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महंगी होंगी बैंक की सेवाएं, एटीएम इस्‍तेमाल के लिए भी देना पड़ सकता है चार्ज

बैंकों को टैक्स विभाग ने नोटिस भेजा है। ये जीएसटी नोटिस इस साल अप्रैल में बैंकों को भेजे गए 40 हजार करोड़ रुपये के सेवा टैक्स और जुर्माने के नोटिस से अलग है। टैक्स डिपार्टमेंट की ओर से बैंकों को मिले नोटिस के बाद आगे से चेकबुक और एटीएम कार्ड जैसी फ्री सेवाओं के लिए पैसे देने पड़ सकते हैं।

नोटिस मिलने के बाद बैंकों के संगठन ने सरकार से इस नोटिस को वापस लेने की गुहार लगाई है।

बैंक अपने ग्राहकों से कुछ सर्विसेज के लिए चार्ज करने की प्लानिंग कर रहे हैं। जीएसटी की वजह से बैंकों की सर्विस महंगी हो सकती हैं। बैंक चेक बुक, एडिशनल क्रेडिट कार्ड, एटीएम कार्ड जैसे सर्विसेज की कीमत वसूल सकते हैं। अभी खाते में मिनिमम बैलेंस रखने वाले खाता धारकों को यह सेवाएं मुफ्त में मिल रही हैं, लेकिन टैक्स डिपार्टमेंट की ओर से बैंकों को मिले नोटिस के बाद आगे से चेकबुक और एटीएम कार्ड जैसी फ्री सेवाओं के लिए पैसे देने पड़ सकते हैं। इसके साथ ही बैंक सभी सेवाओं के चार्ज बढ़ा सकते हैं। ये जीएसटी नोटिस इस साल अप्रैल में बैंकों को भेजे गए 40 हजार करोड़ रुपये के सेवा टैक्स और जुर्माने के नोटिस से अलग है।

ज्यादातर बैंक अब ग्राहक से जीएसटी वसूलने पर विचार कर रहे हैं। इंडियन बैंक एसोसिएशन के सीईओ वीजी कन्नन ने इकोनॉमिक टाइम्स को बताया, “यह एक शुद्ध पास-थ्रू होगा और राशि सीधे सरकार को जाएगी।” “ग्राहक से कितना शुल्क लिया जाएगा, यह एक बैंक से दूसरे बैंक में अलग होगा, क्योंकि यह इस बात पर निर्भर करेगा कि मुक्त सेवाओं का मूल्य कैसा है।” इस मामले से परिचित लोगों के मुताबिक ज्यादातर प्रमुख बैंक मुफ्त सेवाओं पर 18% जीएसटी चार्ज करने के लिए राजी हो चुके हैं। एक मल्टिनेशनल बैंक के टैक्स हैड के मुताबिक “हम सहमत हैं कि हम ग्राहकों से जीएसटी लेना शुरू कर देंगे। बस इसको लेकर एक तंत्र विकसित किया जा रहा है, लेकिन चूंकि हम खुदरा बैंकिंग में इतने बड़े नहीं हैं, इसलिए हम बड़े बैंकों का एक साथ आने तक इंतजार करेंगे।”

टैक्स विभाग का दावा है कि अपने खातों में न्यूनतम राशि बनाए रखने वाले ग्राहकों को कुछ सेवाएं मुफ्त मिलती हैं जिनके पास “निर्धारित मूल्य” होता है और कर योग्य होता है। लेकिन इन सेवाओं पर जीएसटी लगेगा। ये राशि खाते में न्यूनतम बैलेंस नहीं रखने वाले ग्राहकों से वसूल किए जाने वाले शुल्क पर लगने वाले जीएसटी के बराबर होगा। नोटिस मिलने के बाद बैंकों के संगठन ने सरकार से इस नोटिस को वापस लेने की गुहार लगाई है। बैंकों को उम्मीद है कि आम लोगों को बोझ से बचाने के लिए केंद्र सरकार बैंकों को इस सर्विस टैक्स के नोटिस से कुछ राहत मिल सकती है। गौरतलब है कि जून में सरकार ने स्पष्ट किया था कि बैंकों की फ्री सेवाओं और ग्राहकों की ओर खाते में न्यूनतम बैलेंस मेंटेन करने की सेवा पर GST नहीं लगेगा।

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