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रामदेव की इस कंपनी के लिए भारी पड़े बीते 4 दिन, हो चुका है इतना नुकसान

बीते सोमवार से ही रुचि सोया के शेयर में गिरावट देखने को मिल रही है। बीएसई इंडेक्स पर गौर करें तो रुचि सोया का शेयर भाव 4 फीसदी से ज्यादा गिर चुका है।

रुचि सोया के शेयर में गिरावट देखने को मिल रही है। (Photo-indian express )

Baba ramdev firm Ruchi Soya share price: योग गुरु रामदेव की कंपनी रुचि सोया के निवेशकों के लिए बीते कुछ दिन ठीक नहीं रहे हैं। इस हफ्ते के शुरुआती चार कारोबारी दिनों में रुचि सोया के निवेशकों को बड़ा नुकसान हुआ है।

दरअसल, बीते सोमवार से ही रुचि सोया के शेयर में गिरावट देखने को मिल रही है। बीएसई इंडेक्स पर गौर करें तो रुचि सोया का शेयर भाव 4 फीसदी से ज्यादा गिर चुका है। बीते शुक्रवार को जो शेयर भाव 715 रुपये के स्तर पर था वो अब 680 रुपये के नीचे है। सप्ताह के चौथे कारोबारी दिन यानी गुरुवार को रुचि सोया का शेयर भाव 2.28 फीसदी लुढ़क कर 675.10 रुपये के स्तर पर आ गया है।

कहने का मतलब ये है कि सिर्फ चार कारोबारी दिन में प्रति शेयर 40 रुपये तक की गिरावट आई है। यानी निवेशकों को प्रति शेयर के हिसाब से 40 रुपये का नुकसान हुआ है। इसमें सबसे ज्यादा नुकसान इंट्रा ट्रेड करने वाले निवेशकों को होता है।

बहरहाल, रुचि सोया का मार्केट कैपिटल एक बार फिर 20 हजार करोड़ रुपये के नीचे आ गया है। फिलहाल, बीएसई इंडेक्स पर रुचि सोया का मार्केट कैपिटल 19,972.23 करोड़ पर आ गया है। बीते 52 हफ्ते की बात करें तो रुचि सोया का शेयर भाव आधा हो चुका है। 29 जून 2020 को रुचि सोया का शेयर भाव 1535 रुपये के स्तर पर था।

शेयर बाजार में लगातार 5वें दिन गिरावट: देश के शेयर बाजारों में लगातार पांचवें दिन गिरावट रही। बंबई शेयर बाजार (बीएसई) के सेंसेक्स में बड़ा वजन रखने वाली इन्फोसिस, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और टीसीएस जैसी कंपनियों के शेयरों में गिरावट से सेंसेक्स 585 अंक लुढ़क गया।

दिन में कारोबार के दौरान 500 अंक के करीब बढ़त हासिल करने वाले बीएसई सेंसेक्स न कारोबार की समाप्ति तक पूरी बढ़त को गंवा दिया और अंत में यह पिछले दिन के मुकाबले 585.10 अंक यानी 1.17 प्रतिशत लुढ़ककर 49,216.52 अंक पर बंद हुआ। इसी प्रकार नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी सूचकांक भी 163.45 अंक यानी 1.11 प्रतिशत गिरकर 14,557.85 अंक पर बंद हुआ।

क्या है बाजार में गिरावट की वजह: देश के भीतर कोरोना वायरस के मामलों में वृद्धि तेज होने से निवेशकों के बीच डर का माहौल है। कोरोना के बढ़ते मामलों से उद्योग धंधों के कामकाज में जो सुधार का रुख आ रहा था, उसको लेकर शंका बढ़ने लगी है। इससे नये आर्थिक प्रतिबंधों का डर बनने लगा है।

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