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बाबा रामदेव की कंपनी पर है करीब 3400 करोड़ रुपए का कर्ज, जानिए किन लोगों की है गांरंटी

रामदेव की कंपनी रुचि सोया अपना 4300 करोड़ रुपए का एफपीओ यानी फॉलो ऑन पब्‍लि‍क ऑफर लेकर आने वाली है। जिसके लिए कंपनी की ओर से ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रोस्‍पेक्‍टस भी फाइल कर दिया है। जिसके अनुसार लोन के लिए रामदेव के भाई और बालकृष्‍ण ने पर्सजन गारंटी दी है।

तेल के आयात को लेकर योगगुरु रामदेव भी सवाल खड़े कर चुके हैं

योग गुरु रामदेव की कंपनी रुचि सोया 4300 करोड़ रुपए का फॉलो ऑन पब्‍लिक ऑफर लेकर आने वाली है। एफपीओ के लिए कंपनी की ओर से डीआरएचपी भी फाइल कर ली गई है। इस फाइलिंग के अनुसार बाबा रामदेव के भाई और बालकृष्‍ण ने पर्सनल गारंटी दी है। बैंकों की ओर से यह लोन तब लिया गया था जब रुचि सोया का पतंजलि की ओर से अधिग्रहण किया गया था। कर्ज करीब 3400 करोड़ रुपए है।

रुचि सोया को वित्‍त वर्ष 2025 तक 824 करोड़ रुपए और वित्‍त वर्ष 2029 तक कंपनी को 1553 करोड़ रुपए वापस करने है। रुचि का एफपीओ लान इसनिए भी जरूरी हो गया है क्‍योंकि सेबी के नियमों के अनुसार किसी भी लिस्‍टेड कंपनी में प्रमोटर की हिस्‍सेदारी 75 फीसदी से ज्‍यादा नहीं होनी चाहिए। जबकि मौजूदा समय में प्रमोटर की हिस्‍सेदारी 98 फीसदी से ज्‍यादा है।

आंकड़ों के अनुसार रुचि सोया के प्रमोटर की कंपनी में हिस्‍सेदारी 98.90 फीसदी है। जिसे अगले दो से तीन सालों में 75 फीसदी लेकर आनी है। पतंजलि की ओर से रुचि सोया का अधि‍ग्रहण दिसंबर 2019 में 4350 करोड़ रुपए में किया था। उससे पहले रुचि सोया पर करीब 9000 करोड़ का कर्ज था। 4 सितंबर 2019 को एनसीएलटी ने इसके अधिग्रहण की परमीशन दी थी। जिसके बाद उन्हीं बैंकों ने पतंजलि को 3250 करोड़ रुपए का लोन दिया था। जिसके बाद अधि‍ग्रहण किया गया था।

जिन लोगों ने पतंजलि को लोन दिया था उनमें से स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, कैनरा बैंक और इंडियन बैंक शामिल हैं। जिसके लिए आचार्य बालकृष्ण, बाबा रामदेव के भाई राम भरत और स्नेहलता भरत की ओर से पर्सनल गारंटी दी गई थी। ये तीनों कंपनी के इंडिविजुअल प्रमोटर्स हैं। आपको बता दें क‍ि आचार्य बालकृष्ण के पास कंपनी की 98.54 फीसदी हिस्सेदारी है।

इस पर्सनल गारंटी का इस्‍तेमाल तब होगी जब कंपनी अपने कर्ज चुकाने में अक्षम होती है। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के आदेश में लिया गया था। वास्‍तव में सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि अगर कोई भी कंपनी अपने कर्ज को तय समय में चुकाने में अक्षम होती है तो उस पर दिवालिया प्रक्रिया लागू की जा सकती है। वैसे यह तभी संभव हो पाएगा जब जब प्रमोटर्स ने पर्सनल गारंटी दी हो। कोर्ट के आदेश के बाद अगर रुचि सोया अपना कर्ज अपना कर्ज नहीं चुका पाती है तो उसके बाद प्रमोटर्स की पर्सनल गारंटी का इस्‍तेमाल होगा।

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