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गोपनीय ब्योरे जाहिर करने पर विरोध जताया ब्रिटेन ने

राजनयिक माध्यमों से गोपनीय बैंक खातों और ब्योरों की जानकारी मिलने के बाद इनके सार्वजनिक होने पर ब्रिटेन ने विरोध जताया है। उसने वित्त मंत्रालय के समक्ष शिकायत दर्ज कराते हुए...

Author April 18, 2015 11:56 AM

राजनयिक माध्यमों से गोपनीय बैंक खातों और ब्योरों की जानकारी मिलने के बाद इनके सार्वजनिक होने पर ब्रिटेन ने विरोध जताया है। उसने वित्त मंत्रालय के समक्ष शिकायत दर्ज कराते हुए कहा है कि गोपनीय डाटा और बैंकिंग ब्योरे को सामने लाना करार का उल्लंघन है। इससे पहले जर्मनी ने भी इस मामले में भारत सरकार से विरोध जताया था। सूत्रों के अनुसार, ब्रिटेन ने औपचारिक तौर पर शिकायत दर्ज कराकर इसकी वजह पूछी है।

इससे पहले जर्मन अधिकारियों ने भारत सरकार से पूछा था कि नियमों की अवहेलना कर क्यों बैंक खातों-डाटा का खुलासा किया गया। दरअसल भारत ने एलजीटी बैंक के जिन 18 खाताधारकों के नामों का खुलासा किया था, उस पर जर्मन अधिकारियों को एतराज था। ये खाते लिस्टेनस्टेन के बैंक में थे। इनका खुलासा पहले सुप्रीम कोर्ट के सामने किया गया। फिर इन्हें सार्वजनिक कर दिया गया। उधर ब्रिटेन के अधिकारियों ने पिछले माह एक सेवानिवृत्त भारतीय नौ सेना अधिकारी द्वारा किए गए लेनदेन के विवरण को सरेआम करने पर नाराजगी जताई थी।

सूत्रों के अनुसार, दोनों ही मामलों में ये सूचनाएं दोहरे एवाइडेंस करारों के आधार पर प्राप्त की गई थीं। इस मामले में भारत ने जो करार किया था, उसके अनुसार अघोषित संपत्ति और कर संग्रह के लिए इन सूचनाओं को साझा किया जा सकता है। लेकिन भारत ने इसका उल्लंघन कर ये सूचनाएं लोगों के बीच जाहिर कीं।

वित्त मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, अब जर्मनी और ब्रिटेन के साथ सूचनाओं के आदान-प्रदान की प्रक्रिया ढीली पड़ गई है। एक अधिकारी ने बताया कि यह चिंता की बात है। ब्रिटेन से भारत को कई मामलों में जानकारी प्राप्त करनी है, लेकिन इस देश के रुख से नई समस्या आ खड़ी हुई है। अब हम दोनों देशों को यह समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि सूचनाओं को सार्वजनिक हमारी ओर से नहीं किया गया है। वास्तव में ये खबरें मीडिया के जरिए आई थीं जिसे लेकर भी दोनों देशों को एतराज है।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ब्रिटेन के अधिकारी मीडिया के जरिए आई इन खबरों को लेकर नाराज हैं कि कि किस तरह आयकर अधिकारियों ने 2.4 मिलियन पौंड के हुए भुगतान की जानकारी ली। यह भुगतान रिटायर्ड एडमिरल को ब्रिटेन में स्थित रक्षा कंपनी की ओर से किया गया था। सूत्रों का कहना है कि यह पैसा जर्सी के द्वीप से भेजा गया।

इन सूचनाओं को प्राप्त करने के बाद सबसे पहले आयकर अधिकारियों ने छापे मारे,उसके बाद रिटायर्ड अधिकारी से डाटा लेने के लिए दबाव डाला। इसके बाद इस अधिकारी के अन्य गोपनीय खातों का पता लगाया गया और इन्हें सार्वजनिक किया गया।

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