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ब्रेक्जिट की मार से बाजार धराशायी, सेंसेक्स 605 अंक लुढ़का

विश्लेषकों ने कहा है कि ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से बाहर निकलने का मतलब होगा कि ईयू मंदी में जा सकता है

Author मुंबई | June 24, 2016 7:48 PM
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 71 पैसे टूटकर 67.96 पर बंद हुआ। चार महीने में रुपए का न्यूनतम स्तर है।

ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से बाहर होने के निर्णय यानी ब्रेक्जिट से शेयर बाजार तथा रुपया शुक्रवार (24 जून) को गोता लगा गया। जहां सेंसेक्स शुरुआती कारोबार 1,090 अंक लुढ़क गया वहीं ड\लर के मुकाबले रुपया 96 पैसे टूट गया। हालांकि बाद में घरेलू संस्थानों की लिवाली तथा नीति निर्माताओं के बयानों से स्थिति थोड़ी संभली। इसके बावजूद बंबई शेयर बाजार का सेंसेक्स 605 अंक की गिरावट के साथ बंद हुआ। चार महीने में किसी एक दिन में यह सबसे बड़ी गिरावट है। वहीं अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 71 पैसे टूटकर 67.96 पर बंद हुआ। चार महीने में रुपए का न्यूनतम स्तर है।

भारतीय शेयर बाजार में आई गिरावट के परिणामस्वरूप निवेशकों की कुल संपत्ति में करीब 1.79 लाख करोड़ रुपए की कमी आयी। घरेलू बाजार में सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में करीब 1,100 अंक नीचे चला गया था लेकिन बाद में कुछ लिवाली तथा वित्त मंत्री अरुण जेटली एवं रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन समेत प्रमुख नीति निर्माताओं के बयानों का बाजार पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा और गिरावट थम गई तथा बाजार में कुछ सुधार हुआ। वहीं सोना फिर से सुरक्षित निवेश के रूप में उभरा और इसमें जोरदार तेजी आयी।

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सेंट्रम डायरेक्ट के वरिष्ठ उपाध्यक्ष तथा ट्रेजरी एवं बैंक नोट कारोबार के प्रमुख हरिप्रसाद एमपी ने कहा, ‘ब्रिटेन का यूरोपीय संघ से बाहर होने का निर्णय बाजार के लिए झटके रूप में आया क्योंकि वह (बाजार) मानकर चल रहा था कि ब्रिटेन ईयू के साथ बना रहेगा। इसकी खबर आते हैं कि वैश्विक बाजारों में अफरा-तफरी देखी गयी। हालांकि अंतिम घंटे के कारोबार में स्थिति कुछ सामान्य होती दिखी।’ ब्रिटेन में 28 सदस्यीय यूरोपीय संघ से बाहर निकलने को लेकर हुए जनमतसंग्रह में 51.9 प्रतिशत मत पक्ष में डाले गये। इसके बाद प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने इस्तीफे की घोषणा की।

वैश्विक बाजारों में जापान का निक्की 7.92 प्रतिशत जबकि हांगकांग का हैंगसेंग 2.92 प्रतिशत लुढ़क गया। यूरोपीय शेयर बाजारों में गिरावट का रुख रहा। लंदन स्टाक एक्सचेंज का एफटीएसई सूचकांक एक समय 9.0 प्रतिशत लुढ़क गया था। डॉलर के मुकाबले पाउंड 10 प्रतिशत लुढ़ककर 31 वर्ष के न्यूनतम स्तर पर आ गया। रुपए के मामले में ब्रिटिश मुद्रा करीब सात रुपए गिरकर 93.13 पर आ गयी। तीस शेयरों वाला सूचकांक गिरावट के साथ 26,367.48 पर खुला और इसमें लगातार गिरावट दर्ज की गयी तथा एक समय 26,000 अंक के नीचे 25,911.33 अंक के निम्न स्तर पर पहुंच गया। हालांकि, बाद में कुछ लिवाली से इसमें सुधार आया और यह 604.51 अंक या 2.24 प्रतिशत की गिरावट के साथ 26,397.71 अंक पर बंद हुआ। 11 फरवरी के बाद सूचकांक का यह सबसे न्यूनतम स्तर है।

