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Budget 2019: ‘कुछ तो गुल खिलाए हैं, कुछ अभी खिलाने हैं’, जब बजट पेश करते वित्त मंत्रियों का शायराना हुआ मिजाज

Budget 2019 Highlights in Hindi: हालांकि बजट स्पीच के दौरान कई बार वित्त मंत्रियों अपने भाषण को मजेदार बनाने की कोशिश भी की। इसके लिए कुछ ने शायराना अंदाज अपनाया तो कुछ ने मशहूर कोट्स का इस्तेमाल।

Union Budget 2019-20 India: फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस

Start Body Content With: Union Budget 2019-20 India: संसद में बजट का भाषण अमूमन आम लोगों को कम दिलचस्प लगता है। लोगों को बजट पेश होने वाले दिन इस बात पर ज्यादा ध्यान रहता है कि सरकार इस बार उनके लिए क्या करने वाली है। लोग इस बात पर टकटकी लगाए रहते हैं कि इस बजट से उन्हें कितनी राहत मिल रही है या फिर उनके जेब पर कितना भार पड़ेगा। हालांकि बजट स्पीच के दौरान कई बार वित्त मंत्रियों अपने भाषण को मजेदार बनाने की कोशिश भी की। इसके लिए कुछ ने शायराना अंदाज अपनाया तो कुछ ने मशहूर कोट्स का इस्तेमाल। बेहद कम बोलने के तौर पर प्रचलित पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी बजट पेश करने के दौरान अपने शायराना अंदाज सो लोगों को चौंका चुके हैं। सिर्फ मनमोहन सिंह ही नहीं देश के दूसरे वित्त मंत्रियों ने भी अपने बजट स्पीच को मनोरंजक बनाने के लिए शेर-ओ-शायरी का भरपूर इस्तेमाल किया।

1. अरुण जेटली: (2016-2017)
तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पुरानी सरकार पर हमला बोलते हुए अपने बजट से अर्थव्यवस्था की हालात सुधारने की बात करते हुए उर्दू शायरी पढ़ी थी-

‘कश्ती चलाने वालों ने जब हार कर दी पतवार हमें,
लहर लहर तूफान मिले और मौज-मौज मझधार हमें
फिर भी दिखाया है हमने, और फिर ये दिखा देंगे सबको,
इन हालातों में आता है दरिया करना पार हमें.’

2. पी चिदम्बरम: (2013-2014)
तब यूपीए के वित्त मंत्री पी चिदम्बरम ने तमिल के मशहूर दोहों से अपनी योजनाओं के बारे में सदन को बताया था।

‘कलंगथु कंदा विनाइक्कन थुलंगकथु थुक्कंग कडिंथु सेयल’।

3. मनमोहन सिंह: (1990-1991)
कहा जाता है कि 1990-1991 में मनमोहन सिंह ने बेहद शानदार बजट पेश किया था। भारतीय अर्थव्यवस्था को एक नई उंचाई देने का श्रेय भी लोग अकसर तत्कालीन वित्त मंत्री मनमोहन सिंह को दिया जाता है। अपने तब के बजट स्पीच में मनमोहन सिंह ने अल्लामा इकबाल की शायरी का इस्तेमाल किया था।

‘यूनान-ओ-मिस्र-ओ-रोम सब मिट गए जहां से, अब तक मगर बाकी है नामों निशां हमारा’

4. प्रणब मुखर्जी: (2012-2013)
वित्त मंत्री के तौर पर अपना अंतिम बजट पेश करते हुए प्रणब मुखर्जी ने डेनमार्क के प्रिंस हैमलेट को कोट करते हुए हुए अच्छी अर्थव्यवस्था के लिए कठोर कदम उठाने की बात कही थी।

तब प्रणब मुखर्जी ने कहा था- “I must be cruel only to be kind.”

5. अरुण जेटली: (2015-2016)
तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पुरानी सरकार पर हमला बोलते हुए ये शायरी पढ़ी थी-

‘कुछ तो गुल खिलाए हैं, कुछ अभी खिलाने हैं..पर बाग में अब भी कुछ कांटे पुराने हैं’

6. यशवंत सिन्हा: (2001-2002)
अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में वित्त मंत्री रहते हुए यशवंत सिन्हा ने अपने तब के बजट को दूसरे दौर का बजट बताया था। अपनी बात को प्रभावी तरीके से रखते हुए उन्होंने सदन मेंतब ये शायरी पढ़ी थी-

‘तकाजा वक्त का के तूफान से जूझो, कहां तक चलोगे किनारे-किनारे’

 

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