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सिर्फ 4 बार पैसा निकालने पर फ्रीज हो रहे जन-धन खाते

मूल बचत बैंक जमा खाता (बीएसबीडीए) का उद्देश्य वित्तीय समावेश करना था और इसलिए, सभी शुल्कों से मुक्त रखा गया था। बैंकों के लिए इसे व्यवहार्य बनाने के लिए, आरबीआई ने एक महीने में 4 बार पैसे निकालने की लिमिट रखी थी।

यदि कोई ग्राहक ब्रांच जाकर दो बार पैसे निकाल लेता है और 20 दिन में डेबिट कार्ड का दो बार उपयोग करता है, तो उसे आगे अपने पैसे निकालने के लिए अगले महीने का इंतजार करना होगा।

सरकार ने जीरो बैलेंस अकाउंट खुलवाए थे। सरकार ने यह खाते प्रधानमंत्री जन धन योजना के अंतर्गत खुलवाए थे। आरबीआई ने आईपीएल के दौरान काफी SMS भेजे थे। इस दौरान इस योजना के तहत खोले गए करोड़ों अकाउंट्स को फ्रीज कर दिया गया। प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत एक महीने में खाते से 4 बार पैसे निकालने की ही सुविधा है। जिन लोगों ने खाते से एक महीने में 4 ट्रांजेक्शन कर लिए हैं उनके अकाउंट्स फ्रीज कर दिए हैं। मतलब इन अकाउंट्स में पैसे न जमा किए जा सकते हैं और न ही इनसे पैसे निकाले जा सकते हैं।

वहीं HDFC और Citi बैंक ने ऐसे अकाउंट, जो जनधन योजना के तहत खोले गए थे और उनमें 4 से ज्यादा ट्रांजेक्शन हो गए हैं ऐसे अकाउंट्स को बैंकों ने रेगुलर सेविंग अकाउंट में बदल दिया है। मतलब अब इन अकाउंट्स में बैंक की शर्तों के मुताबिक मिनिमम बैलेंस मेंटेन करना होगा। वहीं अगर मिनिमम बैलेंस मेंटेन नहीं किया तो चार्ज भी देना होगा। मूल बचत बैंक जमा खाता (बीएसबीडीए) का उद्देश्य वित्तीय समावेश करना था और इसलिए, सभी शुल्कों से मुक्त रखा गया था। बैंकों के लिए इसे व्यवहार्य बनाने के लिए, आरबीआई ने एक महीने में 4 बार पैसे निकालने की लिमिट रखी थी। अब बैंकों ने रुपए निकासी के दायरे को बढ़ा दिया है अब बैंकों ने इसमें ATM से निकासी, RTGS, NEFT, चेक क्लेरिंग, ब्रांच से निकासी, ट्रांसफर, इंटरनेट डेबिट और EMI को भी शामिल कर लिया है।

एक महीने में चार बार लेनदेन पूरा होने के बाद खाता फ्रीज हो जाता है। इसका मतलब यह है कि यदि कोई ग्राहक ब्रांच जाकर दो बार पैसे निकाल लेता है और 20 दिन में डेबिट कार्ड का दो बार उपयोग करता है, तो उसे आगे अपने पैसे निकालने के लिए अगले महीने का इंतजार करना होगा। आईआईटी बॉम्बे टेक्निकल रिपोर्ट में बीएसबीडीए के साथ मुद्दों पर प्रकाश डाला गया है। इस रिपोर्ट को आशीष दास ने तैयार किया है। आशीष कई साल से वित्तीय समावेशन के लिए किए गए कदमों के प्रभाव का शोध और सर्वेक्षण कर रहे हैं। रिपोर्ट का नाम ‘क्या बीएसबीडीए जमाकर्ताओं की लंबी पारी हो सकती है? जागरूक रहें और सतर्क रहें’ है।

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