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आत्मनिर्भर भारत अभियान से सरकारी कंपनी BSNL को क्यों लग रहा है झटका? जानें क्या है पूरा मामला

कंपनी ने कहा था कि स्थानीय कंपनियों को पहले अपने रेडी-टू-यूज प्रोडक्ट्स का प्रदर्शन करना चाहिए। तथ्य यह है कि भारतीय वेंडर चीनी कंपनियों के मुकाबले ज्यादा कीमत मांग रहे हैं।

bsnlजानें, आत्मनिर्भर भारत अभियान से क्यों बीएसएनएल को लग रहा है झटका

केंद्र सरकार के थिंक टैंक नीति आयोग की सलाह पर सरकारी दूरसंचार कंपनी बीएसएनएल ने जुलाई में 4जी नेटवर्क के अपने टेंडर को रद्द कर दिया था। इसकी वजह यह थी कि कंपनी नहीं चाहती थी कि चीनी कंपनियां इस बोली में हिस्सा लें। इस बोली में Huawei और ZTE जैसी चीनी कंपनियों के हिस्सा लेने की आशंका थी। अब नए टेंडर जारी किए गए हैं, लेकिन चीनी कंपनियों के मुकाबले भारतीय फर्मों ने 89 फीसदी से ज्यादा कीमत लगाई है। इसे लेकर बीएसएनएल ने टेलिकॉम डिपार्टमेंट से चिंता जताई है और कहा है कि पहले से ही घाटे में चल रही कंपनी के लिए यह मुश्किलों को बढ़ाने वाला होगा।

दरअसल जून में नीति आयोग ने एक मीटिंग बुलाई थी, जिसमें घरेलू ओरिजिनल इक्विपमेंट मेकर्स कंपनियां, बीएसएनएल और दूरसंचार विभाग के अधिकारी शामिल थे। इस मीटिंग में स्वदेशी उपकरणों की मदद से ही 4जी नेटवर्क तैयार करने पर विचार किया गया था। बीएसएनएल के मैनेजमेंट ने भारतीय उपकरणों के इस्तेमाल पर सहमति जताई थी, लेकिन यह भी कहा था कि कंपनी के पास प्रयोग के लिए पैसे नहीं हैं।

कंपनी ने कहा था कि स्थानीय कंपनियों को पहले अपने रेडी-टू-यूज प्रोडक्ट्स का प्रदर्शन करना चाहिए। तथ्य यह है कि भारतीय वेंडर चीनी कंपनियों के मुकाबले ज्यादा कीमत मांग रहे हैं। दरअसल इन कंपनियों को सरकार के आत्मनिर्भर भारत अभियान से भी आगे निकलते हुए अपने स्तर पर प्रयास करने की जरूरत है। प्रतिस्पर्धी माहौल में काम किए बिना और लागत को कम करने पर जोर दिए बगैर बीएसएनएल को सफलता नहीं मिल सकती।

दरअसल बीएसएनएल की ओर से टेंडर कैंसल किए जाने के बाद से घरेलू कंपनियों को लगता है कि सरकार की मदद से वह भारतीय बाजार में जगह बनने में कामयाब हो सकेंगी। हालांकि ऐसा होता भी है तो उनकी यह सफलता स्थायी नहीं होगी। इसकी वजह यह है कि ये कंपनियां चीनी कंपनियों के मुकाबले 90 फीसदी ज्यादा कीमत की मांग कर रही हैं। ऐसे में इस कीमत पर उपकरणों की खरीद करना बीएसएनएल के लिए संभव नहीं होगा। बीएसएनएल ने 4जी तकनीक में पहले ही देर से एंट्री की है और अब महंगे उपकरणों की खरीद के चलते उसके लिए मार्केट में बने रहना और मुश्किल हो जाएगा। इसके अलावा फायदा कमा पाना भी उसके लिए संभव नहीं होगा।

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