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कोरोना काल में भी मुकेश अंबानी की रिलायंस रिटेल का दबदबा, मिली ये सफलता

वित्त वर्ष 2020 में रिलायंस रिटेल की ग्रोथ वार्षिक आधार पर 41.8 फीसदी रही है। वहीं, वित्त वर्ष 2020 में रिलायंस रिटेल के देशभर में 11,784 स्टोर थे।

मुकेश अंबानी (Photo: Simon Dawson/Bloomberg)

कोरोना संकट काल में मुकेश अंबानी के रिलायंस इंडस्ट्रीज की रिटेल कंपनी को बड़ी सफलता मिली है।

क्या है मामला: दरअसल, रिलायंस रिटेल को दुनिया की दूसरी सबसे तेजी से बढ़ती खुदरा विक्रेता कंपनी का दर्जा प्राप्त हुआ है। डेलॉय की ग्लोबल रिटेल पावर हाउसेज 2021 रिपोर्ट में यह बात कही गई है। इस रिपोर्ट में रिलायंस रिटेल ग्लोबल स्तर पर 53वें स्थान पर रही है। पिछले साल रिलायंस रिटेल की 56वें स्थान पर रही थी।

क्या कहा गया है रिपोर्ट में: डेलॉय ने रिपोर्ट में कहा है कि वित्त वर्ष 2020 में रिलायंस रिटेल की ग्रोथ वार्षिक आधार पर 41.8 फीसदी रही है। वहीं, वित्त वर्ष 2020 में रिलायंस रिटेल के देशभर में 11,784 स्टोर थे। यह स्टोर देश के 7 हजार से ज्यादा कस्बों और शहरों में स्थित हैं। स्टोर्स की संख्या में 13.1 फीसदी की बढ़ोतरी रही है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि रिलायंस रिटेल ने वित्त वर्ष 2018- 19 की समाप्ति पर श्रीकणन डिपार्टमेंटर के 29 स्टोर का अधिग्रहण किया। इसके बाद अगस्त 2020 में फ्यूचर समूह के खुदरा, थोक और लाजिस्टिक्स इकाइयों को भी 3.4 अरब डालर में अधिग्रहण करने की घोषणा की। इन्हें पूरी तरह से मंजूरी मिल जाने के बाद रिलायंस रिटेल के स्टोरों का दायरा करीब दोगुना हो जाएगा। आपको बता दें कि रिलायंस रिटेल और फ्यूचर समूह के बीच की डील पर अमेजन को आपत्ति है। (यहां पढ़ें—राधाकिशन दमानी की कंपनी को बड़ा मुनाफा)

इस वजह से डील फिलहाल कानूनी पचड़े में है। डेलॉय की रिपोर्ट में कहा गया है कि रिलायंस रिटेल ने 2020 में दो ई-कॉमर्स अधिग्रहण भी किये। उसने विटालिक हेल्थ और उसके ऑनलाइन फार्मेसी प्लेटफार्म नेटमेड्स का अधिग्रहण किया। इसके अलावा घर की सजावट का काम करने वाली आनलाइन कंपनी अर्बनलेडर में नवंबर में 96 प्रतिशत हिस्सेदारी का अधिग्रहण किया।

बीते साल जब भारत समेत दुनियाभर में कोरोन की वजह से लॉकडाउन था उस दौरान रिलायंस रिटेल में विदेशी कंपनियों के निवेश की झड़ी लग गई थी। इस दौरान विदेश की कंपनी-सिल्वर लेक, KKR, इक्विटी फर्म GENERAL ATLANTIC, मुबाडला इंवेस्टमेंट, सॉवरेन वेल्थ फंड जीआईसी, टीपीजी जैसी कंपनियों ने हजारों करोड़ रुपये निवेश किए। (ये पढ़ें-मुकेश अंबानी से ज्यादा है इन दो भाइयों की सैलरी, रिलायंस में मिली है बड़ी जिम्मेदारी)

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