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जीसएटी पर राज्यों की चिंताओं को ध्यान में रखा गया है : जेटली

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि वस्तु व सेवा कर (जीएसटी) संबंधित संविधान संशोधन विधेयक के मसविदे में राज्यों की चिंताओं को ध्यान में रखा गया है। उन्होंने प्रस्तावित कानून को आजादी के बाद देश का सबसे बड़ा एकल कर सुधार करार दिया। जेटली ने राज्यसभा में मौजूदा वित्त वर्ष की अनुदान की […]

Arun Jaitley ने कहा “उनकी सरकार इस पर मतभेद दूर करने के लिए विपक्षी दलों के साथ विचार विमर्श को तैयार है।” (फ़ोइल फ़ोटो-पीटीआई)

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि वस्तु व सेवा कर (जीएसटी) संबंधित संविधान संशोधन विधेयक के मसविदे में राज्यों की चिंताओं को ध्यान में रखा गया है। उन्होंने प्रस्तावित कानून को आजादी के बाद देश का सबसे बड़ा एकल कर सुधार करार दिया।

जेटली ने राज्यसभा में मौजूदा वित्त वर्ष की अनुदान की अनुपूरक मांगों पर हुई संक्षिप्त चर्चा का जवाब देते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि यह कानून देश में सहयोगात्मक संघवाद को मजबूत करेगा क्योंकि जीएसटी के बारे में फैसला करने वाली परिषद में दो तिहाई सदस्य राज्यों से जबकि एक तिहाई सदस्य केंद्र के होंगे। उन्होंने कहा कि इस परिषद में 75 फीसद के बहुमत से फैसले किए जाएंगे।

वित्त मंत्री ने कहा कि पिछले सप्ताह 11 दिसंबर को चंद राज्यों के मंत्रियों व प्रतिनिधियों के साथ उनकी बैठक हुई थी जिसमें जीएसटी से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक के मसविदे को दिखाया गया। उन्होंने कहा कि राज्यों की राय पर इस मसविदे में कुछ सुधार भी किए गए हैं। ऐसी ही बैठक पिछले सोमवार को भी हुई थी। उन्होंने कहा कि जीएसटी केंद्र व राज्य दोनों ही के लिए लाभ की स्थिति होगा। जीएसटी लागू होने से राज्यों को कर की जो हानि होगी उसकी भरपाई के लिए संवैधानिक गारंटी का प्रावधान होगा।

जीएसटी को आजादी के बाद सबसे बड़ा एकल कर सुधार करार देते हुए जेटली ने कहा कि वैट के विपरीत इसमें केवल अंतिम बिंदु पर कर लगाया जाएगा। इससे व्यावहारिक स्तर पर कई फायदे होंगे। कांग्रेस के जयराम रमेश ने वित्त मंत्री से यह स्पष्टीकरण मांगा था कि पिछली सरकार में, गुजरात ही एकमात्र ऐसा राज्य था जो जीएसटी का काफी विरोध कर रहा था। उन्होंने कहा कि अब ऐसा क्या बदलाव आ गया कि गुजरात इसके समर्थन में आ गया है, सिवा इसके कि गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री अब देश के प्रधानमंत्री बन गए हैं।

इस पर जेटली ने कहा कि यह हो सकता है कि राज्यों का मौजूदा सरकार के कार्यकाल में सहयोगात्मक संघवाद पर अधिक भरोसा बढ़ गया हो। उन्होंने तृणमूल के डेरेक ओ ब्रायन के स्पष्टीकरण के जवाब में कहा कि जीएसटी के मामले में केंद्र सरकार ने जो भी निर्णय किए हैं वे इस संबंध में बनाई गई, राज्यों के वित्त मंत्रियों की समिति में पारित किए गए प्रस्ताव के अनुरूप हैं।

कई सदस्यों के पेट्रोल व डीजल पर उत्पाद कर बढ़ाने का विरोध करने के मुद्दे पर जेटली ने कहा कि सरकार ने यह कदम इसलिए उठाया है ताकि सामाजिक क्षेत्रों पर अधिक खर्च किया जा सके। उन्होंने कहा कि वे नहीं चाहते कि सारा बोझ आयकर दाताओं पर ही डाला जाए। इसके अलावा, तेल कंपनियों को अपनी कम वसूली की भरपाई भी करनी है अन्यथा उनका नुकसान बढ़ता जाएगा। मौजूदा सरकार के आने के बाद पेट्रोल और डीजल के दामों में आठ बार कमी की गई है।

वित्त मंत्री ने कहा कि वे वाम दलों के इस विचार को स्वीकार नहीं कर सकते कि व्यय बढ़ाने के लिए लोगों पर कर बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार व्यय को युक्तिसंगत बना रही है। जेटली ने डालर के मुकाबले रुपए की कीमत घटने के बारे में कई सदस्यों के चिंता जताने पर उम्मीद जताई कि रुपए की स्थिति में अगले कुछ दिनों में सुधार होगा। उन्होंने कहा कि उभरती हुई अन्य अर्थव्यवस्थाओं की मुद्रा की तुलना में रुपया डालर के मुकाबले उतार-चढ़ाव का अपेक्षाकृत अधिक शिकार नहीं हुआ है।

भाकपा के डी राजा ने उनसे जानना चाहा था कि योजना आयोग के खत्म हो जाने के बाद अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति मद के तहत आबंटित की जाने वाली राशि का भविष्य क्या होगा। इस पर वित्त मंत्री ने कहा कि ढांचा जो भी रहे, लेकिन इस मद के तहत राशि का आबंटन जारी रहेगा। इससे पूर्व चर्चा में भाग लेते हुए विभिन्न दलों के सदस्यों ने जीएसटी को लेकर राज्यों की चिंताओं को उठाया और पेट्रोल व डीजल पर उत्पाद शुल्क बढ़ाए जाने का विरोध किया। चर्चा में माकपा के पी राजीव, सपा के नरेश अग्रवाल, कांग्रेस के राजीव शुक्ला, द्रमुक के तिरूचि शिवा, बीजद के भूपेंद्र सिंह, तृणमूल के डी बंदोपाध्याय और भाकपा के डी राजा ने भाग लिया।

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