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निजीकरण के खिलाफ BPCL कर्मचारियों की हड़ताल, कंपनी के प्राइवेट होने पर सेवानिवृत्ति लाभ न मिलने का डर

कर्मचारियों की आरोप है कि सरकार ने जून 2020 के बाद कंपनी मैनेजमेंट को 10 साल के कॉन्ट्रैक्ट सेवा की समीक्षा करने का अधिकार दिया है। इसकी मदद से जो भी प्राइवेट मैनेजमेंट कंपनी को अपने अधिकार में लेगा, वह श्रमिकों के सेवा की शर्तों में संशोधन करेगा।

bpcl privatisationभारत पेट्रोलियम के निजीकरण के खिलाफ उतरे कर्मचारी (फाइल फोटो)

सरकारी तेल कंपनी भारत पेट्रोलियम के निजीकरण का कर्मचारियों की ओर से विरोध होना शुरू हो गया है। कंपनी की 15 यूनियनों से जुड़े करीब 4,800 कर्मचारियों ने 48 घंटे की हड़ताल का आयोजन किया है। कंपनी के ये कर्मचारी मुंबई और कोच्चि स्थित रिफाइनरियों से जुड़े हैं, जो सोमवार और मंगलवार को हड़ताल पर चले गए थे। इस हड़ताल के चलते कंपनी के एलपीजी प्लांट और मार्केटिंग डिपो भी बंद करने पड़े थे। कर्मचारियों की आरोप है कि सरकार ने जून 2020 के बाद कंपनी मैनेजमेंट को 10 साल के कॉन्ट्रैक्ट सेवा की समीक्षा करने का अधिकार दिया है। इसकी मदद से जो भी प्राइवेट मैनेजमेंट कंपनी को अपने अधिकार में लेगा, वह श्रमिकों के सेवा की शर्तों में संशोधन करेगा। उन्होंने कहा कि उन्हें यह भी डर है कि अगर कंपनी प्राइवेट हाथों में जाती है तो उन्हें सेवानिवृत्ति लाभ और ग्रेच्युटी भी नहीं मिलेंगे।

विनिवेश विभाग द्वारा जारी निजीकरण नियमों के अनुसार, बीपीसीएल में लगभग 53 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाली सरकार, विनिवेश के बाद में कर्मचारियों के संरक्षण और व्यवसायिक निरंतरता पर मार्गदर्शन प्रदान करेगी। तेल शोधन और मार्केटिंग कंपनी के वर्तमान बाजार पूंजीकरण में सरकारी हिस्सेदारी का मूल्य लगभग 50,000 करोड़ रुपये है। कोरोना महामारी के कारण BPCL के विनिवेश की प्रक्रिया में कई बार देरी हो चुकी है। इस वित्तीय वर्ष के लिए सरकार के 2.1 लाख करोड़ रुपये के विनिवेश लक्ष्य को पूरा करना महत्वपूर्ण है। कुल मिलाकर, सरकार 2020-21 में केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र की दो दर्जन कंपनियों में अपना हिस्सा बेचना चाहती है।

कई कंपनियों में 51 पर्सेंट से कम होगी सरकारी हिस्सेदारी: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नवंबर 2019 में बीपीसीएल, एयर इंडिया, शिपिंग कॉर्प ऑफ इंडिया (एससीआई) और ऑन-लैंड कार्गो मावर कॉनकोर में सरकार की हिस्सेदारी की बिक्री को मंजूरी दी थी। निजीकरण के अलावा सरकार ने कई कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी को 51 फीसदी से भी कम करने का फैसला लिया है।

कोरोना काल में हिस्सेदारी बेचने के सहारे सरकार: दरअसल कोरोना काल में केंद्र सरकार विनिवेश और निजीकरण के जरिए ही पूंजी जुटाने की तैयारी में है। गौरतलब है कि सरकार बीमा कंपनी एलआईसी की 25 फीसदी हिस्सेदारी को बेचने के लिए आईपीओ लाने जा रही है। इसके अलावा आईआरसीटीसी की भी 20 प्रतिशत अतिरिक्त हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया शुरू होने वाली है।

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