारंटी नहीं है। इसकी वजह यह है कि इनके दाम भारत की टैक्स पॉलिसी से अधिक अंतरराष्ट्रीय बाजार के रुझानों से तय होते हैं।

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सोने, चांदी में क्यों जारी है तेजी का सिलसिला

सोना और चांदी में बीच-बीच में आने वाले करेक्शन के बावजूद लंबी अवधि में तेजी का रुझान लगातार जारी है। 2025 में जियो-पोलिटकल टेंशन, ट्रेड वॉर की आशंका, बाजार में उतार-चढ़ाव और करेंसी में कमजोरी की वजह से इनकी कीमतें बढ़ीं। इस साल भी वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले, ग्रीनलैंड पर जारी बयानबाजी, यूरोपीय यूनियन के टैरिफ और ईरान और अमेरिका में बढ़ते टकराव से जुड़ी चिंताओं ने सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने-चांदी की मांग को मजबूत किया है।

इन हालात में अगर बजट 2026 में कस्टम ड्यूटी घटती है, तो इसका कीमतों पर तात्कालिक असर तो जरूर पड़ेगा, लेकिन यह असर लंबे समय तक बने रहने की उम्मीद नहीं की जा सकती। लंबी अवधि में सोने और चांदी की कीमतें इस बात पर ज्यादा निर्भर रहेंगी कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में हालात कैसे हैं।