Bloodbath in Share Market: सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। शुक्रवार (13 फरवरी 2026) सुबह भी बाजार मे कमजोर शुरुआत हुई थी और कुछ ही मिनटों बाद स्थिति और खराब होती गई। कारोबार बंद होने के समय तक बाजार में हाहाकार मच गया और दोनों प्रमुख सूचकांक BSE Sensex और NSE Nifty लाल रंग के निशान पर बड़े नुकसान पर थे।

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स करीब 1.25 प्रतिशत गिरकर लगभग 82,626 के स्तर पर बंद हुआ। जो 1000 से ज्यादा अंकों की गिरावट को दिखाता है। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी भी करीब 1.30 प्रतिशत टूटकर लगभग 25,471.10 के नीचे बंद हुआ। यह गिरावट सिर्फ कुछ शेयरों तक सीमित नहीं रही बल्कि लगभग सभी सेक्टरों में बिकवाली देखने को मिली। सवाल यह है कि ऐसा क्या हुआ कि बाजार में इतनी बड़ी गिरावट हो गई। आखिर बाजार में हुई इस अचानक गिरावट की वजह क्या है? आइए जानते हैं वे तीन प्रमुख कारण जिनके चलते आज शेयर बाजार ढह गया…

आईटी शेयरों में भारी गिरावट

सबसे बड़ा झटका आईटी सेक्टर को लगा है। निफ्टी आईटी इंडेक्स में 4% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई जिससे यह दिन का सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला सेक्टर बन गया।

IT सेक्टर की दिग्गज कंपनियों जैसे HCLTech, Infosys, Tech Mahindra, Wipro और TCS (Tata Consultancy Services) के शेयर 6% तक टूट गए।

गौर करने वाली बात है कि बाजार में हुई इस गिरावट की वजह किसी एक कंपनी द्वारा की गई घोषणा नहीं है। बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के चलते वैश्विक चिंताओं और ट्रेडिशनल आईटी सर्विसेज पर इसके संभावित असर के चलते बाजार टूट गया।

निवेशकों को डर है कि एआई टूल्स में तेजी से हो रही ग्रोथ से आउटसोर्सिंग सेवाओं की मांग घट सकती है जो भारत के आईटी सेक्टर के बिजनेस मॉडल की मजबूत नींव मानी जाती है। इसके अलावा, एडीआर में कमजोरी और NASDAQ में आई गिरावट ने भी निवेशकों की धारणा पर नकारात्मक असर डाला है।

ग्लोबल संकेतों से बाजार पर दबाव

भारतीय बाजारों में आज हुई बड़ी गिरावट की एक वजह विदेशी बाजारों का कमजोर होना भी है। अमेरिकी बाजारों में तेज बिकवाली देखी गई- खासकर टेक्नोलॉजी शेयरों में जहां NASDAQ 2% से ज्यादा गिर गया। इस गिरावट से भारत समेत वैश्विक बाजारों में निवेशक सतर्क हो गए हैं।

भारतीय आईटी कंपनियों की कमाई का बड़ा हिस्सा संयुक्त राज्य अमेरिका से आता है। इसलिए जब अमेरिकी टेक शेयर गिरते हैं या ग्लोबल टेक खर्च को लेकर चिंता बढ़ती है तो भारतीय आईटी शेयरों पर तुरंत असर दिखाई देता है। अमेरिका में लिस्टेड भारतीय टेक कंपनियों की रसीदों में हालिया गिरावट ने घरेलू बाजार खुलने से पहले ही निवेशकों की चिंता बढ़ा दी।

कई सेक्टरों में बिकवाली का असर

कमजोरी सिर्फ आईटी सेक्टर तक सीमित नहीं रही। निफ्टी के सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में कारोबार करते नजर आए। रियल्टी और मेटल शेयर करीब 2% तक गिरे जबकि ऑटो, फार्मा और वित्तीय सेक्टर के शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई।

बाजार में हुई इस बड़ी गिरावट पर Geojit Investments Limited के हेड ऑफ रिसर्च विनोद नायर ने कहा, ”घरेलू शेयर बाजार अत्यधिक उतार-चढ़ाव वाले सत्र के बाद कमजोरी के साथ बंद हुए। आगामी अमेरिकी महंगाई आंकड़ों से पहले कमजोर वैश्विक संकेतों का बाजार पर दबाव देखने को मिला। अमेरिका-भारत व्यापार समझौते से मिले सकारात्मक संकेतों का असर कम हो गया है क्योंकि एआई से जुड़े व्यवधान की नई आशंकाओं ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित किया है। बाजार को चिंता है कि श्रम आधारित मॉडल पर निर्भर भारतीय आईटी कंपनियों को NASDAQ में सूचीबद्ध कंपनियों की तुलना में ज्यादा प्रतिस्पर्धात्मक दबाव झेलना पड़ सकता है।”

उन्होंने कहा, ”यह सतर्क रुख पूरे बाजार में दिखाई दिया जिससे सभी प्रमुख सूचकांक नकारात्मक क्षेत्र में बंद हुए और ज्यादातर सेक्टरों में गिरावट दर्ज की गई। मजबूत डॉलर इंडेक्स के चलते मेटल शेयरों में मुनाफावसूली देखने को मिली। इसके साथ ही रूस के अमेरिकी डॉलर सेटलमेंट सिस्टम में संभावित वापसी की खबरों ने प्रतिबंधों में राहत की उम्मीदें बढ़ा दी हैं जिससे मेटल कंपनियों की कमाई पर दबाव की चिंता भी बढ़ी है। वहीं कमजोर नतीजों और प्रोजेक्ट लॉन्च में देरी के कारण रियल्टी शेयरों में गिरावट दर्ज की गई।”

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