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महाराष्ट्र सरकार ने बालासाहेब ठाकरे के नाम पर की दुर्घटना बीमा योजना की शुरुआत, जानें- कैसे मिलेगा फायदा

ठाकरे परिवार के नाम पर महाराष्ट्र में शुरू होने वाली यह पहली स्कीम है। इससे पहले ठाकरे परिवार के किसी सदस्य के नाम पर सरकार की कोई स्कीम नहीं लागू हुई थी।

uddhav thackerayबालासाहेब ठाकरे के नाम पर महाराष्ट्र सरकार ने शुरू की योजना

महाराष्ट्र सरकार ने शिवसेना के संस्थापक बालासाहेब ठाकरे के नाम पर दुर्घटना बीमा योजना की शुरुआत की है। राज्य के होम मिनिस्टर राजेश टोपे ने स्कीम का ऐलान करते हुए कहा कि इसके तहत दुर्घटना में पीड़ित लोगों को अस्पताल में इलाज के लिए 30,000 रुपये की रकम मिलेगी। टोपे ने बताया कि राज्य कैबिनेट ने बालासाहेब ठाकरे ऐक्सिडेंटल इंश्योरेंस स्कीम को मंजूरी दे दी है। इस स्कीम से किसी हादसे में पीड़ित लोगों को अस्पताल में तत्काल इलाज मिल सकेगा। योजना के तहत पीड़ित को अधिकतम 30,000 रुपये तक की मदद या फिर अस्पताल के इलाज का खर्च मिल सकता है।

इसके साथ ही कोरोना पीड़ितों को राहत देते हुए सरकार ने ऐलान किया है कि COVID-19 मरीजों के लिए ऑक्सीजन ले जाने वाले वाहनों को एंबुलेंस का दर्जा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि 1,000 मीट्रिक टन ऑक्सिजन का प्रतिदिन उत्पादन हो रहा है। इसमें से 5000 टन ऑक्सिजन की जरूरत कोरोना पीड़ितों के लिए है। इसके अलावा 300 टन ऑक्सिजन की जरूरत अन्य मरीजों के लिए रहती है। इस तरह राज्य में 200 टन ऑक्सिजन अतिरिक्त बचेगी।

महाराष्ट्र में कोरोना के केसों का आंकड़ा 11,21,221 को पार कर चुका है। अकेले बुधवार को ही 23,365 नए मामले सामने आए हैं। इसके अलावा 474 लोगों की मौत हुई है और राज्य में मृतकों का कुल आंकड़ा 30,883 हो गया है। यही नहीं राज्य में भी सबसे ज्यादा प्रभावित मुंबई शहर है। सिटी में बुधवार को 2,378 कोरोना के मामले आए हैं। मुंबई में अब तक कोरोना संक्रमण की वजह से 8,280 लोगों की मौत हो गई है।

ठाकरे परिवार के किसी सदस्य के नाम पर पहली स्कीम: बता दें कि ठाकरे परिवार के नाम पर महाराष्ट्र में शुरू होने वाली यह पहली स्कीम है। इससे पहले ठाकरे परिवार के किसी सदस्य के नाम पर सरकार की कोई स्कीम नहीं लागू हुई थी। यही नहीं यह पहला मौका है, जब उद्धव ठाकरे के तौर पर परिवार के किसी सदस्य ने संवैधानिक पद संभाला है। इससे पहले तक ठाकरे फैमिली हमेशा किंगमेकर की भूमिका के तौर पर रही है। बाला साहेब ठाकरे ने कभी कोई संवैधानिक पद नहीं लिया था। हालांकि बीजेपी के साथ कई सालों तक शिवसेना उनके दौर में केंद्र और राज्य की सत्ता में रही थी।

 

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