पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के पश्चिम बंगाल में मतदान के ऐलान से पहले बड़ी घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी कर्मचारियों के DA का बकाया दिया जाएगा। उन्होंने कहा DA का बकाया मार्च से मिलेगा। ROPA 2009 के अनुसार राज्य सरकार DA का बकाया देगी।
पिछले महीने, शीर्ष अदालत ने आदेश दिया था कि 2008 से 2019 तक लंबित महंगाई भत्ते के 25 प्रतिशत बकाया का भुगतान 31 मार्च तक अपने कर्मचारियों को कर दिया जाए और कहा था कि “राज्य को एक आदर्श नियोक्ता के रूप में कार्य करना चाहिए”।
डीए का ऐलान
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 15 मार्च 2026 को दोपहर 3:05 बजे सोशल मीडिया पर DA के बारे में ऐलान किया। उन्होंने इसमें लिखा, “मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि हमारी मातृमान-मानुष सरकार ने अपने सभी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों, साथ ही हमारे शिक्षण संस्थानों के लाखों शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों और पंचायतों, नगर निकायों, अन्य स्थानीय निकायों आदि जैसे अनुदान प्राप्त संस्थानों के कर्मचारियों/पेंशनभोगियों से किए गए वादे को पूरा किया है। उन्हें वित्त विभाग द्वारा जारी अधिसूचनाओं में उल्लिखित प्रक्रिया के अनुसार मार्च 2026 से ROPA 2009 के तहत महंगाई भत्ता (डीए) का बकाया मिलना शुरू हो जाएगा।”
ममता ने यह भी कहा कि बकाया पेमेंट का तरीका और शेड्यूल राज्य सरकार के फाइनेंस डिपार्टमेंट द्वारा जारी नोटिफिकेशन में बताया गया है।
पुरोहितों और मुअज्जिनों के लिए मासिक मानदेय की घोषणा
महंगाई भत्ता के बकाया भुगतान की घोषणा करने से पहले, मुख्यमंत्री ने पुरोहितों (हिंदू पुजारियों) और मुअज्जिनों (मुस्लिम धर्मगुरुओं) के लिए 1,500 रुपये मासिक मानदेय की घोषणा की।
15 मार्च 2026 को दोपहर 2:40 बजे X (Twitter) पर मुख्यमंत्री ने लिखा, “मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि हमारे पुरोहितों और मुअज्जिनों को दिए जाने वाले मासिक मानदेय में 500 रुपये की वृद्धि की गई है, जिनकी सेवा हमारे समुदायों के आध्यात्मिक और सामाजिक जीवन को बनाए रखती है। इस संशोधन के साथ, उन्हें अब प्रति माह 2,000 रुपये प्राप्त होंगे।”
उन्होंने यह भी घोषणा की कि पुरोहितों और मुअज्जिनों द्वारा मानदेय के लिए विधिवत प्रस्तुत किए गए सभी नए आवेदनों को भी उनकी सरकार द्वारा अनुमोदित कर दिया गया है।
उन्होंने आगे कहा, “हमें ऐसे वातावरण को पोषित करने पर गर्व है जहां प्रत्येक समुदाय और प्रत्येक परंपरा को महत्व दिया जाता है और उसे मजबूत किया जाता है। हमारा प्रयास यह सुनिश्चित करना है कि हमारी समृद्ध आध्यात्मिक विरासत के संरक्षकों को वह पहचान और समर्थन मिले जिसके वे हकदार हैं।”
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