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भारत पेट्रोलियम के निजीकरण का कंपनी के चेयरमैन ने किया समर्थन, कहा- पेशेवर होगी कंपनी और बढ़ेगा निवेश

कंपनी के चेयरमैन के. पद्माकर ने कहा कि निजीकरण से निवेश और तकनीक में इजाफा होगा। उन्होंने कहा कि निजीकरण की प्रक्रिया से कंपनी में प्रोफेशनलिज्म तेजी से बढ़ेगा।

bharat petroleumभारत पेट्रोलियम के निजीकरण का चेयरमैन ने किया समर्थन

देश की दिग्गज ऑयल मार्केटिंग कंपनी भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन के निजीकरण का भले ही कर्मचारी विरोध कर रहे हैं, लेकिन चेय़रमैन ने इसकी सराहना की है। सोमवार को शेयरहोल्डर्स के साथ मीटिंग में कंपनी के चेयरमैन के. पद्माकर ने कहा कि निजीकरण से निवेश और तकनीक में इजाफा होगा। उन्होंने कहा कि निजीकरण की प्रक्रिया से कंपनी में प्रोफेशनलिज्म तेजी से बढ़ेगा। इसके अलावा क्षमता का विस्तार होगा, निवेश में बढ़ोतरी होगी और नई तकनीक तक पहुंच भी होगी। इसके अलावा नए वैश्विक बाजार से जुड़ने और प्रोडक्ट्स की विविधता के चलते फ्यूचर ग्रोथ होगी। बता दें कि सरकार ने भारत पेट्रोलियम से अपनी 53.29 पर्सेंट हिस्सेदारी मार्च, 2021 तक बेचने का लक्ष्य तय किया है।

हालांकि सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक निजीकरण की यह प्रक्रिया तय समय पूरी हो पाना मुश्किल है और यह अगले फाइनेंशियल ईयर तक खिंच सकती है। भारत पेट्रोलियम उन कंपनियों में से एक है, जिनका निजीकरण कर सरकार बजट घाटे को कम करना चाहती है। इंडस्ट्री सूत्रों के मुताबिक पिछले साल अनुमान लगाया था कि भारत पैट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड के 53.29 फीसदी शेयर बेचकर सरकार 8 बिलियन डॉलर से 10 बिलियन डॉलर जुटा सकती है। लेकिन कोरोना के कारण 2020-21 की पहली तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था के 23.9 फीसदी लुढ़कने के बाद भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड के निजीकरण में देरी हो रही है, जिससे सरकार को ग्रोथ को रिस्टोर के लिए फंड जुटाने में दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।

नवंबर 2019 में केंद्र सरकार ने भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड के शेयर बेचने की घोषणा की थी। भारत पैट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड उन दर्जनों सरकारी कंपनियों में से एक है, जिनके शेयर बेचकर सरकार रकम जुटाना चाह रही है। सरकार ने मौजूदा वित्त वर्ष 2020-21 के मार्च तक भारत पैट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड की बिक्री को पूरी करने का टारगेट रखा था।

कोरोना महामारी के कारण इंटरेस्ट की प्रारंभिक डेडलाइन को 2 महीने पीछे धकेल दिया गया। इस वजह से संभावित खरीदार फैसिलिटी का निरीक्षण भी नहीं कर सके हैं। पिछले महीने जारी की गई सेल स्टेट्स रिपोर्ट जिसे रॉयटर्स ने रिव्यू भी किया है उसके मुताबिक विनिवेश के 25 चरणों में सिर्फ 3 चरण पूरे हो पाने कारण सेल रूकी हुई है।

इस डॉक्यूमेंट के मुताबिक भारत पैट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड के निजीकरण में 21 महीने का समय लग सकता है। इस डील के बारे में जानकारी रखने वाले सीनियर सरकारी अफसर ने रॉयटर्स को बताया संभावित खरीदारों के लिए अभी सिक्योरिटी क्लीयरेंस, कंडक्ट वैल्यूएशन एसेसमेंट और फाइनेंसियल टर्मस की रजामंदी प्राप्त करना बाकी है। यह काफी मुश्किल नजर आ रहा है। पर इस वित्त वर्ष में ट्रांजैक्शन को पूरा करने के लिए हम अपनी पूरी कोशिश कर रहे हैं। एक अन्य सरकारी अफसर ने बताया इस प्रक्रिया 7-8 महीने ज्यादा लग सकते हैं। जिससे अप्रैल तक बीपीसीएल का निजीकरण का टारगेट डिलेय हो जाएगा। निजीकरण में यह देरी सरकारी तिजोरी को नुकसान पहुंचाएगी।

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