Banks Board Bureau may shut shop as govt struggles to find Chairman Vinod Rai's successor - Jansatta
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बैंक बोर्ड ब्यूरो को बंद करने की तैयारी

पूर्व नियंत्रक और महालेखा परीक्षक विनोद राय की अध्यक्षता वाले बैंक बोर्ड ब्यूरो (बीबीबी) के मूल काम में कतरब्योंत कर दी गई है।

Author नई दिल्ली | February 22, 2018 12:49 AM
पूर्व नियंत्रक और महालेखा परीक्षक विनोद राय

पूर्व नियंत्रक और महालेखा परीक्षक विनोद राय की अध्यक्षता वाले बैंक बोर्ड ब्यूरो (बीबीबी) के मूल काम में कतरब्योंत कर दी गई है। मार्च में इसे बंद कर दिया जाएगा। बंद करने का सुझाव वित्त मंत्रालय की सचिव स्तरीय एक कमेटी ने दी है। मूल काम वित्त मंत्रालय की सचिव (वित्तीय सेवा विभाग) अंजली छिब दुग्गल को सौंप दिया गया है। बैंकों को नीतिगत और पूंजी जुटाने का सुझाव देने का काम सचिव (राजस्व सेवाएं) और रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर की कमेटी को सौंप दिया गया है। वित्त सेवा के अतिरिक्त सचिव गिरीश चंद्र मुर्मू के मुताबिक, सरकार इसे भंग कर कामकाज के विलय की योजना पर काम कर रही है। मार्च में ब्यूरो के अध्यक्ष रिटायर होंगे। बैंकिंग सुधार की प्रक्रिया में बैंक बोर्ड ब्यूरो समेत नतीजे नहीं दे पाने वाली कई और ऐसी संस्थाओं को वित्त मंत्रालय और आरबीआइ के विभिन्न विभागों में विलय किया जाएगा, जिन्हें अंकुश और नियमन की जिम्मेदारी दी गई थी।

अंजली छिब दुग्गल की अध्यक्षता वाली समिति के अन्य सदस्यों में आरबीआइ के डिप्टी गवर्नर एनएस विश्वनाथन, इलाहाबाद बैंक की पूर्व चेयरपर्सन रही शुभलक्ष्मी पणसे, सलाहकार फर्म इंडएशिया के प्रवर्तक प्रदीप शाह और आइआइएम इंदौर के निदेशक ऋषिकेश टी कृष्णन को शामिल किया गया है। दुग्गल और विश्वनाथन- दोनों का बीबीबी से पुनर्वासन किया गया है। पणसे और शाह को हाल ही में शामिल किया गया है।

वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग के तहत 2016 में स्वायत्त संस्था बीबीबी को गठित किया गया था और उसे बैंकों के प्रमुख, शीर्ष कार्यपालक की नियुक्ति प्रक्रिया में पुख्ता रिपोर्ट तैयार करने का प्रमुख काम सौंपा गया था। साथ ही, बैंकों को नीतिगत सहायता देने और पूंजी जुटाने के तरीके सुझाने का काम भी उसके पास था। लेकिन बैंकों के शीर्ष प्रबंधन की नियुक्ति के जब भी फैसले किए गए, बोर्ड से पूछा नहीं गया। बैंक आॅफ इंडिया और पंजाब नेशनल बैंक के शीर्ष प्रबंधन में बदलाव कर दिया गया। पीएनबी की प्रमुख उषा अनंत सुब्रह्मण्यम को इलाहाबाद बैंक और बैंक आॅफ इंडिया के प्रमुख मेल्विन रिगो को सिंडीकेट बैंक भेज दिया गया। इंडियन बैंक के प्रबंध निदेशक को बदलकर आइडीबीआइ बैंक का प्रबंध निदेशक बना दिया गया। इसके लिए बीबीबी से मशविरा तक नहीं किया गया। दो लोग जिन्हें बीबीबी ने इलाहाबाद बैंक और सिंडीकेट बैंक के लिए चुना था, उन्हें सरकार ने पंजाब नेशनल बैंक और बैंक आॅफ इंडिया में नियुक्त कर दिया। पीएनबी घोटाला सामने आने के बाद इसके कई शीर्ष अधिकारी इधर से उधर किए गए हैं।

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