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वेदांतु, मीशो जैसे बड़े स्टार्टअप ने हजारों लोगों को नौकरियों से निकाला, क्या है मिलने लगे हैं अर्थव्यवस्था में गिरावट के संकेत?

Startups Job Loss: फरवरी के बाद से अब तक देश के टॉप स्टार्टअप्स ने लगभग 4500 कर्मचारियों को जॉब से निकाला या फिर जॉब छोड़ने के लिए मजबूर किया है।

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इस तस्वीर का उपयोग केवल प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (Photo: Freepik)

देश में पिछले कुछ समय से बड़े स्टार्टअप्स में बड़ी संख्या में कर्मचारियों की छंटनी देखने को मिली है। न्यूज़ वेबसाइट मनीकंट्रोल की ओर से जुटाए गए आंकड़ों के अनुसार, इस साल फरवरी के बाद से अब तक देश के टॉप स्टार्टअप्स में करीब 4500 कर्मचारियों को निकाला जा चुका है या फिर उन्हें इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया है। इन बड़े इसमें कार24, वेदांतु, मीशो, व्हाइटहैट जूनियर, अनकेडमी, ओके क्रेडिट और ट्रेल जैसे बड़े स्टार्टअप्स का नाम शामिल हैं।

स्टार्टअप्स ने 100 फीसदी तक घटाए कर्मचारी: आंकड़ों के अनुसार, कार24 ने 600 कर्मचारियों को निकाला है जो उसके कुल वर्कफोर्स का 6 फीसदी है। मशहूर एजुकेशन स्टार्टअप अनकेडमी ने 600 कर्मचारियों की छुट्टी की है जो उसके कुल कर्मचारियों का 10 फीसदी है। देश के बड़े ऑनलाइन ई- कॉमर्स प्लेयर मीशो ने अपने ग्रोसरी आर्म के 100 फीसदी कर्मचारियों को निकाल दिया। ओके क्रेडिट ने 35 से 40 कर्मचारियों को निकाला है जो उसके वर्कफोर्स का 35 फीसदी है जबकि इसके अलावा व्हाइटहैट जूनियर ने अपने 800 कर्मचारियों को जॉब छोड़ने के लिए मजबूर किया है। वहीं, एड-टेक कंपनी लीडो ने भारत में अपने ऑपरेशन बंद कर सभी कर्मचारियों को निकल दिया है।

कैपिटल जुटाने में आ रही समस्या: कर्मचारियों को जॉब से निकालने के बाद वेदंतु की को फाउंडर वामसी कृष्ण ने एक ब्लॉग पोस्ट में कहा कि मौजूदा समय में परिस्थितियां कम्पनी के लिए कठिन है। रुस- यूक्रेन युद्ध के कारण दुनिया में मंदी का खतरा मंडरा रहा है और दुनिया के साथ भारत के स्टॉक मार्केट में भी बड़ी गिरावट आ चुकी है। इस कारण आने वाली तिमाही में कंपनी के सामने कैपिटल की समस्या खड़ी हो सकती है।

वहीं, कार24 से हुई छंटनी के बारे में एक मीडिया रिपोर्ट में कहा गया कि कंपनी ने लागत कम करने के लिए कर्मचारियों की छुट्टी की है क्योंकि कुछ महीनों में पब्लिक के बीच लिस्टिंग के लिए जाने वाली है। वहीं, कंपनी ने आए नए निवेशक बढ़ते नुकसान के कारण असहज है जिस वजह से फिलहाल कंपनी का फोकस लागत कम करने पर है।”

भारत में बड़े स्टार्टअप्स को फंड करने वाली जापानी कंपनी सॉफ्टबैंक ने 2021 से मुकाबले 2022 में कम निवेश करने की रणनीति बनाई है। इसके अलावा दुनिया के दिग्गज टेक इन्वेस्टर में शामिल टाइगर ग्लोबल ने भी उभरते हुए बाजारों को लेकर अपनी रणनीति को बदल दिया है। माना जा रहा है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी की आहट के कारण इन बड़े निवेशकों ने यह फैसला लिया है।

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