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कोरोना काल में नोटबंदी से भी ज्यादा कसी ब्लैक मनी पर लगाम, डिजिटल ट्रांजेक्शन में भी बड़ा इजाफा

देश के 300 जिलों के 15,000 लोगों के आधार पर बनी लोकल सर्कल की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2020 में बिना रसीद के अपनी मासिक खरीदारी करने वाले लोगों की संख्या में 50 फीसदी की कमी आई है।

pm narendra modi, digital transactions, cashless transactionsप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो)

पीएम नरेंद्र मोदी ने नवंबर 2016 में देश में यह कहते हुए नोटबंदी का ऐलान किया था कि इससे काले धन पर लगाम लगेगी और देश में डिजिटल इंडिया को बढ़ावा मिलेगा। उस दौर में इसमें कुछ मदद मिली थी, लेकिन एक सर्वे के अनुसार कोरोनाकाल में डिजिटल इंडिया को तेजी मिली है। इसके अलावा ब्लैक मनी पर भी रोक लगी है। कम्युनिटी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लोकल सर्कल्स के एक सर्वे के मुताबिक साल 2019 के मुकाबले 2020 में नकद भुगतान करने वालों की संख्या लगभग आधी हो गई है। इसका बड़ा कारण कोविड-19 वैश्विक महामारी रही है। लॉकडाउन के बाद लोग घरों में ही बंद थे। लोगों ने अपने खाने-पीने के सामान दवाई, कपड़ो से लेकर सभी जरूरी चीजों का भुगतान ज्यादातर ऑनलाइन पेमेंट के जरिए ही किया है।

देश के 300 जिलों के 15,000 लोगों के आधार पर बनी लोकल सर्कल की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2020 में बिना रसीद के अपनी मासिक खरीदारी करने वाले लोगों की संख्या में 50 फीसदी की कमी आई है। 2020 में 14 फीसद लोगों ने बताया कि उनकी मासिक खरीद का औसतन ‘50-100 प्रतिशत’ बिना रसीद के हुआ है, जो कि 2019 में 27 प्रतिशत था। यह बताता है कि नकदी भुगतान की संख्या में 50 प्रतिशत की कमी आई है। 2020 में बिना रसीद अपनी मासिक खरीद वाले लोग बड़ी संख्या में हैं। इस सर्वे में यह भी पाया गया है कि न केवल डिजिटल लेनदेन बढ़ा है बल्कि अलग-अलग तरह के लेनदेन में डिजिटल मोड को अपनाया गया है।

सर्वे में लोगों का कहना है कि वे केवल घरेलू कर्मचारियों के वेतन और बाहर खाने का भुगतान के लिए कैश का उपयोग करते हैं। सर्वे में मात्र 3 फीसदी लोगों ने कहा है कि उन्होंने किराए का भुगतान, संपत्ति खरीदने या घर की मरम्मत के लिए कैश का उपयोग किया। रिपोर्ट में बताया गया है कि 7 प्रतिशत लोगों ने नकद में ‘रिश्वत’ दी है। लोकल सर्कल के प्रेसिडेंट सचिन तपरिया का कहना है कि ‘पिछले कुछ वर्षों में भारत ने डिजिटल भुगतान के उपयोग में जबरदस्त बढ़त देखी है, जिसके कारण अंततः उपभोक्ताओं को अपनी खरीद के लिए डिजिटल रसीद प्राप्त करने में वृद्धि हुई है।’

लोकल सर्कल का कहना है कि इस साल अक्टूबर में प्रकाशित आरबीआई के आंकड़ों से पता चलता है कि वित्त वर्ष 2020 में भारत में डिजिटल भुगतान की मात्रा में 3,434.56 करोड़ की भारी वृद्धि हुई। पांच वर्षों में डिजिटल भुगतान में ट्राजेक्शन वॉल्यूम के संदर्भ में 55.1 फीसदी की वार्षिक वृद्धि दर और वैल्यू के संदर्भ में 15.2 फीसदी की वृद्धि देखी गई। अक्टूबर में, UPI- आधारित 207 करोड़ लेनदेन के साथ यह मील का पत्थर साबित हुआ है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि लोगों ने अवैध आर्थिक गतिविधियों वाले क्षेत्रों की ओर इशारा करते हुए कहा कि सभी संपत्ति मालिकों को आधार से जोड़ना चाहिए। सभी सरकारी मंत्रियों, कर्मचारियों और उनके परिवार के सदस्यों की सभी संपत्तियों का खुलासा होना अनिवार्य होना चाहिए। इसके साथ ही 2,000 रुपये के नोटों को बंद करने और ट्रांजेक्शन टैक्स लगाने से काले धन की अर्थव्यवस्था को और कम किया जा सकता है।

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