इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने वालों के लिए जरूरी खबर है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने असेसमेंट ईयर 2026-27 से जुड़े टैक्स मामलों में कुछ अहम बदलाव किए हैं। इस फैसले से कई टैक्सपेयर्स को अपना टैक्स से जुड़ा काम पूरा करने के लिए अतिरिक्त समय मिल गया है।
लेकिन यहां दो अलग-अलग तारीखों और दो अलग-अलग कामों को समझना जरूरी है। कौन-सी तारीख किस काम के लिए है और यह राहत किन टैक्सपेयर्स को मिलेगी, इसे आसान भाषा में समझते हैं…
किन्हें मिलेगा इन तारीखों का फायदा?
अगर आपके मामले में टैक्स ऑडिट जरूरी है, तो CBDT की ओर से बढ़ाई गई दोनों डेडलाइन का फायदा मिलेगा। पहले Tax Audit Report जमा करने की आखिरी तारीख 30 सितंबर थी, जिसे अब बढ़ाकर 21 अक्टूबर 2026 कर दिया गया है। वहीं, संबंधित आईटीआर दाखिल करने की डेडलाइन 31 अक्टूबर से बढ़ाकर 21 नवंबर 2026 कर दी गई है।
क्यों अलग हैं ऑडिट रिपोर्ट और आईटीआर?
ऑडिट रिपोर्ट और आईटीआर दोनों अलग-अलग काम हैं। टैक्स ऑडिट वाले मामलों में सबसे पहले खातों और कमाई-खर्च का रिकॉर्ड जांचा जाता है। इस जांच के बाद Tax Audit Report जमा की जाती है। वहीं, आईटीआर वह फॉर्म है, जिसमें टैक्सपेयर अपनी आय, टैक्स और दूसरी जरूरी जानकारी सरकार को देता है।
टैक्सपेयर्स को अब क्या करना चाहिए?
डेडलाइन बढ़ने के बाद भी जरूरी नहीं है कि टैक्स से जुड़े काम आखिरी समय तक टाले जाएं। अगर आप Tax Audit के दायरे में आते हैं, तो अपने जरूरी दस्तावेज समय पर CA या टैक्स प्रोफेशनल को दे दें, ताकि ऑडिट का काम समय से पूरा हो सके।
इसके साथ ही Books of Accounts, GST रिकॉर्ड, बैंक स्टेटमेंट और TDS से जुड़ी जानकारी भी चेक कर लें। अगर किसी रिकॉर्ड में कोई गलती या अंतर नजर आता है, तो उसे समय रहते ठीक करा लें।
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