बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने उद्योगपति अनिल अंबानी को झटका देते हुए एकल पीठ के उस अंतरिम आदेश को सोमवार को रद्द कर दिया, जिसमें उनके एवं रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड के बैंक खातों को ”धोखाधड़ी” वाला वर्गीकृत करने की कार्यवाही पर रोक लगाई गई थी। मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अनखड़ की खंडपीठ ने सार्वजनिक क्षेत्र के तीन बैंक और लेखा परामर्श कंपनी बीडीओ इंडिया एलएलपी की, दिसंबर 2025 में पारित एकल पीठ के अंतरिम आदेश के खिलाफ दायर अपील को स्वीकार करते हुए यह फैसला सुनाया।

खंडपीठ ने एकल पीठ के आदेश को रद्द करते हुए इसे ”अवैध एवं विकृत” करार दिया। अंबानी के वकीलों ने उच्च न्यायालय से अनुरोध किया कि आदेश पर रोक लगाई जाए ताकि वे उच्चतम न्यायालय का रुख कर सकें, लेकिन अदालत ने यह मांग ठुकरा दी।

अंबानी एवं उनकी कंपनी को अंतरिम राहत देने वाले दिसंबर 2025 के आदेश को तीनों बैंक ने पिछले महीने चुनौती दी थी। उस आदेश में अनिवार्य भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) नियमों के उल्लंघन का हवाला देते हुए कहा गया था कि बैंक वर्षों बाद ”गहरी नींद से जागे” हैं।

एकल पीठ ने इंडियन ओवरसीज बैंक, आईडीबीआई बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा की गई वर्तमान और भावी कार्रवाई पर रोक लगाते हुए कहा था कि यह कार्रवाई कानूनी रूप से त्रुटिपूर्ण ‘फोरेंसिक ऑडिट’ पर आधारित है और भारतीय रिजर्व बैंक के अनिवार्य दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करती है।

इन बैंक ने अपनी अपील में कहा कि जिस ‘फोरेंसिक ऑडिट’ के आधार पर खातों को ”धोखाधड़ी” वाला वर्गीकृत किया गया, वह कानूनी रूप से वैध था और उसमें धन की हेराफेरी एवं दुरुपयोग के गंभीर परिणाम सामने आए हैं जो बीडीओ इंडिया एलएलपी द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में दर्ज है।

बैंकों ने साथ ही कहा कि अंबानी ने एकल पीठ के समक्ष ‘फोरेंसिक ऑडिट’ को तकनीकी आधार पर चुनौती दी थी और खंडपीठ से एकल पीठ के अंतरिम आदेश को रद्द करने का अनुरोध किया था।

अंबानी ने एकल पीठ के समक्ष इंडियन ओवरसीज बैंक, आईडीबीआई बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस को चुनौती दी थी, जिनमें उनके और रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड के खातों को ”धोखाधड़ी खाता” वर्गीकृत करने का प्रस्ताव था।

अंतरिम राहत के रूप में उन्होंने नोटिस पर रोक और किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई पर प्रतिबंध का अनुरोध किया था। उनका तर्क था कि बीडीओ इंडिया एलएलपी, ‘फोरेंसिक ऑडिट’ करने के लिए योग्य नहीं है क्योंकि रिपोर्ट पर हस्ताक्षर करने वाला व्यक्ति ‘चार्टर्ड अकाउंटेंट’ नहीं था।

अंबानी का दावा था कि बीडीओ इंडिया एलएलपी एक लेखा परामर्श कंपनी है, न कि ऑडिट कंपनी है। एकल पीठ ने अंबानी की दलीलों से सहमति जताते हुए बैंकों की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी जिसे अब खंडपीठ ने रद्द कर दिया है।

समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ

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