पचास शेयरों वाला एनएसई निफ्टी भी एक समय 8,000 अंक के नीचे 7,927.05 अंक पर चला गया लेकिन बाद में यह 181.85 अंक या 2.20 प्रतिशत के नुकसान के साथ 8,088.60 अंक पर बंद हुआ। टाटा समूह की कंपनियों के शेयरों में सर्वाधिक गिरावट दर्ज की गई। इसमें 8.0 प्रतिशत तक की गिरावट आई। इसका कारण क्षेत्र में समूह का बड़े पैमाने पर निवेश है। टाटा समूह की प्रमुख कंपनियों में टाटा मोटर्स (7.99 प्रतिशत), टाटा स्टील (6.37 प्रतिशत) तथा टीसीएस (2.78 प्रतिशत) नीचे आए। सेंसेक्स के 30 शेयरों में से टाटा मोटर्स तथा टाटा स्टील का प्रदर्शन सबसे खराब रहा।

विश्लेषकों ने कहा है कि ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से बाहर निकलने का मतलब होगा कि ईयू मंदी में जा सकता है जबकि भारतीय कंपनियों को भी यूरोपीय परिचालन के लिए ब्रिटेन को ‘गेटवे’ के रूप में उपयोग के संदर्भ में अपनी रणनीति फिर से बनानी होगी। इसी प्रकार, मदरसन सूमी सबसे अधिक प्रभावित हुई। कंपनी का शेयर 8.48 प्रतिशत नीचे आया। वहीं हिंडाल्को का शेयर 5.17 प्रतिशत, डा. रेड्डीज लैब 0.64 प्रतिशत तथा भारत फोर्ज 0.35 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गयी। आईटी कंपनियों में टेक महिंद्रा 4.74 प्रतिशत, विप्रो 1.52 प्रतिशत तथा इंफोसिस में 1.41 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गयी। गिरावट इतनी व्यापक थी कि सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 23 नुकसान में रहे। इसमें टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, एलएंडटी, आईसीआईसीआई बैंक, ओएनजीसी, आरआईएल, एक्सिस बैंक, एसबीआई, टीसीएस तथा अदाणी पोर्ट्स 7.99 प्रतिशत तक नीचे आए। हालांकि बजाज आटो 1.05 प्रतिशत, एशियन पेंट्स 0.48 प्रतिशत, गेल 0.33 प्रतिशत, सन फार्मा 0.27 प्रतिशत तथा महिंद्रा एंड महिंद्रा में 0.19 प्रतिशत की तेजी रही।

बीएसई का स्मॉल कैप तथा मिड कैप सूचकांक भी क्रमश: 1.46 प्रतिशत तथा 1.07 प्रतिशत नीचे आ गए। वहीं जिंस बाजार में सोना 1,215 रुपए उछलकर 30,885 के स्तर पर पहुंच गया जो 26 महीने का उच्च स्तर है। अगस्त, 2013 के बाद किसी एक दिन में यह सर्वाधिक तेजी है। इससे पहले 28 अप्रैल, 2014 को सोना 30,730 रुपए के रिकॉर्ड स्तर पर बंद हुआ था। वैश्विक प्रवृत्ति के अनुरूप चांदी भी 1,000 रुपए की तेजी के साथ 42,300 रुपए प्रति किलो पर पहुंच गई। जियोजित बीएनपी परिबा के उपाध्यक्ष गौरंग शाह ने कहा, ‘हमारा अल्पकालिक उतार-चढ़ाव का अनुमान है। ब्रिटेन में होने वाली गतिविधियों का निश्चित रूप से अल्पकाल से मध्यम अवधि में वैश्विक बाजारों पर प्रभाव पड़ेगा। हालांकि भारतीय बाजार के लिए दीर्घकालीन स्तर पर सकारात्मक परिदृश्य है जिसका कारण मजबूत वृहत आर्थिक बुनियाद है।’

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