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बाहरी कारणों से खस्ताहाल हुआ बाजार, सात लाख करोड़ की पूंजी ‘स्वाहा’

वैश्विक बाजारों में उथल-पुथल के बीच सोमवार को दलाल पथ पर आज ‘मारामारी’ की हालत थी जिसमें बंबई शेयर बाजार का सेंसेक्स 1,624.51 अंक धराशायी हो गया..

Author August 25, 2015 8:52 AM
शेयर बाजार, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज। (पीटीआई फाइल फोटो)

वैश्विक बाजारों में उथल-पुथल के बीच सोमवार को दलाल पथ पर आज ‘मारामारी’ की हालत थी जिसमें बंबई शेयर बाजार का सेंसेक्स 1,624.51 अंक धराशायी हो गया। एक दिन में बंद के स्तर पर सेंसेक्स की यह सबसे बड़ी गिरावट है, जबकि दिन में सेंसेक्स एक समय 1700 अंक से भी अधिक टूट गया था। अनुमान है कि आज की गिरावट से निवेशकों के बाजार पूंजी को सात लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।

शेयर बाजार और मुद्रा बाजार में जारी भारी गिरावट के बीच रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने निवेशकों की चिंता दूर करने का प्रयास करते हुए कहा कि घरेलू अर्थव्यवस्था के बुनियादी कारक काफी मजबूत हैं और किसी भी उठापटक को थामने के लिए पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार उपलब्ध है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भी बाजार में किसी तरह के भय को दूर करने का प्रयास करते हुए कहा कि भारतीय बाजारों का आधार मजबूत है और आज की स्थिति के लिए विदेशी कारक जिम्मेदार हैं।

मुंबई से मिली खबरों के अनुसार, सोमवार को ऊर्जा, बैंकिंग, वाहन, आइटी, बुनियादी ढांचा और रीयल एस्टेट सभी वर्गों के शेयरों में भारी बिकवाली का सिलसिला चला। रुपया भी इस ‘हाहाकार’ से बच नहीं पाया और दो साल के निचले स्तर 66.66 प्रति डॉलर पर आ गया। प्रतिशत में तुलना की जाए तो यह साढ़े छह साल में सेंसेक्स में एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट है। सात जनवरी, 2009 को सेंसेक्स 7.25 प्रतिशत टूटा था। एक दिन में कारोबार के दौरान की यह सात साल की सबसे बड़ी गिरावट है। 21 जनवरी, 2008 को सेंसेक्स दिन में कारोबार के दौरान 2,062 अंक तक नीचे आया था। कारोबार के दौरान आज 1,700 से अधिक की गिरावट इस तरह की तीसरी सबसे बड़ी गिरावट है।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी अपवाद नहीं साबित हुआ और भारी बिकवाली दबाव में 490.95 अंक के नुकसान से 7,809 अंक पर आ गया। निफ्टी 5.92 प्रतिशत टूटा। कच्चे तेल की कीमतें कई साल के निचले स्तर पर आने और चीन की वृद्धि दर को लेकर चिंता बढ़ने के बीच यहां धारणा बुरी तरह प्रभावित हुई। बाजार में जोरदार गिरावट के बीच निवेशकों की पूंजी करीब सात लाख करोड़ रुपए घट गई। सभी सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार पूंजीकरण करीब सात लाख करोड़ रुपए घटकर 100 लाख करोड़ रुपए से नीचे 95,33,105 करोड़ रुपए रह गया। इसमें से सूचीबद्ध कंपनियों के प्रवर्तकों को सबसे अधिक चार लाख करोड़ रुपए की चोट लगी। विदेशी निवेशकों को डेढ़ लाख करोड़ रुपए का नुकसान झेलना पड़ा, जबकि खुदरा निवेशकों की पूंजी 75,000 करोड़ रुपए घट गई। संस्थागत निवेशकों को भी एक लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।

बीएसई मिडकैप में 8.81 प्रतिशत व स्माल कैप में 7.68 प्रतिशत की गिरावट आई। जियोजित बीएनपी परिबा फाइनेंशियल सर्विसेज के आधारभूत अनुसंधान प्रमुख विनोद नायर ने कहा, दो कारणों से बाजार में जोरदार गिरावट आई। उभरती बाजार की मुद्राओं के लिए जोखिम में बढ़ोतरी से रुपए में गिरावट और इंडियन ऑयल की बिक्री पेशकश के लिए भारी मांग के कारण। इसके लिए कुल 9,400 करोड़ रुपए की निकासी की जरूरत हुई।

कोटक सिक्योरिटीज के दीपेन शाह ने कहा कि दीर्घावधि के लिए कुछ अच्छी बात भी हुई। वैश्विक स्तर पर कच्चा तेल 44 प्रति डॉलर पर आ गया है। एशियाई बाजारों में भी गिरावट का रुख रहा। शंघाई बाजार 8.49 प्रतिशत के नुकसान के साथ बंद हुआ। शुरुआती कारोबार में यूरोपीय बाजार भी नीचे चल रहे थे। बीते शुक्रवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने शुद्ध रूप में 2,340.60 करोड़ रुपए के शेयर बेचे।

