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ब्रिटानिया ने दिल्ली हाई कोर्ट से कहा, एकल जज की पीठ के आदेश से हो रहा नुकसान

एकल न्यायाधीश की पीठ ने कंपनी पर न्यूट्री चॉइस डाइजेस्टिव जीरो बिस्कुट की पैकेजिंग के इस्तेमाल पर रोक लगाई थी।

Author नई दिल्ली | Published on: September 9, 2016 7:28 PM
दिल्ली उच्च न्यायालय (फाइल फोटो)

ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज लि. ने शुक्रवार (9 सितंबर) को उच्च न्यायालय से कहा कि एकल न्यायाधीश के आदेश से उसे व्यावसायिक नुकसान हो रहा है। एकल न्यायाधीश की पीठ ने कंपनी पर न्यूट्री चॉइस डाइजेस्टिव जीरो बिस्कुट की पैकेजिंग के इस्तेमाल पर रोक लगाई थी। ब्रिटानिया की ओर से पेश वकील ने न्यायमूर्ति बी डी अहमद और न्यायमूर्ति आशुतोष कुमार की पीठ से कहा कि उनका कारोबार इस आदेश से प्रभावित हो रहा है क्योंकि इसकी वजह से इस उत्पाद का विनिर्माण रोक दिया गया है। ब्रिटानिया ने छह सितंबर के एकल पीठ के आदेश को चुनौती दी है। छह सितंबर को अदालत ने अपने आदेश में ब्रिटानिया के न्यूट्री चॉइस डाइजेस्टिव जीरो बिस्कुट के रैपर के इसके मौजूदा रूप में इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी क्योंकि इसकी पैकिंग आईटीसी के सनफीस्ट फार्मलाइट डाइजेस्टिव ऑल गुड बिस्कुट से मिलती जुलती है।

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ताओं सी ए सुंदरम तथा सुधीर चंद्रा ने कहा कि एकल जज का आदेश ‘गलत’ है क्योंकि इसमें इस तथ्य पर विचार नहीं किया गया है कि यह पैकेजिंग आईटीसी से भिन्न है। वहीं आईटीसी की ओर से उपस्थित वरिष्ठ अधिवक्ताओं राजीव नायर, संदीप सेठी तथा प्रतिभा एम सिंह ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि न केवल उन्होंने समान पैकेजिंग अपनाई है बल्कि पैकेट पर लाइनें भी मिलती जुलती है। पीठ ने इस आदेश के निपटान के लिए 15 सितंबर की तारीख तय करते हुए कहा, ‘‘आप अपने उत्पाद की गुणवत्ता पर जीतेंगे या हारेंगे, उसके गेटअप या पैकेजिंग पर नहीं।’

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