केंद्रीय बजट 2026-27 में सरकार ने कस्टम्स टैरिफ में कई अहम बदलाव किए हैं। बजट का फोकस रणनीतिक विनिर्माण, स्वच्छ ऊर्जा, रक्षा, स्वास्थ्य और निर्यात को बढ़ावा देने पर है। कई जरूरी कच्चे माल और कैपिटल गुड्स पर बेसिक कस्टम ड्यूटी हटाई गई है। वहीं कुछ चुनिंदा उत्पादों पर ड्यूटी बढ़ाकर घरेलू उद्योगों को संरक्षण दिया गया है।

सितंबर 2035 तक कस्टम्स में रजिस्टर्ड सभी परमाणु परियोजनाओं के लिए न्यूक्लियर जनरेशन इक्विपमेंट, एब्जॉर्बर रॉड्स और प्रोजेक्ट इंपोर्ट्स को ड्यूटी-फ्री कर दिया गया है। एविएशन सेक्टर में रक्षा मंत्रालय के अधीन सार्वजनिक उपक्रमों द्वारा आयात किए जाने वाले एयरक्राफ्ट पार्ट्स, इंजन और MRO इनपुट्स पर भी कस्टम ड्यूटी हटाई गई है।

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न्यूक्लियर और एविएशन सेक्टर को बड़ी राहत

बजट में परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के लिए लंबी अवधि की स्पष्टता दी गई है। सितंबर 2035 तक कस्टम्स में रजिस्टर्ड सभी न्यूक्लियर प्रोजेक्ट्स के लिए न्यूक्लियर जनरेशन इक्विपमेंट, एब्जॉर्बर रॉड्स और प्रोजेक्ट इंपोर्ट्स पर कस्टम ड्यूटी शून्य कर दी गई है। एविएशन सेक्टर में रक्षा मंत्रालय के अधीन सार्वजनिक उपक्रमों द्वारा आयात किए जाने वाले एयरक्राफ्ट पार्ट्स, इंजन और MRO से जुड़े कच्चे माल पर भी ड्यूटी हटा दी गई है।

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क्लीन एनर्जी और इलेक्ट्रॉनिक्स पर फोकस

स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए सोलर ग्लास में इस्तेमाल होने वाले सोडियम एंटीमोनेट और लिथियम-आयन बैटरी सेल निर्माण में लगने वाले कैपिटल गुड्स को ड्यूटी-फ्री किया गया है। इसके अलावा क्रिटिकल मिनरल मोनाजाइट पर भी कस्टम ड्यूटी समाप्त कर दी गई है। इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में माइक्रोवेव ओवन और वीडियो गेम कंसोल के इनपुट्स को ड्यूटी से छूट दी गई है जिससे घरेलू वैल्यू एडिशन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

हेल्थकेयर सेक्टर को राहत

बजट में 17 अतिरिक्त दवाओं, सात दुर्लभ बीमारियों से जुड़ी दवाओं और डायग्नॉस्टिक उपकरणों में इस्तेमाल होने वाले X-ray ट्यूब्स और फ्लैट पैनल डिटेक्टर्स पर कस्टम ड्यूटी शून्य कर दी गई है।

कुछ उत्पादों पर ड्यूटी बढ़ी

सरकार ने पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड पर बेसिक कस्टम ड्यूटी को शून्य से बढ़ाकर 7.5% कर दिया है। वहीं छतरियों (गार्डन अंब्रेला को छोड़कर) पर ड्यूटी को 20% या 60 रुपये प्रति पीस (जो भी ज्यादा हो) कर दिया गया है। इसके साथ ही छतरी के पार्ट्स और एक्सेसरीज पर ड्यूटी 11% से बढ़ाकर 20% या 25 रुपये प्रति किलो कर दी गई है।

SEZ और निर्यात को समर्थन

SEZ में स्वदेशी इनपुट से बने कैस्टर ऑयल केक को घरेलू बाजार में बेचने पर छूट या रियायती ड्यूटी दी जाएगी। सीफूड प्रोसेसिंग के लिए ड्यूटी-फ्री इनपुट सीमा 1% से बढ़ाकर 3% कर दी गई है। फुटवियर सेक्टर में शू अपर को भी ड्यूटी-फ्री इनपुट में शामिल किया गया है। गारमेंट्स और फुटवियर के लिए एडवांस ऑथराइजेशन स्कीम के तहत एक्सपोर्ट ऑब्लिगेशन की अवधि 6 महीने से बढ़ाकर 12 महीने कर दी गई है।

कूरियर एक्सपोर्ट की सीमा हटाई गई

बजट में कूरियर एक्सपोर्ट पर 10 लाख रुपये प्रति कंसाइनमेंट की सीमा समाप्त कर दी गई है जिससे MSMEs, कारीगरों और ई-कॉमर्स विक्रेताओं को राहत मिलने की उम्मीद है।

कुल मिलाकर बजट 2026-27 में कस्टम्स टैरिफ के जरिए सरकार ने रणनीतिक और निर्यात-उन्मुख सेक्टरों की लागत घटाने और घरेलू उद्योगों को चुनिंदा संरक्षण देने की नीति अपनाई है।

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा, “Union Budget 2026-27 बड़े टैरिफ कट्स की बजाय रणनीतिक सेक्टरों, क्लीन एनर्जी, रक्षा, हेल्थकेयर और निर्यात को सस्ता और प्रतिस्पर्धी बनाने पर केंद्रित है। कुछ उपभोक्ता वस्तुओं पर चयनात्मक संरक्षण के साथ सरकार ने संतुलित रुख अपनाया है।”

बजट में कूरियर एक्सपोर्ट पर 10 लाख रुपये प्रति कंसाइनमेंट की सीमा खत्म कर दी गई है जिससे MSMEs, कारीगरों और ई-कॉमर्स विक्रेताओं को राहत मिलने की उम्मीद है। कुल मिलाकर, बजट 2026-27 में कस्टम्स टैरिफ के जरिए सरकार ने रणनीतिक और एक्सपोर्ट लीड सेक्टरों की लागत घटाने और घरेलू उद्योगों को संरक्षण देने की नीति अपनाई है।