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ब्रेक्जिट के झटके के बाद सरकार, रिजर्व बैंक निवेशकों को शांत करने में जुटे

जेटली ने कहा कि भारत ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से बाहर निकलने (ब्रेक्जिट) के अल्पकालिक और मध्यम अवधि के परिणामों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।

Author नई दिल्ली | June 24, 2016 8:25 PM
शुक्रवार (24 जून) को स्टॉक की कीमत गिरने के बाद कोलकाता में शेयर ब्रोकर अपनी प्रतिक्रिया में कम्प्यूटर स्क्रीन पर नजर टिकाए हुए। (PTI Photo)

ब्रेक्जिट के बाद बाजारों को शांत करने का प्रयास करते हुए सरकार और रिजर्व बैंक ने कहा कि भारत की मजबूत वृहद आर्थिक बुनियाद तथा योजनागत बुनियादी सुधारों और सुरक्षा की मजबूत दीवार के जरिये वह ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से बाहर निकलने झटकों को झेल पाने में सक्षम है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि भारत ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से बाहर निकलने (ब्रेक्जिट) के अल्पकालिक और मध्यम अवधि के परिणामों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि वित्तीय बाजारों पर इसका प्रभाव कुछ दिन से अधिक नहीं रहेगा। उन्होंने तेजी से वृद्धि आधारित सुधार एजेंडा को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई। इसमें वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) विधेयक को पारित करना भी शामिल है।

वहीं रिजर्व बैंक गवर्नर रघुराम राजन ने तरलता उपलब्ध कराने तथा बाजार में किसी असामान्य व्यवहार को दुरुस्त करने का वादा किया।
राजन ने कहा कि निवेशकों की शुरुआती चिंता के बाद निवेश लौटेगा। उन्होंने डॉलर और रुपए में तरलता डॉलने की प्रतिबद्धता जताई।
आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकान्त दास ने भारत की घरेलू बुनियाद का हवाला देते हुए कहा कि यही वजह है कि हमारे ऊपर ब्रेक्जिट का दीर्घावधि का असर नहीं होगा। उन्होंने कहा कि सरकार और रिजर्व बैंक पिछले कई सप्ताह से संभावित प्रभावों को लेकर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विदेशी मुद्रा भंडार की संतोषजनक स्थिति, मुद्रास्फीति के नीचे आने तथा बुनियादी सुधारों पर आगे बढ़ने की वजह से भारत इन सब झटकों को झेल जाएगा। दास ने कहा कि सरकार सभी झटकों के लिए तैयार है।

राजन ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत है। लघु अवधि का विदेशी कर्ज निचले स्तर पर है और विदेशी मुद्रा भंडार की स्थिति संतोषजनक है। उन्होंने कहा कि आने दिनों में इन कारकों से देश अच्छी स्थिति में होगा। ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से बाहर निकलने के फैसले के बाद अन्य वैश्विक बाजारों की तर्ज पर बंबई शेयर बाजार का सेंसेक्स भी करीब 1,100 अंक टूट गया था। हालांकि, बाद में यह कुछ सुधार के साथ 606 अंक के नुकसान से 26,397.71 अंक पर आ गया। वहीं रुपया टूटकर 68 प्रति डॉलर के निचले स्तर पर चला गया।

चीन की पांच दिन की यात्रा पर गए जेटली ने कहा कि ब्रेक्जिट का भारत पर मामूली असर होगा। यह कुछ दिन से अधिक नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि अब हमें दो यूरोपीय संघों, ईयू तथा ब्रिटेन के साथ काम करना होगा। मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम ने कहा कि इस घटनाक्रम में कुछ अच्छी चीजें भी हैं। मसलन तेल कीमतें नीचे आई हैं और अमेरिका में ब्याज दरों में बढ़ोतरी में देरी होगी। बाजार में आए तूफान के बीच सभी सूचीबद्ध शेयरों का बाजार पूंजीकरण 1.79 लाख करोड़ रुपए घट गया। वित्त राज्यमंत्री जयंत सिन्हा ने कहा कि हम लघु अवधि के झटकों से निपटने के लिए तैयार रहना है। हम लगातार इस बात पर जोर देंगे कि हम एक मुक्त बाजार अर्थव्यवस्था हैं। बाजार अपना स्तर खुद पा लेगा। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हम बाजार को समायोजन का अवसर देंगे।

जेटली ने कहा कि जनमत संग्रह के नतीजों से वैश्विक बाजारों का उतार-चढ़ाव बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि दुनियाभर के देशों को संभावित लघु अवधि के संकट से निपटने को तैयार रहना होगा और मध्य अवधि के प्रभावों के प्रति निगाह रखनी होगी। राजन ने कहा कि वह प्रतिस्पर्धी लाभ लेने के लिए राष्ट्रों द्वारा मुद्रा में हस्तक्षेप करने को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने केंद्रीय बैंकों से कहा कि वे मुद्रा का अवमूल्यन करने से बचें।

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