पूरे दिन में हुए नुकसान के मामले में यह सिर्फ दूसरा मौका है जबकि सेंसेक्स 1,000 अंक के अधिक के नुकसान से बंद हुआ है। इससे पहले 21 जनवरी, 2008 को सेंसेक्स 1,408.35 अंक टूटा था। कारोबार के दौरान की बात की जाए, तो यह आठवां मौका है जबकि एक दिन में कारोबार के दौरान सेंसेक्स 1,000 अंक से अधिक नीचे आया। इससे पहले सात बार 2008 में ऐसा हुआ था।

उठापटक से डरने की जरूरत नहीं : राजन

उधर शेयर बाजार और मुद्रा बाजार में जारी भारी गिरावट के बीच रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने निवेशकों की चिंता दूर करने का प्रयास करते हुए कहा कि घरेलू अर्थव्यवस्था के बुनियादी कारक काफी मजबूत हैं और किसी भी उठापटक को थामने के लिए पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार उपलब्ध है। उन्होंने मुद्रास्फीति के निम्न स्तर पर बने रहने पर दर में कटौती का भी संकेत दिया।

राजन ने यहां एक बैंकिंग सम्मेलन में कहा, ‘मैं इस तरफ ध्यान दिलाना चाहता हूं कि हमारे पास पर्याप्त मात्रा में विदेशी मुद्रा का भंडार है। अंतिम गणना के समय यह 355 अरब डॉलर पर था, इसके अलावा हमारी वायदा बिक्री से, 25 अरब डॉलर अलग से पड़े हैं। कुल मिलाकर हमारे पास 380 अरब डॉलर का भंडार है।’ शेयर बाजार में आज पिछले सात साल में किसी एक दिन में आई सबसे बड़ी गिरावट और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपए के 66.60 रुपए प्रति डॉलर से नीचे गिरने के बीच राजन ने यह बात कही है।

उद्योग मंडल फिक्की और भारतीय बैंक संघ (आइबीए) द्वारा आयोजित बैंकिंग सम्मेलन को संबोधित करते हुए राजन ने कहा, मैं बाजार को एक बार फिर यह आश्वस्त करना चाहता हूं कि हमारे वृहद आर्थिक कारक पूरी तरह से नियंत्रण में हैं। हमारी अर्थव्यवस्था कई अन्य अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले काफी बेहतर स्थिति में है।

मुद्रास्फीति, कच्चे तेल और अन्य जिंसों के दाम रिकार्ड निम्न स्तर पर रहने के बीच दर में कटौती की तरफ इशारा करते हुए राजन ने कहा, ‘हम आपको कम से कम ब्याज दर देने का प्रयास करेंगे, यह हमारी मुद्रास्फीति को नियंत्रण में रखने के प्रयासों के अनुरूप होगा। पिछली मौद्रिक समीक्षा के बाद हम आंकड़ों पर नजर रखे हुए हैं और यह देख रहे हैं कि परिस्थितियां क्या स्वरूप लेतीं हैं।’

राजन ने चार अगस्त के मौद्रिक नीति दस्तावेज का हवाला देते हुए दोहराया कि बैंक मुद्रास्फीति को नियंत्रण में रखने और निम्न ब्याज दर का परिवेश रखते हुए आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने के लिये कृतसंकल्प है। पिछले मौद्रिक समीक्षा में कहे गए शब्दों को दोहराते हुए उन्होंने कहा, आने वाले महीनों में काफी कुछ अनिश्चितताएं दूर हो जाएंगी। मानसून के साथ-साथ मुद्रास्फीति पर हाल में बने दबाव और फेडरल रिजर्व के अगले कदम के बारे में भी स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। वर्ष की शुरुआत में दर कटौती के जो कदम उठाए गए हैं, उनके अर्थव्यवस्था में होने वाले असर को देखने के साथ-साथ बैंक और बेहतर तालमेल बिठाने की गुंजाइश पर भी नजर रखेगा।

उन्होंने कहा कि चालू खाते का घाटा कम रहने, राजकोषीय अनुशासन बढ़ने, नरम मुद्रास्फीति, अल्पावधि में विदेशी मुद्रा देनदारियां कम रहने और विदेशी मुद्रा भंडार बेहतर होने से हमारी अर्थव्यवस्था कई अन्य अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में बेहतर स्थिति में है। राजन ने कहा, बाजार में उठापटक की स्थिति में जब भी उचित लगेगा, हम अपने विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल करने में हिचकिचाएंंगे नहीं। चीन की मुद्रा युआन के अवमूल्यन के मुद्दे पर राजन ने कहा कि यह दुनियाभर में अपनाई जा रही असाधारण मौद्रिक नीतियों का परिणाम है।

इस बीच आम आदमी पार्टी ने सोमवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की बजाय उसमें कमजोरी आई है। नई दिल्ली में आप नेता आशुतोष ने कहा कि अगर अरुण जेटली काम सही नहीं कर पा रहे तो वे इस्तीफा दे दें और किसी ज्यादा सक्षम व्यक्ति को जिम्मेदारी सौंपें।

उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री ने रुपए की विनिमय दर में गिरावट के लिए (मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली) तत्कालीन सरकार पर निशाना साधा था। लेकिन अब वे पिछले 15 महीने से सत्ता में हैं, रुपए की विनियम दर में गिरावट जारी है। आप नेता ने कहा कि मोदी ने अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए कई सुधारों का वादा किया था, लेकिन अर्थव्यवस्था पर कोई भी प्रभाव छोड़ने में नाकाम रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने दूसरी पीढ़ी के सुधारों का वादा किया था, लेकिन अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने में सक्षम नीति में कोई बदलाव नहीं आया है।

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